Razorpay ने IPO के लिए गोपनीय रूट से फाइल किया ड्राफ्ट पेपर, जानें- कब तक मार्केट में हो सकती है एंट्री

Razorpay IPO: 2014 में शुरू हुई रेजरपे ऐसी टेक्नोलॉजी देती है जिससे बिनेस कार्ड, नेट बैंकिंग, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और डिजिटल वॉलेट जैसे तरीकों से ऑनलाइन पेमेंट ले और प्रोसेस कर पाते हैं. रेजरपे का मुकाबला Paytm, वॉलमार्ट-समर्थित PhonePe, Cashfree और BillDesk जैसी फिनटेक कंपनियों से है.

रेजरपे आईपीओ. Image Credit: money9live.com

Razorpay IPO: भारतीय फिनटेक कंपनी रेजरपे (Razorpay) ने लगभग 600 मिलियन डॉलर के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए गोपनीय रूप से ड्राफ्ट पेपर फाइल किए हैं. गोपनीय तरीका IPO लाने वाली कंपनियों को पब्लिक इश्यू लॉन्च होने तक अपनी फाइलिंग को निजी रखने की सुविधा देता है.

कब कर सकती है मार्केट डेब्यू?

मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने सोमवार को रॉयटर्स को बताया कि बेंगलुरु बेस्ड कंपनी, जिसे Y कॉम्बिनेटर, लाइटस्पीड और सिंगापुर के सॉवरेन वेल्थ फंड GIC जैसे निवेशकों का समर्थन प्राप्त है, 2026 के अंत तक शेयर बाजार में उतरने की योजना बना रही है.

रिपोर्ट के अनुसार, एक्सिस कैपिटल, जेपी मॉर्गन, सिटी और कोटक महिंद्रा कैपिटल इस डील पर सलाह देने वाले बैंकर हैं.

रेजरपे क्या करती है?

2014 में शुरू हुई रेजरपे ऐसी टेक्नोलॉजी देती है जिससे बिनेस कार्ड, नेट बैंकिंग, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और डिजिटल वॉलेट जैसे तरीकों से ऑनलाइन पेमेंट ले और प्रोसेस कर पाते हैं. कंपनी मर्चेंट से ट्रांजैक्शन फीस लेकर कमाई करती है.

मर्चेंट लेंडिंग सर्विस

अपने मुख्य पेमेंट गेटवे बिजनेस के अलावा, कंपनी पेरोल मैनेजमेंट और मर्चेंट लेंडिंग सर्विस में भी अपनी सर्विस बढ़ा रही है. भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में रेजरपे का मुकाबला Paytm, वॉलमार्ट-समर्थित PhonePe, Cashfree और BillDesk जैसी फिनटेक कंपनियों से है.

वैल्यूएशन की जांच

हालांकि, अभी तक यह आधिकारिक रूप से पता नहीं चल सका है कि रेजरपे अपने IPO के लिए क्या वैल्यूएशन टारगेट कर रही है. 2021 में अपनी पिछली बड़ी फंडरेजिंग के दौरान कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 7.5 अरब डॉलर थी, जब उसने 375 मिलियन डॉलर जुटाए थे.

पिछली क्लोजिंग के समय पेटीएम का मार्केट कैपिटलाइजेशन 718.5 अरब रुपये (7.60 अरब डॉलर) था, जबकि PhonePe ने जियो-पॉलिटिकल तनाव और ग्लोबल कैपिटल मार्केट में उतार-चढ़ाव का हवाला देते हुए अपने बहुप्रतीक्षित IPO को कुछ समय के लिए रोक दिया.

भारत का आईपीओ बाजार

पिछले दो साल में भारत के बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे थे, लेकिन इस साल ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल युद्ध से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. LSEG के डेटा के मुताबिक, 2025 में अमेरिका के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा IPO बाजार था, जहां 367 लिस्टिंग के जरिए 21.8 अरब डॉलर जुटाए गए.

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