EPFO Vishwas 2026: पुराने EPF केस पर बड़ी राहत, कम रेट पर निपटाएं मामला; 29 दिसंबर आखिरी तारीख

EPFO ने Vishwas 2026 स्कीम के तहत पुराने EPF हर्जाना मामलों को कम दर पर निपटाने का मौका दिया है. सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट या CGIT में लंबित मामलों वाले योग्य संस्थानों को इसका फायदा उठा सकते हैं. डिफॉल्ट की अवधि के हिसाब से हर्जाने की दर 0.25%, 0.50% और 1% होगी. योजना की आखिरी तारीख 29 दिसंबर 2026 है.

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Highlights

  • EPFO ने Vishwas 2026 स्कीम के तहत पुराने EPF हर्जाना मामलों को कम दर पर निपटाने का मौका दिया है.
  • सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट या CGIT में लंबित मामलों वाले संस्थान इसका फायदा उठा सकते हैं.
  • डिफॉल्ट की अवधि के हिसाब से हर्जाने की दर 0.25%, 0.50% और 1% होगी.

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने Vishwas 2026 स्कीम शुरू की है. इसके तहत योग्य संस्थानों को पुराने EPF हर्जाना मामलों को कम दर पर निपटाने का मौका दिया गया है. इस स्कीम के तहत उन संस्थानों को राहत मिल सकती है, जिनके EPF हर्जाने से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट या केंद्रीय सरकारी औद्योगिक न्यायाधिकरण यानी CGIT के सामने लंबित हैं.

Vishwas 2026 के तहत मामला निपटाने के लिए छह महीने की समय सीमा दी गई है. यह अवधि 29 जून से शुरू हो चुकी है और 29 दिसंबर 2026 तक चलेगी.

EPFO ने एक्स पर दी जानकारी

EPFO ने 10 अगस्त को एक्स पर एक पोस्ट के जरिए Vishwas 2026 स्कीम की जानकारी दी. EPFO के मुताबिक, योग्य संस्थान इस छह महीने की अवधि में कम दर पर EPF हर्जाने के मामलों का निपटारा कर सकते हैं. यह राहत उन मामलों में मिलेगी जो सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट या CGIT में लंबित हैं.

मामले में डिफॉल्ट यानी भुगतान में देरी कितने समय की है, उसी के हिसाब से हर्जाने की दर तय होगी.

कितनी दर पर निपटेगा मामला?

Vishwas 2026 के तहत EPF हर्जाने की दर डिफॉल्ट की अवधि के आधार पर अलग-अलग होगी.

डिफॉल्ट की अवधिहर्जाने की दर
2 महीने से कम0.25% प्रति माह
2 महीने से 4 महीने से कम0.50% प्रति माह
4 महीने या उससे ज्यादा1% प्रति माह

यानी अगर डिफॉल्ट की अवधि 2 महीने से कम है तो 0.25% प्रति माह की दर लागू होगी. 2 महीने से 4 महीने से कम की अवधि वाले मामलों में 0.50% प्रति माह की दर होगी. वहीं 4 महीने या उससे ज्यादा के डिफॉल्ट पर 1% प्रति माह की दर लागू होगी.

29 दिसंबर तक है मौका

Vishwas 2026 के तहत मामला निपटाने की अवधि 29 जून से 29 दिसंबर 2026 तक है. यानी योग्य प्रतिष्ठानों को इस योजना का फायदा उठाने के लिए छह महीने का समय दिया गया है. 11 अगस्त तक इस समय सीमा में चार महीने से ज्यादा का समय बाकी है. ऐसे में योग्य प्रतिष्ठान अपने पुराने मामलों की समीक्षा कर इस अवधि के दौरान सेटलमेंट के लिए आवेदन कर सकते हैं.

किन मामलों में मिलेगा फायदा?

इस योजना का फायदा उन योग्य प्रतिष्ठानों को मिल सकता है, जिनके EPF हर्जाने से जुड़े मामले इन जगहों पर लंबित हैं:

  • सुप्रीम कोर्ट.
  • हाई कोर्ट.
  • केंद्रीय सरकारी औद्योगिक न्यायाधिकरण यानी CGIT.

ऐसे प्रतिष्ठान रियायती दर पर अपना मामला निपटाने के लिए Vishwas 2026 का फायदा उठा सकते हैं.

क्यों लाई गई है Vishwas 2026 स्कीम?

इस योजना का मकसद लंबे समय से चल रहे मामलों को जल्द निपटाना है. इसके जरिए प्रतिष्ठानों को पुराने EPF हर्जाना मामलों के समाधान का एक आसान रास्ता देने की कोशिश की गई है. कम दर पर मामला निपटाने का विकल्प मिलने से प्रतिष्ठानों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हो सकता है. साथ ही कोर्ट और दूसरे संबंधित मंचों पर लंबे समय से चल रहे मामलों की संख्या भी कम करने में मदद मिल सकती है.

कंपनियों के लिए क्यों जरूरी है यह स्कीम?

जिन संस्थानों के EPF हर्जाने के मामले लंबे समय से लंबित हैं, उनके लिए यह स्कीम आर्थिक बोझ कम करने का मौका दे सकती है. ऐसे संस्थानों को अपने लंबित मामलों, नोटिस और दूसरे कानूनी मामलों की समीक्षा करनी चाहिए. अगर मामला Vishwas 2026 के दायरे में आता है तो 29 दिसंबर 2026 की समय सीमा के भीतर इसका फायदा उठाया जा सकता है.

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