वेज कोड पर बड़ा अपडेट, Double OTA मिलेगा या नहीं? सरकार ने संसद में दिया जवाब
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए ओवरटाइम अलाउंस यानी OTA को लेकर सरकार ने संसद में महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है. नए वेज कोड में सामान्य वेज रेट के कम से कम दोगुने भुगतान का प्रावधान है, लेकिन इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों का OTA अपने-आप डबल नहीं होगा. DoPT के मुताबिक, एलिजिबल नॉन-गजेटेड कर्मचारियों का OTA संबंधित पे कमीशन की सिफारिशों और लागू गवर्नमेंट ऑर्डर्स के आधार पर तय होता है.
Highlights
- नए वेज कोड में ओवरटाइम के लिए सामान्य वेज रेट का कम से कम दोगुना भुगतान करने का प्रावधान है.
- DoPT के मुताबिक, यह लागू गवर्नमेंट रूल्स के आधार पर तय होगा.
- गजेटेड कर्मचारियों के लिए भी फिलहाल OTA का कोई नया एक्सटेंशन घोषित नहीं किया गया है.
Overtime Allowance: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए ओवरटाइम अलाउंस यानी OTA को लेकर सरकार ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है. नए वेज कोड में ओवरटाइम के लिए नॉर्मल वेज रेट का कम से कम दोगुना भुगतान करने का प्रावधान है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज को एक्स्ट्रा आवर्स काम करने पर अपने-आप डबल OTA मिलने लगेगा. यह मामला 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में उठा था. सरकार से पूछा गया था कि कोड ऑन वेजेज, 2019 लागू होने के बाद सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज के ओवरटाइम अलाउंस में कोई बदलाव किया गया है या नहीं. इसके अलावा, यह भी पूछा गया था कि क्या ओवरटाइम का लाभ गजेटेड एम्प्लॉइज तक बढ़ाया जा सकता है.
सरकार ने क्या कहा
डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग यानी DoPT ने बताया कि एलिजिबल नॉन-गजेटेड सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज के लिए OTA अभी भी संबंधित पे कमीशंस की रिकमेंडेशंस और लागू गवर्नमेंट ऑर्डर्स के आधार पर तय होता है. यानी नए वेज कोड के लागू होने मात्र से सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज के मौजूदा OTA रूल्स अपने-आप नहीं बदले हैं. सरकार का यह स्पष्टीकरण इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कोड ऑन वेजेज में ओवरटाइम को लेकर अलग प्रावधान मौजूद है.
वेज कोड में ओवरटाइम को लेकर क्या नियम है
कोड ऑन वेजेज की सेक्शन 14 के तहत नॉर्मल वर्किंग डे के निर्धारित आवर्स से ज्यादा काम करने वाले एम्प्लॉई को ओवरटाइम के लिए नॉर्मल वेज रेट का कम से कम दोगुना भुगतान किए जाने का प्रावधान है. लेबर मिनिस्ट्री के कंप्लायंस हैंडबुक में भी वर्किंग आवर्स और ओवरटाइम को सेक्शन 14 के प्रावधानों के तहत शामिल किया गया है.
लेकिन सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज के मामले में इस प्रावधान को सीधे मौजूदा OTA रेट्स में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा सकता. सरकार के जवाब के मुताबिक, सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज का OTA अलग सर्विस रूल्स और गवर्नमेंट ऑर्डर्स के तहत गवर्न होता है.
1991 से तय हैं OTA के आवर्ली रेट्स
सरकार ने यह भी बताया है कि एलिजिबल सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज के लिए आवर्ली OTA रेट्स 19 मार्च 1991 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए निर्धारित किए गए थे. इस 1991 के ऑर्डर में ओवरटाइम पेमेंट का फ्रेमवर्क दिया गया है. कुछ परिस्थितियों में ओवरटाइम वर्क करने पर कंपनसेटरी लीव का भी प्रावधान है. इसलिए वेज कोड में डबल ओवरटाइम का प्रावधान होने के बावजूद सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज के लिए मौजूदा OTA रेट्स को अपने-आप डबल नहीं माना जा सकता.
