चांदी के आयात पर सरकार की सख्ती, अब DGFT की मंजूरी के बिना नहीं होगा इम्पोर्ट, जानें पूरा मामला
भारत अपनी चांदी की जरूरतों को पूरा करने के लिए मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम और चीन से आयात करता है. इन देशों से बड़ी मात्रा में चांदी भारत आती है, जिसका उपयोग ज्वेलरी इंडस्ट्री के अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी किया जाता है.
केंद्र सरकार ने चांदी के आयात को लेकर नियमों को और कड़ा कर दिया है. सरकार की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार, अब कुछ निर्धारित चैनलों के माध्यम से चांदी आयात करने के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) से वैध आयात अनुमति लेना अनिवार्य होगा. इस कदम का उद्देश्य बढ़ते चांदी आयात पर नियंत्रण करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को कम करना है.
क्या बदला है?
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब RBI द्वारा नामित एजेंसियों, DGFT से अधिकृत संस्थाओं और इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX) के माध्यम से चांदी आयात करने वाले योग्य ज्वेलर्स को आयात से पहले DGFT की मंजूरी लेनी होगी. चांदी का आयात अब केवल वैध आयात प्राधिकरण (Import Authorisation) मिलने के बाद ही किया जा सकेगा. इससे पहले इन श्रेणियों में आयात प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान थी, लेकिन अब उस पर अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी.
किन प्रकार की चांदी पर लागू होंगे नियम?
नए नियम 99.9 प्रतिशत या उससे अधिक शुद्धता वाली चांदी पर लागू होंगे. इसमें चांदी के बार, दाने (ग्रेन्स), पाउडर, अर्ध-निर्मित (सेमी-मैन्युफैक्चर्ड) उत्पाद और सोने या प्लैटिनम की परत चढ़ी चांदी शामिल है. सरकार ने इन सभी उत्पादों को “रिस्ट्रिक्टेड” यानी प्रतिबंधित श्रेणी में रखा है. इसका अर्थ है कि इनके आयात के लिए अब पहले की तरह सरकारी अनुमति लेना आवश्यक होगा.
सरकार ने यह कदम क्यों उठाया?
पिछले कुछ समय से देश में चांदी के आयात में असामान्य तेजी देखने को मिली है. सरकार का मानना है कि सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं का अत्यधिक आयात विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ाता है. खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ रही हो. इसी वजह से सरकार पहले भी सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने जैसे कदम उठा चुकी है.
चांदी का आयात कितना बढ़ा?
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड 12 अरब डॉलर की चांदी आयात की, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 4.8 अरब डॉलर था. यानी, एक साल में चांदी के आयात में लगभग 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, अप्रैल 2026 में ही चांदी का आयात 157 प्रतिशत बढ़कर 411 मिलियन डॉलर पहुंच गया. यह सरकार की चिंता का एक बड़ा कारण माना जा रहा है.
भारत चांदी कहां से खरीदता है?
भारत अपनी चांदी की जरूरतों को पूरा करने के लिए मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम और चीन से आयात करता है. इन देशों से बड़ी मात्रा में चांदी भारत आती है, जिसका उपयोग ज्वेलरी इंडस्ट्री के अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी किया जाता है.
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
जानकारों का मानना है कि आयात नियमों के सख्त होने और पहले से बढ़े हुए इंपोर्ट ड्यूटी के कारण आने वाले समय में चांदी की कीमतों पर असर पड़ सकता है. यदि आयात की गति धीमी होती है या आपूर्ति प्रभावित होती है, तो घरेलू बाजार में चांदी महंगी हो सकती है. इसका असर चांदी के आभूषण खरीदने वाले उपभोक्ताओं, निवेशकों और उन उद्योगों पर पड़ सकता है जो उत्पादन में चांदी का इस्तेमाल करते हैं.
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