RBI के सख्ती से सरकारी बैंकों के शेयरों में दबाव! 3 फीसदी से ज्यादा टूटे स्टॉक्स, जानें पूरा मामला

RBI ने साफ कर दिया है कि ECL आधारित प्रोविजनिंग सिस्टम 1 अप्रैल अगले साल से लागू होगा और इसे टालने की मांग स्वीकार नहीं की गई है. बैंकों ने सिस्टम अपग्रेड और डेटा तैयार करने के लिए ज्यादा समय मांगा था, लेकिन RBI ने इसे खारिज कर दिया. अभी बैंक तब प्रावधान बनाते हैं जब नुकसान हो जाता है.

क्यों गिरे बैंकिंग स्टॉक्स? Image Credit: Canva

Why PSU Banking Stocks Crashed : सरकारी बैंकों के शेयरों में मंगलवार को कमजोरी देखने को मिली. Bank of India, Bank of India और Union Bank of India जैसे PSU बैंक शेयर 3 फीसदी से ज्यादा गिर गए. इसकी वजह Reserve Bank of India (RBI) का Expected Credit Loss (ECL) नियमों को लेकर सख्त रुख है. इस खबर के बाद PSU बैंक इंडेक्स में गिरावट देखने को मिली. सुबह 10:55 बजे के आसपास यह इंडेक्स करीब 1.1 प्रतिशत नीचे ट्रेड कर रहा था, जिससे इस सेक्टर में भारी दबाव देखने को मिला.

कौन से शेयर कितने टूटे?

शेयरकरंट प्राइसबदलाव ( फीसदी में )
Bank of India142.78-3.21
Bank of Baroda266.22-2.84
Canara Bank137.30-2.29
Bank of Mah78.08-2.09
Union Bank172.70-1.93
Punjab and Sind25.25-1.75
PNB111.96-1.69
SBI1,098.20-1.23
Indian Bank901.90-1.18
Central Bank36.15-1.01
UCO Bank26.30-0.94
IOB35.10-0.62
सोर्स-NSE, समय-10 AM

ECL नियम लागू करने पर RBI सख्त

RBI ने साफ कर दिया है कि ECL आधारित प्रोविजनिंग सिस्टम 1 अप्रैल अगले साल से लागू होगा और इसे टालने की मांग स्वीकार नहीं की गई है. बैंकों ने सिस्टम अपग्रेड और डेटा तैयार करने के लिए ज्यादा समय मांगा था, लेकिन RBI ने इसे खारिज कर दिया. अभी बैंक तब प्रावधान बनाते हैं जब नुकसान हो जाता है, लेकिन ECL सिस्टम में पहले से अनुमान लगाकर प्राविजन करना होगा, जिससे बैंकों पर प्रोविजनिंग का बोझ बढ़ सकता है और यही निवेशकों की चिंता का कारण बना.

RBI ने क्या कहा?

RBI ने कहा कि बैंकों को पहले ही एक साल का समय दिया गया है ताकि वे नए सिस्टम के लिए खुद को तैयार कर सकें. साथ ही ट्रांजिशन को आसान बनाने के लिए कुछ राहत भी दी गई है, जैसे कैपिटल पर असर को धीरे धीरे लागू करने की सुविधा, पुराने लोन अकाउंट्स पर Effective Interest Rate लागू करने के लिए तीन साल का समय और कुछ खास कैटेगरी के लोन के लिए अलग प्रावधान.

NPA नियमों में कोई बदलाव नहीं

केंद्रीय बैंक ने NPA यानी नॉन परफॉर्मिंग एसेट से जुड़ी परिभाषा में बदलाव की मांग को भी खारिज कर दिया. RBI का कहना है कि यह फ्रेमवर्क पहले से ही साफ और मजबूत है और इसे सभी स्टेकहोल्डर्स समझते हैं, इसलिए इसमें बदलाव की जरूरत नहीं है.

ECL लागू करना क्यों चुनौतीपूर्ण?

RBI के मुताबिक, हर बैंक का बिजनेस मॉडल, ग्राहक आधार और डेटा अलग होता है, इसलिए एक जैसा विस्तृत नियम सभी पर लागू करना सही नहीं होगा. ECL सिस्टम में बैंकों को अपने स्तर पर जोखिम का आकलन करना होगा, जिससे शुरुआत में ऑपरेशनल चुनौतियां आ सकती हैं.

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