नॉन-गजेटेड एम्प्लॉइज के लिए क्या बदला
एलिजिबल नॉन-गजेटेड एम्प्लॉइज के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नए वेज कोड ने अपने-आप उनके मौजूदा OTA एंटाइटलमेंट में कोई बदलाव नहीं किया है. किसी एम्प्लॉई को OTA तभी मिलेगा, जब वह संबंधित गवर्नमेंट रूल्स के तहत उस बेनिफिट के लिए एलिजिबल हो.
इसका मतलब यह है कि सिर्फ एक्स्ट्रा आवर्स काम करने से हर सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉई को डबल OTA का अधिकार नहीं मिल जाता. एम्प्लॉई की कैटेगरी, सर्विस रूल्स और ओवरटाइम की मंजूरी जैसे पहलुओं को भी देखा जाएगा.
गजेटेड एम्प्लॉइज को मिलेगा OTA
लोकसभा में सरकार से यह भी पूछा गया था कि क्या उन गजेटेड सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज को OTA का बेनिफिट दिया जाएगा, जो वर्तमान में इस सुविधा के दायरे से बाहर हैं. सरकार के जवाब में गजेटेड एम्प्लॉइज के लिए OTA को लेकर कोई नया एक्सटेंशन अनाउंस नहीं किया गया है.
इसलिए फिलहाल गजेटेड एम्प्लॉइज कोड ऑन वेजेज की सेक्शन 14 को आधार बनाकर यह नहीं मान सकते कि उन्हें अपने-आप OTA का अधिकार मिल गया है. यदि वर्तमान में OTA से बाहर किसी कैटेगरी को यह बेनिफिट देना है या मौजूदा रेट्स में बदलाव करना है, तो इसके लिए अलग गवर्नमेंट डिसीजन की जरूरत होगी.
हर एक्स्ट्रा आवर के लिए नहीं मिलता OTA
सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज के लिए यह समझना भी जरूरी है कि OTA केवल हर एक्स्ट्रा आवर काम करने के बदले मिलने वाला ऑटोमैटिक पेमेंट नहीं है. 1991 के गवर्नमेंट इंस्ट्रक्शंस के मुताबिक, ओवरटाइम को सामान्य तौर पर अवॉइड किया जाना चाहिए और प्रॉपर वर्क ऑर्गनाइजेशन के जरिए एक्स्ट्रा वर्किंग आवर्स की जरूरत को कम करने का प्रयास किया जाना चाहिए.
जहां ओवरटाइम जरूरी हो, वहां उसे कॉम्पिटेंट अथॉरिटी से ऑथराइज कराया जाना चाहिए. यानी ओवरटाइम के पेमेंट के लिए सिर्फ एक्स्ट्रा आवर्स काम करना पर्याप्त नहीं है. संबंधित एम्प्लॉई का OTA के लिए एलिजिबल होना और ओवरटाइम का रूल्स के अनुसार ऑथराइज्ड होना भी जरूरी है.
यह भी पढ़ें: TCS के बाद HCLTech पर भी हैकर का दावा! डेटा लीक की खबर से मचा हड़कंप, कंपनी ने दिया बड़ा अपडेट
Latest Stories
EPFO Vishwas 2026: पुराने EPF केस पर बड़ी राहत, कम रेट पर निपटाएं मामला; 29 दिसंबर आखिरी तारीख
8th Pay Commission: ₹4500 मिले मिनिमम पेंशन, 3 महीने में बदलें DA-DR; इस संगठन का सरकार से बड़ी मांग
8th Pay Commission: कहां तक पहुंची रिपोर्ट और कब तक कर्मचारियों को करना होगा इंतजार? संसद में सरकार ने तोड़ी चुप्पी
