ट्रंप का बड़ा दावा! कहा- ईरान कभी नहीं बनाएगा परमाणु हथियार, $300 मिलियन देने की खबर ‘फेक न्यूज’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने कभी परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जताई है. अमेरिका और ईरान के बीच हुए प्रारंभिक शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है. हालांकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और फंडिंग को लेकर कई अहम सवाल अब भी बाकी हैं.

ट्रंप Image Credit: @Money9live

US-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए हुए शांति समझौते के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है. ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो गया है. इसके साथ ही उन्होंने उन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका इस डील के बदले ईरान को 300 मिलियन डॉलर का भुगतान कर रहा है. ट्रंप ने इसे ‘फेक न्यूज’ करार दिया है.

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा, “ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रखने पर सहमत हो गया है. इसके अलावा, यह कहानी कि अमेरिका ईरान को 300 मिलियन डॉलर दे रहा है, पूरी तरह से फेक न्यूज है, जिसे डेमोक्रेट्स द्वारा फैलाया जा रहा है.”

अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता

ट्रंप का यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच खाड़ी में चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए एक प्रारंभिक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर करने के कुछ घंटे बाद आया. रविवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने इलेक्ट्रॉनिक रूप से इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते के तहत अप्रैल में घोषित किए गए युद्धविराम को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है. हालांकि, ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य, उसकी फ्रीज की गई संपत्तियों और प्रतिबंधों को हटाने जैसे मुख्य मुद्दों पर अभी भी पूरी तस्वीर साफ होना बाकी है.

300 अरब डॉलर का रीकंस्ट्रक्शन फंड

भले ही ट्रंप ने 300 मिलियन डॉलर देने की खबर को अफवाह बताया हो, लेकिन ट्रंप प्रशासन के ही एक वरिष्ठ अधिकारी ने संवाददाताओं को बताया कि इस सौदे में युद्ध से प्रभावित ईरान के लिए 300 अरब डॉलर का एक संभावित रीकंस्ट्रक्शन (पुनर्निर्माण) फंड शामिल हो सकता है. हालांकि, अधिकारी ने साफ किया कि यह फंड ईरान को सीधे नहीं मिलेगा, बल्कि इसे ईरान के ‘प्रदर्शन और व्यवहार’ से जोड़ा जाएगा.

होर्मुज को दोबारा खोलने पर बनी सहमति

इस शांति समझौते का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल व्यापार पर देखने को मिलेगा. ट्रंप ने पुष्टि की है कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई है. ट्रंप ने कहा, “तेल से लदे जहाज होर्मुज स्ट्रेट से बाहर निकलने लगे हैं. वे दक्षिणी हाईवे से जा रहे हैं, जो पूरी तरह से सुरक्षित है.”

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी सीएनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान के साथ यह सहमति बनी है कि इस समुद्री रास्ते को लंबे समय के लिए ‘टोल-फ्री’ रखा जाएगा. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अगले कुछ हफ्तों में जहाजों की आवाजाही युद्ध-पूर्व के स्तर पर लौट आएगी.

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टोल टैक्स को लेकर ईरान का अलग रुख

भले ही अमेरिका इसे पूरी तरह फ्री बता रहा हो, लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को थोड़ा अलग रुख अपनाया. ईरान का कहना है कि इस समझौते के तहत उन्हें जहाजों पर कोई ‘टोल’ लगाने की नहीं, बल्कि समुद्री सेवा शुल्क वसूलने की अनुमति होगी.

इस शुरुआती समझौते के बाद अब अमेरिका और ईरान के पास पूरे मामले को सुलझाने के लिए 60 दिनों का समय है. इस समय सीमा के भीतर दोनों देश एक पूर्ण शांति समझौते का मसौदा तैयार करने की कोशिश करेंगे. एक अमेरिकी अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि आगामी तकनीकी वार्ताओं में ‘परमाणु चर्चा’ को सबसे ऊपर और प्राथमिकता पर रखा जाएगा.