IPO से पहले Ola Consumer का कमाल! कंपनी का फ्री कैश फ्लो हुआ पॉजिटिव; Uber और Rapido को छोड़ा पीछे

IPO की तैयारी कर रही Ola Consumer ने बड़ा वित्तीय मील का पत्थर हासिल किया है. कंपनी फ्री कैश फ्लो पॉजिटिव बनने के साथ प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने में सफल रही है, जबकि Uber और Rapido अब भी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भारी खर्च कर रहे हैं. FY25 में Ola का रेवेन्यू 1,171 करोड़ रुपये रहा, जो Rapido से अधिक है.

ओला कंज्यूमर आईपीओ Image Credit: Money9 Live

Ola Consumer: भारत के राइड-हेलिंग सेक्टर में लंबे समय से मार्केट शेयर की लड़ाई चल रही है. Ola, Uber और Rapido जैसी कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने और ड्राइवर नेटवर्क बढ़ाने के लिए लगातार निवेश कर रही हैं. लेकिन अब इस प्रतिस्पर्धा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. Ola Consumer ने न केवल फ्री कैश फ्लो पॉजिटिव होने का दावा किया है, बल्कि कंपनी ने प्रॉफिटेबिलिटी भी हासिल कर ली है. वहीं दूसरी ओर उसके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी Rapido और Uber अभी भी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए हर महीने भारी रकम खर्च कर रहे हैं. कंपनी ने डिस्काउंट और इंसेंटिव आधारित ग्रोथ मॉडल की बजाय मुनाफे और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है. इसी का परिणाम है कि Ola अब प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक मजबूत वित्तीय स्थिति में दिखाई दे रही है.

FY25 में रेवेन्यू के मामले में Ola रही आगे

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में Ola Consumer का ऑपरेटिंग रेवेन्यू लगभग 1,171 करोड़ रुपये रहा. यह Rapido के 934 करोड़ रुपये के रेवेन्यू से काफी अधिक है. यदि ग्राहक डिस्काउंट और ड्राइवर इंसेंटिव को एडजस्ट करने के बाद नेट रेवेन्यू की बात की जाए, तो यह अंतर और भी बड़ा दिखाई देता है. रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया तिमाही में Ola का नेट रेवेन्यू लगभग 250 करोड़ रुपये से 300 करोड़ रुपये के बीच रहा.

वहीं Rapido का नेट रेवेन्यू करीब 40 करोड़ रुपये से 45 करोड़ रुपये और Uber का लगभग 35 करोड़ रुपये से 40 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है. ये आंकड़े बताते हैं कि Ola प्रत्येक लेनदेन से अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में कहीं अधिक मूल्य हासिल कर रही है.

Rapido और Uber पर भारी पड़ रही ग्रोथ की लागत

राइड-हेलिंग उद्योग में बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कंपनियां ग्राहकों और ड्राइवरों को आकर्षित करने हेतु भारी इंसेंटिव देती हैं. उद्योग के जानकारों का अनुमान है कि Rapido वर्तमान में हर महीने 80 करोड़ रुपये से 100 करोड़ रुपये तक खर्च कर रही है.

दूसरी ओर, Uber की भारत स्थित राइड-हेलिंग यूनिट भी हर महीने 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठा रही है. रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, Uber India की राइड-हेलिंग यूनिट ने वित्त वर्ष 2025 में लगभग 88 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया, जबकि उसे लगभग 1,401 करोड़ रुपये का सेगमेंट लॉस हुआ.

लागत नियंत्रण पर Ola का फोकस

Ola ने पिछले एक वर्ष में लागत कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. कंपनी ने वर्कफोर्स का पुनर्गठन किया, विभिन्न ऑपरेशंस को इंटीग्रेट किया और ऑटोमेशन पर जोर दिया. इन पहलों के कारण कंपनी की ऑपरेशनल लागत में उल्लेखनीय कमी आई.

कंपनी से जुड़े लोगों का कहना है कि इन उपायों की मदद से Ola वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में फ्री कैश फ्लो पॉजिटिव बनने में सफल रही. साथ ही कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 में EBITDA ब्रेकईवन भी हासिल कर लिया है. यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब टेक्नोलॉजी सेक्टर की कई कंपनियां अभी भी मुनाफे की राह तलाश रही हैं.

IPO की तैयारी

Ola Consumer अब शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है. कंपनी की मूल यूनिट ANI Technologies ने अपने FY25 के कंसोलिडेटेड वित्तीय दस्तावेजों में खुलासा किया है कि बोर्ड ने IPO प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और लिस्टिंग प्रक्रिया से जुड़े आवश्यक कदम शुरू कर दिए हैं.

कंपनी ने IPO से संबंधित खर्च भी शुरू कर दिए हैं और वित्त वर्ष 2025 के दौरान ऑडिट सर्विसेज तथा सर्टिफिकेशन पर 4.2 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इससे संकेत मिलता है कि कंपनी आने वाले समय में सार्वजनिक निर्गम के जरिए निवेशकों से पूंजी जुटाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है.

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