म्यूचुअल फंड या PMS… जोरदार रिटर्न के लिए कौन सा ऑप्शन है दमदार, जानें- दोनों में क्या है अंतर
म्यूचुअल फंड और PMS निवेशकों के लिए दो लोकप्रिय निवेश विकल्प हैं, लेकिन दोनों की संरचना, निवेश रणनीति, लागत और जोखिम प्रोफाइल काफी अलग हैं. जहां म्यूचुअल फंड में निवेश 100 रुपये से शुरू किया जा सकता है, वहीं PMS के लिए कम से कम 50 लाख रुपये का निवेश जरूरी है. म्यूचुअल फंड सभी निवेशकों के लिए एक समान पोर्टफोलियो प्रदान करते हैं, जबकि PMS में निवेशक की जरूरतों के अनुसार कस्टमाइज्ड पोर्टफोलियो तैयार किया जाता है.
Mutual Fund vs PMS: शेयर बाजार और अन्य फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करने वाले निवेशकों के सामने अक्सर एक सवाल आता है कि म्यूचुअल फंड बेहतर है या PMS (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज). दोनों ही निवेश के लोकप्रिय विकल्प हैं, लेकिन इनकी स्ट्रक्चर, निवेश रणनीति, लागत काफी अलग होती है. ऐसे में निवेश से पहले दोनों के बीच का अंतर समझना बेहद जरूरी हो जाता है. म्यूचुअल फंड और PMS दोनों का उद्देश्य निवेशकों के लिए एसेट क्रिएट करना है, लेकिन निवेश का तरीका और अनुभव पूरी तरह अलग होता है.
क्या है म्यूचुअल फंड
म्यूचुअल फंड एक ऐसा निवेश माध्यम है, जिसमें कई निवेशकों का पैसा एक साथ जमा किया जाता है. इसके बाद फंड मैनेजर उस पैसे को शेयर, बॉन्ड, कमोडिटी या अन्य फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करता है. म्यूचुअल फंड की सबसे बड़ी खासियत इसकी आसान पहुंच है. निवेशक मात्र 100 रुपये से भी निवेश शुरू कर सकते हैं.
एसआईपी और लंप सम जैसे विकल्पों के कारण यह नए और छोटे निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय है. म्यूचुअल फंड में निवेशक सीधे शेयरों के मालिक नहीं होते, बल्कि वे फंड की यूनिट्स रखते हैं. फंड मैनेजर निवेश संबंधी फैसले फंड के निर्धारित निवेश उद्देश्य के अनुसार लेता है.
क्या है PMS
PMS (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज) एक कस्टमाइज्ड निवेश सर्विस है. इसमें पोर्टफोलियो मैनेजर निवेशक की वित्तीय जरूरतों, जोखिम लेने की क्षमता, निवेश अवधि और लक्ष्यों के आधार पर व्यक्तिगत पोर्टफोलियो तैयार करता है. SEBI के नियमों के अनुसार PMS में निवेश करने के लिए कम से कम 50 लाख रुपये का निवेश आवश्यक है.
यही कारण है कि यह विकल्प मुख्य रूप से HNIs के बीच लोकप्रिय है. PMS में निवेशक के नाम पर शेयर और अन्य एसेट्स सीधे उसके डिमैट अकाउंट में रखे जाते हैं. निवेशक को अपने पोर्टफोलियो में मौजूद प्रत्येक निवेश की स्पष्ट जानकारी मिलती है.
म्यूचुअल फंड और PMS में प्रमुख अंतर
न्यूनतम निवेश: म्यूचुअल फंड में निवेश 100 रुपये से शुरू किया जा सकता है, जबकि PMS में न्यूनतम निवेश 50 लाख रुपये है.
- पोर्टफोलियो स्ट्रक्चर: म्यूचुअल फंड में एक स्कीम के सभी निवेशकों का पोर्टफोलियो समान होता है. वहीं, PMS में हर निवेशक का पोर्टफोलियो अलग होता है और उसकी जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाता है.
- निवेश रणनीति: म्यूचुअल फंड लार्ज कैप, मिड कैप, स्मॉल कैप, फ्लेक्सी कैप, हाइब्रिड और डेट फंड जैसी पूर्व निर्धारित कैटेगरी में निवेश करते हैं. वहीं, PMS में पोर्टफोलियो मैनेजर को अधिक स्वतंत्रता होती है. वह SME स्टॉक, REITs, InvITs, ETFs और अन्य विशेष अवसरों में भी निवेश कर सकता है.
- ओनरशिप: म्यूचुअल फंड में निवेशक फंड यूनिट्स के मालिक होते हैं, जबकि PMS में निवेशक सीधे शेयरों और अन्य एसेट्स के मालिक होते हैं.
- डाइवर्सिफिकेशन: म्यूचुअल फंड आमतौर पर अधिक डाइवर्सिफाइड होते हैं. दूसरी ओर, PMS पोर्टफोलियो अपेक्षाकृत कंसंट्रेटेड हो सकते हैं, जिससे रिटर्न की संभावना बढ़ती है, लेकिन जोखिम भी बढ़ सकता है.
- फ्लेक्सिबिलिटी: म्यूचुअल फंड निर्धारित नियमों और मैंडेट के तहत संचालित होते हैं. PMS मैनेजर के पास निवेश संबंधी निर्णय लेने की अधिक स्वतंत्रता होती है.
- ट्रांसपेरेंसी: म्यूचुअल फंड अपने पोर्टफोलियो का खुलासा मासिक आधार पर करते हैं. PMS में निवेशक अपने होल्डिंग्स और ट्रांजैक्शंस को सीधे देख सकते हैं.
- कॉस्ट स्ट्रक्चर: म्यूचुअल फंड में टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) लिया जाता है. PMS में मैनेजमेंट फीस, परफॉर्मेंस फीस या दोनों का संयोजन लागू हो सकता है, जिससे इसकी लागत अधिक होती है.
- टैक्सेशन: म्यूचुअल फंड में टैक्स आमतौर पर यूनिट्स बेचने या रिडीम करने पर लगता है. PMS में पोर्टफोलियो मैनेजर द्वारा किए गए ट्रांजैक्शंस के कारण कैपिटल गेंस टैक्स की देनदारी पहले भी उत्पन्न हो सकती है.
कौन किसके लिए बेहतर
म्यूचुअल फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं, जो कम राशि से डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो और प्रोफेशनल मैनेजमेंट चाहते हैं. वहीं, PMS उन HNIs के लिए उपयुक्त है, जो कम से कम 50 लाख रुपये निवेश कर सकते हैं और अपनी जरूरतों के अनुसार कस्टमाइज्ड निवेश रणनीति चाहते हैं.
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