कहीं आपका म्यूचुअल फंड तो नहीं बन गया वेल्थ क्रिएशन में बाधा? ये 6 वार्निंग साइन बता देंगे पूरी सच्चाई; जानें डिटेल
शेयर बाजार में बढ़ती वोलैटिलिटी के बीच म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए अपने पोर्टफोलियो की नियमित समीक्षा करना बेहद जरूरी हो गया है. बेंचमार्क से लगातार कमजोर प्रदर्शन, ऊंचा एक्सपेंस रेशियो, फंड मैनेजर में बार-बार बदलाव और पोर्टफोलियो ओवरलैप जैसे कई संकेत यह बता सकते हैं कि आपका फंड सही परिणाम नहीं दे रहा है.

Mutual Fund Warning Signs: वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और वेस्ट एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण हाल के दिनों में शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है. ऐसे माहौल में म्यूचुअल फंड निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि उनके निवेश का प्रदर्शन कमजोर क्यों हो रहा है और क्या उन्होंने सही फंड का चयन किया है. बाजार में अस्थिरता के दौरान म्यूचुअल फंड्स की वास्तविक क्वालिटी सामने आती है. यदि कोई फंड लगातार उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है या अपने बेंचमार्क और प्रतिस्पर्धी फंड्स की तुलना में कमजोर प्रदर्शन कर रहा है, तो निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए. कुछ ऐसे संकेत हैं, जो बताते हैं कि आपका म्यूचुअल फंड आपकी वित्तीय जरूरतों और निवेश लक्ष्यों के अनुरूप नहीं है.
बेंचमार्क से लगातार कमजोर प्रदर्शन
किसी भी फंड का शॉर्ट टर्म कमजोर प्रदर्शन चिंता का विषय नहीं होता, क्योंकि मार्केट साइकिल के अनुसार सभी फंड्स में उतार-चढ़ाव आता है. लेकिन यदि कोई फंड लगातार अपने बेंचमार्क इंडेक्स और कैटेगरी एवरेज से पीछे चल रहा है, तो यह एक चेतावनी संकेत हो सकता है.
निवेशकों को 1 वर्ष, 3 वर्ष और 5 वर्ष जैसी विभिन्न समयावधियों के प्रदर्शन की तुलना करनी चाहिए. यदि फंड लंबे समय से अपने बेंचमार्क को मात देने में असफल रहा है, तो बेहतर ट्रैक रिकॉर्ड वाले विकल्पों पर विचार किया जा सकता है.
रिस्क के मुकाबले कम रिटर्न
केवल ऊंचे रिटर्न देखकर फंड चुनना सही रणनीति नहीं मानी जाती. यह समझना भी जरूरी है कि उन रिटर्न्स को हासिल करने के लिए फंड ने कितना रिस्क उठाया है. दो फंड्स समान रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन उनमें रिस्क का स्तर अलग-अलग हो सकता है. ऐसे में शार्प रेशियो और सॉर्टिनो रेशियो जैसे रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न इंडिकेटर्स निवेशकों को बेहतर तस्वीर दिखाते हैं. यदि फंड अधिक रिस्क लेकर भी औसत रिटर्न दे रहा है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है.
ऊंचा एक्सपेंस रेशियो, लेकिन रिटर्न कमजोर
एक्सपेंस रेशियो वह शुल्क है, जो फंड हाउस निवेश मैनेजमेंट, प्रशासनिक और ऑपरेशनल खर्चों के लिए निवेशकों से वसूलता है. यह राशि सीधे फंड की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) से काट ली जाती है. यदि किसी फंड का एक्सपेंस रेशियो ज्यादा है, लेकिन उसका प्रदर्शन समान कैटेगरी के अन्य फंड्स से कमजोर है, तो यह लंबे समय में निवेशकों की एसेट क्रिएशन क्षमता को प्रभावित कर सकता है.
फंड मैनेजर में बार-बार बदलाव
फंड मैनेजर किसी भी म्यूचुअल फंड की रणनीति और निवेश निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसलिए फंड मैनेजर का बार-बार बदलना प्रदर्शन में अस्थिरता ला सकता है. हालांकि, एक बार का बदलाव सामान्य बात हो सकती है, लेकिन यदि फंड हाउस में लगातार बदलाव हो रहे हैं, तो निवेशकों को सतर्क हो जाना चाहिए. यह देखना जरूरी है कि फंड मैनेजर बदलने के बाद फंड के प्रदर्शन पर कोई नकारात्मक असर तो नहीं पड़ा.
पोर्टफोलियो ओवरलैप का बढ़ना
कई निवेशक डाइवर्सिफिकेशन के उद्देश्य से एक ही कैटेगरी के कई फंड्स खरीद लेते हैं. लेकिन इससे हमेशा फायदा नहीं होता. उदाहरण के लिए, यदि किसी निवेशक के पास दो या तीन लार्ज कैप फंड्स हैं, तो उनकी टॉप होल्डिंग्स काफी हद तक समान हो सकती हैं. इससे डाइवर्सिफिकेशन का लाभ कम हो जाता है और कॉन्सेंट्रेशन रिस्क बढ़ सकता है. इसलिए समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा कर अनावश्यक फंड्स को कम करना जरूरी है.
फाइनेंशियल गोल्स से मेल नहीं खाना
कई बार कोई फंड अच्छा रिटर्न दे रहा होता है, लेकिन वह निवेशक के फाइनेंशियल गोल्स और रिस्क प्रोफाइल के अनुरूप नहीं होता. उदाहरण के लिए, यदि किसी निवेशक की रिस्क एपेटाइट सीमित है, लेकिन वह स्मॉल कैप फंड्स में अधिक निवेश कर रहा है, तो बाजार में गिरावट के समय उसे भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है. वहीं, यदि किसी निवेशक का लक्ष्य लंबी अवधि में अधिक वेल्थ क्रिएशन करना है, तो केवल डेट फंड्स या कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड्स पर्याप्त रिटर्न नहीं दे पाएंगे.
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