PSU बैंक शेयरों से MF ने बनाई दूरी! 8 महीने के निचले स्तर पर पहुंची स्टेक, निवेशकों के लिए चेतावनी या मौका?
मई 2026 में म्यूचुअल फंड्स ने PSU बैंक शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटा दी है. इससे निवेशकों के बीच सवाल उठने लगे हैं कि क्या फंड मैनेजर इस सेक्टर को लेकर सतर्क हो गए हैं या फिर यह सिर्फ मुनाफावसूली और पोर्टफोलियो में बदलाव का हिस्सा है. PSU बैंक शेयरों में आई यह गिरावट चिंता की बात है या फिर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए नया मौका बन सकती है.
PSU Bank Mutual Fund: पिछले कुछ सालो में PSU बैंक शेयरों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. बेहतर मुनाफा, घटते NPA और मजबूत बैलेंस शीट की वजह से इन बैंकों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी थी. लेकिन अब एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है. मई 2026 में म्यूचुअल फंड्स ने PSU बैंक शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटा दी है. इससे निवेशकों के बीच सवाल उठने लगे हैं कि क्या फंड मैनेजर इस सेक्टर को लेकर सतर्क हो गए हैं या फिर यह सिर्फ मुनाफावसूली और पोर्टफोलियो में बदलाव का हिस्सा है.
हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि केवल म्यूचुअल फंड्स की खरीद या बिक्री देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए. निवेशकों को हमेशा कंपनी और सेक्टर की बुनियादी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए. ऐसे में सवाल यह है कि PSU बैंक शेयरों में आई यह गिरावट चिंता की बात है या फिर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए नया मौका बन सकती है.
8 महीने के निचले स्तर पर पहुंची हिस्सेदारी
- Motilal Oswal की रिपोर्ट के मुताबिक मई 2026 में म्यूचुअल फंड्स ने PSU बैंक सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 3.4 फीसदी कर दी.
- यह पिछले 8 महीनों का सबसे निचला स्तर है.
- हालांकि यह आंकड़ा एक साल पहले के मुकाबले अभी भी 0.6 फीसदी ज्यादा है.
- रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि BSE 200 इंडेक्स में PSU बैंकों का वजन ज्यादा होने के बावजूद म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है.
क्या यह चेतावनी का संकेत है?
ET के हवाले से वित्तीय सलाहकार राजेश मिनोचा का कहना है कि निवेशकों को केवल म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए. उनके मुताबिक यह जरूरी नहीं कि फंड्स की हिस्सेदारी घटने का मतलब सेक्टर में कमजोरी हो. कई बार यह सामान्य मुनाफावसूली और पोर्टफोलियो संतुलन का हिस्सा होता है. इसलिए निवेशकों को कंपनी की कमाई, वैल्यूएशन और भविष्य की संभावनाओं पर ध्यान देना चाहिए.
मुनाफावसूली और सेक्टर बदलाव की वजह
- रिपोर्ट के अनुसार हाल के महीनों में म्यूचुअल फंड्स ने NBFC, कैपिटल गुड्स, हेल्थकेयर, सीमेंट और ई-कॉमर्स जैसे सेक्टरों में निवेश बढ़ाया है.
- वहीं PSU बैंक, ऑयल एंड गैस, टेक्नोलॉजी और मेटल सेक्टर में हिस्सेदारी कम की है.
- PSU बैंक शेयरों में पिछले दो साल की मजबूत तेजी के बाद फंड मैनेजर मुनाफा बुक कर रहे हैं और दूसरे सेक्टरों में नए अवसर तलाश रहे हैं.
PSU बैंकों की हालत अब भी मजबूत
हालांकि हिस्सेदारी कम हुई है, लेकिन PSU बैंकों की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है. वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में PSU बैंकों का कुल नेट मुनाफा 11.1 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 1.98 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. यह लगातार चौथा साल है जब इस सेक्टर ने मजबूत मुनाफा दर्ज किया है.
इसके अलावा मार्च 2026 तक सकल NPA घटकर 1.93 फीसदी और नेट NPA 0.39 फीसदी पर आ गया. कई PSU बैंकों की स्थिति अब निजी बैंकों के बराबर या उनसे बेहतर हो गई है. खराब कर्ज में कमी और मजबूत बैलेंस शीट से सेक्टर की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है.

निवेशकों को क्या करना चाहिए?
PSU बैंक सेक्टर का भविष्य अभी भी सकारात्मक दिख रहा है. क्रेडिट ग्रोथ में सुधार, मजबूत मुनाफा और बेहतर एसेट क्वालिटी इसके पक्ष में हैं. हालांकि सेक्टर आधारित फंड्स में निवेश करने के बजाय निवेशकों को विविधता वाले इक्विटी फंड्स को प्राथमिकता देनी चाहिए. इससे अलग-अलग सेक्टरों में निवेश का फायदा मिलता है और जोखिम भी कम रहता है. PSU बैंक शेयर पोर्टफोलियो में सीमित हिस्सेदारी के रूप में अच्छे हो सकते हैं, लेकिन केवल इसी सेक्टर पर दांव लगाना सही रणनीति नहीं होगी.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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