स्मॉलकैप फंड बने जुलाई में निवेशकों की पहली पसंद, 39% बढ़ा निवेश; डेट फंड में भी बड़ी वापसी

AMFI के जुलाई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश घटकर ₹24,697 करोड़ रहा. हालांकि स्मॉलकैप फंड में निवेश 39% बढ़कर ₹7,768 करोड़ पहुंच गया. डेट फंड में जून के ₹1.09 लाख करोड़ के आउटफ्लो के मुकाबले जुलाई में ₹1.88 लाख करोड़ का इनफ्लो आया. SIP योगदान भी बढ़कर ₹31,961 करोड़ रहा.

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म्यूचुअल फंड निवेश को लेकर जुलाई में निवेशकों का रुख थोड़ा बदला हुआ नजर आया. इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश जून के मुकाबले कम हुआ, लेकिन स्मॉलकैप और मिडकैप फंड में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही. दूसरी ओर डेट फंड में जून की भारी निकासी के बाद जुलाई में जोरदार वापसी देखने को मिली. Association of Mutual Funds in India यानी AMFI की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में इक्विटी म्यूचुअल फंड में 24697 करोड़ रुपये का निवेश आया. जून में यह आंकड़ा 28973 करोड़ रुपये था.

वहीं डेट फंड में जुलाई में 1.88 लाख करोड़ रुपे का निवेश आया, जबकि जून में इनसे 1.09 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई थी.

स्मॉलकैप फंड बना निवेशकों की पहली पसंद

जुलाई में इक्विटी फंड की कैटेगरी में स्मॉलकैप फंड निवेशकों की पहली पसंद रहा. स्मॉलकैप फंड में निवेश जून के 5602 करोड़ रुपये से बढ़कर जुलाई में 7768 करोड़ रुपये हो गया. यानी इसमें करीब 39 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. मिडकैप फंड में भी निवेश थोड़ा बढ़ा. इसमें जून के 6090 करोड़ रुपये के मुकाबले जुलाई में 6192 करोड़ रुपये का निवेश आया.

स्मॉलकैप में बढ़ता निवेश बताता है कि कुछ समय की गिरावट के बाद निवेशक उन हिस्सों में मौके तलाश रहे हैं, जहां उन्हें वैल्यू नजर आ रही है. हालांकि, स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों के मौजूदा वैल्यूएशन को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत भी बताई गई है. इन इंडेक्स के पीई यानी प्राइस-टू-अर्निंग अनुपात काफी ऊंचे हैं. ऐसे में अगर कंपनियों की कमाई की रफ्तार धीमी पड़ती है तो शेयर कीमतों में बड़ी गिरावट का जोखिम बढ़ सकता है.

फ्लेक्सीकैप में निवेश घटा, लार्जकैप से निकासी

जुलाई में फ्लेक्सीकैप फंड में निवेश घटकर 4709 करोड़ रुपये रह गया. जून में इस कैटेगरी में 5231 करोड़ रुपये का निवेश आया था. लार्जकैप फंड का रुख इससे भी कमजोर रहा. जून में लार्जकैप फंड में 2067 करोड़ रुपये का निवेश आया था, लेकिन जुलाई में इसमें 1322 करोड़ रुपये की निकासी हो गई.

फ्लेक्सीकैप फंड के पास अलग-अलग मार्केट कैप वाली कंपनियों में निवेश करने की आजादी होती है. इस कैटेगरी का कुल एयूएम यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट 6 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है. सेक्टोरल और थीमैटिक फंड में भी निवेश कम हुआ. जून में 1469 करोड़ रुपये के मुकाबले जुलाई में इस कैटेगरी में 1328 करोड़ रुपये का निवेश आया.

डेट फंड में जोरदार वापसी

जुलाई में सबसे बड़ा बदलाव डेट फंड में देखने को मिला है. जून में डेट फंड से 1.09 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई थी, लेकिन जुलाई में इसमें 1.88 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया. हालांकि, इस बदलाव को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित होने की जरूरत नहीं है. जुलाई में डेट फंड में आए 1.88 लाख करोड़ रुपये में से करीब 96 फीसदी निवेश लिक्विड, ओवरनाइट और मनी मार्केट फंड में आया.

हाइब्रिड फंड में निवेश हुआ कम

हाइब्रिड फंड में जुलाई के दौरान 11,491 करोड़ रुपये का निवेश आया. जून में यह आंकड़ा 12,893 करोड़ रुपये था. वहीं आर्बिट्राज फंड में निवेश बढ़कर 6502 करोड़ रुपये हो गया, जो जून में 5799 करोड़ रुपये था. मौजूदा रिकवरी दौर में जुलाई आर्बिट्राज फंड के लिए सबसे मजबूत महीनों में से एक रहा. मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड में भी निवेश घटा. जून में 4811 करोड़ रुपये के मुकाबले जुलाई में इस कैटेगरी में 3753 करोड़ रुपये का निवेश आया. हालांकि, इस कैटेगरी में निवेश का रुख अभी भी मजबूत माना जा रहा है.

गोल्ड ETF में निवेश घटा

गोल्ड ETF में जुलाई में 1559 करोड़ रुपये का निवेश आया. जून में यह आंकड़ा 3443 करोड़ रुपये था. यानी एक महीने में गोल्ड ETF में आने वाला निवेश काफी घट गया. हालांकि, मई में मुनाफावसूली के बाद गोल्ड ETF में लगातार दूसरे महीने सकारात्मक निवेश देखने को मिला. जानकारों के मुताबिक सोने में निवेशकों की दिलचस्पी पहले के मुकाबले कुछ कम हुई है, लेकिन गोल्ड ETF में लगातार निवेश आना पूरी तरह नकारात्मक संकेत नहीं है.

SIP में निवेश का जोर कायम

SIP के जरिए निवेश करने वाले लोगों का भरोसा जुलाई में भी बना रहा. जुलाई में SIP योगदान बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये हो गया. जून में यह ₹31,781 करोड़ था. यानी एक महीने में SIP निवेश में मामूली बढ़ोतरी हुई. खास बात यह है कि यह लगातार पांचवां महीना है, जब SIP निवेश 31,000 करोड़ रुपये के आसपास या उससे ऊपर रहा है. यह बताता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद छोटे निवेशकों का नियमित निवेश जारी है.

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