होर्मुज खुलते ही Crude Oil धड़ाम, 10% तक गिरा ब्रेंट; Gift Nifty सहित अमेरिकी मार्केट में जोरदार तेजी
ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट खोलने के ऐलान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है. इस राहत भरी खबर से अमेरिकी शेयर बाजारों में जोरदार तेजी देखने को मिली, वहीं Gift Nifty भी उछल गया. जानें कहां पहुंचा बाजार.
Hormuz Open and Crude Oil Crash: पश्चिम एशिया से आई एक बड़ी खबर ने ग्लोबल कमोडिटी और इक्विटी बाजारों की दिशा ही बदल दी. ईरान ने ऐलान किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सभी कमर्शियल जहाजों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है, जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली. इस घोषणा के तुरंत बाद ब्रेंट क्रूड करीब 10.7 फीसदी टूटकर 88.73 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 11.2 फीसदी गिरकर 84.05 डॉलर पर पहुंच गया. यह पिछले करीब 6 हफ्तों की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है, क्योंकि इससे पहले पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई थीं.
अमेरिकी बाजार में दमदार तेजी
तेल की कीमतों में आई इस तेज गिरावट का सकारात्मक असर शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला. अमेरिका के प्रमुख सूचकांक मजबूती के साथ उभरे, डॉव जोन्स करीब 700 अंकों की छलांग के साथ 1.5 फीसदी चढ़ा, जबकि S&P 500 और Nasdaq में भी क्रमशः 0.8 फीसदी और 1 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई. खास बात यह रही कि ये दोनों इंडेक्स इंट्राडे के दौरान नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए.
ट्रंप के बयान ने भी किया सपोर्ट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने भी बाजार को सपोर्ट दिया. उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट का संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है और ईरान समझौते के लिए तैयार दिख रहा है. इससे पहले भी उन्होंने संकेत दिए थे कि स्थिति नियंत्रण में है और समाधान के करीब पहुंच चुकी है. इन बयानों ने निवेशकों के सेंटीमेंट को मजबूत किया और जोखिम लेने की क्षमता बढ़ाई.
Gift-Nifty भी उछला
वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है. गिफ्ट निफ्टी करीब 1.26 फीसदी यानी 307 अंकों की तेजी के साथ 24,727.50 के स्तर पर ट्रेड करता दिखा, जो संकेत देता है कि घरेलू शेयर बाजार भी मजबूत शुरुआत कर सकते हैं. हालांकि, आज शुक्रवार, 17 अप्रैल का दिन है. अगले दो दिन बाजार बंद रहेंगे. इसका असर सोमवार को दिख सकता है. तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए राहत लेकर आती है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम हो सकता है.
क्या है होर्मुज का मामला?
दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का एक बेहद अहम रास्ता है, जहां से दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है. फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया था, जिससे सप्लाई को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई थी. उस समय बाजार में यह आशंका भी जताई जा रही थी कि अगर तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं. इसके अलावा, यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा रेड सी के बाब-अल-मंदेब मार्ग को बाधित करने की आशंका ने भी बाजार में डर का माहौल बना दिया था.
कैसे बदले हालात?
हालांकि, अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं. इजराइल और लेबनान के बीच 10 दिन के सीजफायर की घोषणा और ईरान की ओर से होर्मुज को खोलने के फैसले ने वैश्विक बाजारों को राहत दी है. ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि सीजफायर की अवधि तक सभी कमर्शियल जहाजों को तय मार्गों से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जाएगी. इस कदम ने सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता को काफी हद तक खत्म कर दिया, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर दिखा.
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