Closing Bell: सेंसेक्स 736 अंक उछलकर और निफ्टी 23800 के ऊपर बंद, अमेरिका-ईरान डील से चमका बाजार

Closing Bell: सोमवार 15 जून को अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद जियो-पॉलिटिकल तनाव में काफी कमी आई, जिससे भारतीय शेयरों समेत ग्लोबल रिस्क एसेट्स को बढ़ावा मिला. निवेशकों ने लगभग चार महीने से चल रहे टकराव के खत्म होने का स्वागत किया.

शेयर मार्केट में जोरदार तेजी. Image Credit: AI Generated

Closing Bell: भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते की शुरुआत दलाल स्ट्रीट पर तेजी के साथ की. ईरान-अमेरिका शांति समझौते के फ्रेमवर्क, तेल की गिरती कीमतों और अन्य वजहों से सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों में 1.5 फीसदी से अधिक की बढ़त देखी गई, और बाजार ने ग्लोबल बाजारों की चाल को फॉलो किया.

15 जून को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क मजबूती के साथ बंद हुए. फार्मा और हेल्थकेयर को छोड़कर सभी सेक्टर में व्यापक खरीदारी के बीच निफ्टी 50 इंडेक्स 23,800 के स्तर के ऊपर बंद हुआ.

सेंसेक्स 736.38 अंक या 0.97 फीसदी बढ़कर 76,264.33 पर और निफ्टी 231 अंक या 0.98 फीसदी बढ़कर 23,853.90 पर बंद हुआ. लगभग 2973 शेयरों में बढ़त देखी गई, 1245 शेयरों में गिरावट आई और 185 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.

टॉप गेनर्स और लूजर्स

निफ्टी में शामिल शेयरों में श्रीराम फाइनेंस, ट्रेंट, एचडीएफसी लाइफ, आयशर मोटर्स और बजाज फिनसर्व सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर रहे. दूसरी ओर, एनटीपीसी, ओएनजीसी, बजाज ऑटो, आईसीआईसीआई बैंक और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे.

सेक्टोरल इंडेक्स

सेक्टर के हिसाब से देखें तो हेल्थकेयर और फार्मा को छोड़कर सभी प्रमुख इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए. निफ्टी रियल्टी इंडेक्स ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया और इसमें लगभग 4 फीसदी की बढ़त हुई, जबकि ऑटो, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में प्रत्येक में लगभग 2 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई.

सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए. इसमें निफ्टी रियल्टी इंडेक्स सबसे आगे रहा, जिसमें लगभग 4% की तेजी आई. निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी सीमेंट, निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी IT और निफ्टी केमिकल्स जैसे अन्य सेक्टोरल इंडेक्स में भी अच्छी बढ़त देखी गई और ये 1% से 3% तक ऊपर चढ़े.

इस तेजी में ब्रॉडर मार्केट भी शामिल रहे, जिसमें निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में प्रत्येक में 1 प्रतिशत की बढ़त हुई.

तेल की कीमतों गिरावट

कच्चे तेल की कीमतों में तुरंत आई गिरावट ने भी दलाल स्ट्रीट के बुल्स का समर्थन किया, क्योंकि भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए इससे महंगाई का दबाव कम होता है, मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता बेहतर होती है और पॉलिसी में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है.

मजबूत हुआ रुपया

सोमवार को भारतीय रुपया 40 पैसे की बढ़त के साथ 94.71 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि शुक्रवार को यह 95.11 पर बंद हुआ था.

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