SBI, PNB सहित इन सरकारी बैंकों पर दांव लगा रहे विदेशी निवेशक, सस्ता वैल्यूएशन और घटते NPA से बढ़ा भरोसा; फोकस में रखें शेयर
विदेशी निवेशकों ने 31 दिसंबर तक के डेटा के अनुसार सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी एक साल के उच्च स्तर पर पहुंचा दी है. State Bank of India, Bank of Baroda, Canara Bank और Punjab National Bank जैसे बैंकों में निवेश बढ़ा है. टेक शेयरों से निकासी के बीच सस्ते वैल्यूएशन, घटते NPA और मजबूत क्रेडिट ग्रोथ ने PSU बैंकों को आकर्षक बनाया है.
PSU Banks Foreign Investors: शेयर बाजार में जहां एक ओर टेक और AI सेक्टर सुर्खियों में हैं, वहीं दूसरी ओर विदेशी निवेशक चुपचाप सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं. 31 दिसंबर तक के शेयरहोल्डिंग डेटा के मुताबिक, पब्लिक सेक्टर बैंकों में विदेशी निवेश एक साल के हाई लेवल पर पहुंच गया है. यह रुझान बताता है कि ग्लोबल फंड्स अब स्थिर और सस्ते वैल्यूएशन वाले सेक्टर की ओर झुक रहे हैं.
किन बैंकों में बढ़ी विदेशी हिस्सेदारी?
विदेशी निवेशकों ने प्रमुख सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है. इनमें State Bank of India, Bank of Baroda, Canara Bank और Punjab National Bank शामिल हैं. कभी ऊंचे NPA और कमजोर बैलेंस शीट के कारण चर्चा में रहने वाले ये बैंक अब मजबूत मुनाफे और बेहतर एसेट क्वालिटी के कारण निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं.
टेक सेक्टर से निकासी, बैंकिंग में क्यों एंट्री?
फरवरी के पहले 15 दिनों में विदेशी फंड्स ने भारतीय टेक शेयरों से भारी बिकवाली की. हाई वैल्यूएशन और वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने रिस्क कम करने की रणनीति अपनाई. इसके विपरीत, सरकारी बैंक अपेक्षाकृत कम वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं और उनकी इनकम में स्थिरता दिखाई दे रही है. यही कारण है कि फंड्स टेक से पैसा निकालकर बैंकिंग सेक्टर में लगा रहे हैं.
सस्ता वैल्यूएशन बना बड़ा आकर्षण
Nifty PSU Index करीब 11 गुना फॉरवर्ड अर्निंग्स पर ट्रेड कर रहा है, जबकि Nifty Bank Index लगभग 15 गुना पर है. यह अंतर दिखाता है कि सरकारी बैंक अभी भी डिस्काउंट पर उपलब्ध हैं. बेहतर नतीजों और बढ़ती प्रॉफिट के साथ यह वैल्यूएशन गैप कम हो रहा है, जिससे विदेशी निवेशकों को अपसाइड की संभावना दिख रही है.
कैसा है शेयरों का प्रदर्शन
अगर शेयरों के प्रदर्शन की बात करें तो सरकारी बैंकों ने पिछले 5 साल में निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है. एसबीआई के शेयरों ने इस अवधि में करीब 197 फीसदी का रिटर्न दिया है. बैंक ऑफ बड़ौदा ने लगभग 250 फीसदी का रिटर्न दिया है. वहीं केनरा बैंक का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है और उसने करीब 381 फीसदी का रिटर्न दिया है. इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक ने भी 5 साल में लगभग 209 फीसदी का रिटर्न देकर निवेशकों को अच्छा मुनाफा दिया है.
NPA में कमी और मजबूत क्रेडिट ग्रोथ
पिछले कुछ वर्षों में PSU बैंकों ने अपने खराब कर्ज (NPA) में उल्लेखनीय कमी की है. साथ ही, क्रेडिट ग्रोथ में सुधार हुआ है और डिजिटल ऑपरेशंस में भी प्रगति देखी गई है. इन सुधारों का असर सीधे मुनाफे और रिटर्न रेशियो पर पड़ा है, जिससे इन बैंकों की विश्वसनीयता बढ़ी है. सरकार की संभावित विनिवेश (disinvestment) योजना और बैंकिंग सेक्टर में कंसोलिडेशन की चर्चाएं भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा रही हैं.
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डेरिवेटिव्स मार्केट से भी मिल रहे संकेत
ऑप्शन मार्केट के आंकड़े भी तेजी का संकेत दे रहे हैं. कुछ प्रमुख सरकारी बैंकों में कॉल ऑप्शन की खरीदारी बढ़ी है, जो बताती है कि ट्रेडर्स आगे और तेजी की उम्मीद कर रहे हैं. यह संकेत करता है कि केवल कैश मार्केट ही नहीं, बल्कि डेरिवेटिव्स मार्केट भी PSU बैंकों को लेकर पॉजिटिव है.
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