क्या CIBIL स्कोर की जगह लेगा AI? बिना क्रेडिट हिस्ट्री भी मिल सकेगा लोन, जानें नई क्रेडिट सिस्टम की कहानी

भारत में लोन मंजूरी के लिए अब तक CIBIL स्कोर सबसे अहम पैमाना माना जाता रहा है, लेकिन बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ क्रेडिट आकलन के तरीके भी तेजी से विकसित हो रहे हैं. सरकार, बैंक और फिनटेक कंपनियां मिलकर ऐसे AI-आधारित क्रेडिट मॉडल पर काम कर रही हैं, जिसमें पारंपरिक क्रेडिट हिस्ट्री के अलावा वैकल्पिक डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा. इसका मतलब यह है कि जिन लोगों ने कभी लोन या क्रेडिट कार्ड नहीं लिया, वे भी अपनी वित्तीय गतिविधियों के आधार पर लोन पाने के योग्य बन सकते हैं.

नए मॉडल में बिजली और मोबाइल बिल समय पर भरना, UPI ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड, बैंक खाते में नियमित बचत, डिजिटल भुगतान की आदत और आय-व्यय का पैटर्न जैसे संकेतकों को शामिल किया जा सकता है. इससे खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं, छोटे कारोबारियों और नए कमाने वालों के लिए औपचारिक वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच आसान हो सकती है, जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम अक्सर “नो-हिस्ट्री” की वजह से लोन देने से कतराता है.

हालांकि इस बदलाव के साथ डेटा गोपनीयता, पारदर्शिता और एल्गोरिदमिक पक्षपात जैसे सवाल भी उठ रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मजबूत नियमों और सुरक्षा उपायों के साथ लागू किया जाए, तो यह कदम भारत को अधिक समावेशी और डेटा-आधारित क्रेडिट इकोसिस्टम की ओर ले जा सकता है.

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