8th Pay Commission: ₹4500 मिले मिनिमम पेंशन, 3 महीने में बदलें DA-DR; इस संगठन का सरकार से बड़ी मांग
आठवें वेतन आयोग के सामने भारत पेंशनर्स समाज ने पेंशनर्स के लिए कई अहम मांगें रखी हैं. संगठन ने न्यूनतम पेंशन 45000 रुपये करने और डीआर को हर तीन महीने में संशोधित करने का प्रस्ताव दिया है. डीआर 25 फीसदी होने पर इसे बेसिक पेंशन में मर्ज करने की मांग भी है. इसके अलावा न्यूनतम बेसिक पे 69000 रुपये और 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी गई है.
Highlights
- 8वें वेतन आयोग के सामने पेंशनर्स ने न्यूनतम पेंशन 45,000 रुपये करने की मांग रखी है.
- डीए और डीआर को हर 3 महीने में संशोधित करने का प्रस्ताव दिया गया है.
- डीआर 25 फीसदी होने पर इसे बेसिक पेंशन में मर्ज करने की मांग की गई है.
8th Pay Commission को लेकर पेंशनर्स की ओर से कई अहम मांगें सामने आई हैं. भारत पेंशनर्स समाज ने आयोग के सामने न्यूनतम पेंशन 45,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा है. संगठन चाहता है कि Dearness Relief यानी DR को मौजूदा साल में दो बार के बजाय हर तीन महीने में संशोधित किया जाए. इसके अलावा DR के 25 फीसदी तक पहुंचने पर इसे बेसिक पेंशन में मर्ज करने की मांग की गई है. इन बदलावों का मकसद बढ़ती महंगाई के बीच पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है.
हर 3 महीने में बदले DA और DR
BPS ने 8th Pay Commission के सामने DA और DR को हर तीन महीने में संशोधित करने की मांग रखी है. अभी DA और DR में बदलाव आम तौर पर साल में दो बार किया जाता है. संगठन का कहना है कि महंगाई का असर पेंशनर्स की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ता है. ऐसे में तीन महीने के औसत महंगाई आंकड़ों के आधार पर राहत राशि में बदलाव किया जाना चाहिए. इससे महंगाई बढ़ने पर पेंशनर्स को जल्दी राहत मिल सकेगी.
25 फीसदी DR पर पेंशन में मर्ज करने की मांग
पेंशनर्स की एक अहम मांग DR को बेसिक पेंशन में मर्ज करने से जुड़ी है. BPS ने प्रस्ताव दिया है कि जब DR 25 फीसदी तक पहुंच जाए तो इसे बेसिक पेंशन में मिला दिया जाए. इससे पेंशन की मूल राशि बढ़ सकती है और आगे मिलने वाली महंगाई राहत की कैलकुलेशन भी ज्यादा बेस पर हो सकती है. संगठन का मानना है कि यह व्यवस्था लंबे समय में पेंशनर्स को महंगाई के असर से बचाने में मदद कर सकती है.
45000 रुपये न्यूनतम पेंशन की मांग
BPS ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 45000 रुपये करने का प्रस्ताव भी दिया है. संगठन ने न्यूनतम बेसिक पे 69000 रुपये और 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है. इसके अलावा परिवार की पेंशन तय करने के लिए 5.2 वेटेड यूनिट का फॉर्मूला अपनाने का प्रस्ताव दिया गया है. इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो पात्र पेंशनर्स और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो सकती है.
10 साल के बजाय 5 साल में हो समीक्षा
BPS ने वेतन और पेंशन की समीक्षा के मौजूदा लंबे अंतराल को कम करने की मांग भी की है. संगठन चाहता है कि वेतन और पेंशन की समीक्षा हर 5 साल में की जाए. उसका तर्क है कि महंगाई और जीवन यापन की लागत लगातार बदलती रहती है. ऐसे में 10 साल के अंतराल पर समीक्षा होने से पेंशनर्स की वास्तविक इनकम पर दबाव पड़ सकता है.
पेंशनर्स के बीच समानता की भी मांग
BPS ने समान स्थिति वाले पेंशनर्स के बीच पेंशन में समानता की मांग भी रखी है. संगठन चाहता है कि 1 जनवरी 2026 से पहले और उसके बाद रिटायर होने वाले समान कैटेगरी के पेंशनर्स के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए. संगठन के अनुसार समान सेवा और स्थिति वाले पेंशनर्स को संशोधित पेंशन का लाभ समान आधार पर मिलना चाहिए. यह मांग 8th Pay Commission की पेंशन समीक्षा में अहम मुद्दा बन सकती है.
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अभी केवल मांगें हैं अंतिम फैसला सरकार का
पेंशनर्स की ओर से रखी गई ये सभी मांगें अभी प्रस्ताव के स्तर पर हैं. 8th Pay Commission ने इन मांगों पर अभी अंतिम फैसला नहीं किया है. आयोग अलग- अलग कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स से सुझाव ले रहा है. इसके बाद आयोग अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगा. सरकार इन सिफारिशों की समीक्षा के बाद ही तय करेगी कि न्यूनतम पेंशन, DA DR की तिमाही समीक्षा और 25 फीसदी DR मर्जर जैसी मांगों को स्वीकार किया जाए या नहीं.
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