कृषि आय टैक्स फ्री है, लेकिन पैतृक जमीन होने पर क्या बदलता है टैक्स नियम?
पैतृक कृषि जमीन रखने से खुद कोई इनकम टैक्स नहीं लगता. खेती से होने वाली आय भी आमतौर पर टैक्स फ्री है. लेकिन जमीन बेचने, शहरी कृषि भूमि और परिवार में हिस्सेदारी के मामलों में कैपिटल गेन और ITR नियम बदल सकते हैं.

भारत में कृषि से होने वाली आय आमतौर पर इनकम टैक्स से मुक्त होती है. लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें पूरी होना जरूरी है. पैतृक कृषि जमीन के मामले में विरासत में मिली जमीन, उसे बेचने, परिवार में बांटने या उससे कमाई करने पर अलग-अलग टैक्स नियम लागू हो सकते हैं.
इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(1) के तहत कृषि आय पर टैक्स नहीं लगता. हालांकि, अगर कृषि आय 5,000 रुपये से ज्यादा है और गैर-कृषि आय बेसिक टैक्स छूट की सीमा से ऊपर है, तो टैक्स की दर तय करने के लिए कृषि आय को भी ध्यान में रखा जाता है.
पैतृक जमीन रखने पर क्या टैक्स लगेगा?
सिर्फ पैतृक कृषि जमीन का मालिक होने से आपकी टैक्स देनदारी नहीं बनती. जमीन विरासत में मिली हो, गिफ्ट में मिली हो या आपने खुद खरीदी हो, कृषि आय पर छूट जमीन के मालिकाना हक के बजाय आय की प्रकृति पर निर्भर करती है.
इनकम टैक्स कानून के तहत कृषि आय में भारत में स्थित कृषि भूमि से मिलने वाला किराया या राजस्व, खेती-बुवाई और फसल काटने जैसी गतिविधियों से होने वाली आय और कृषि उपज को बाजार में बेचने लायक बनाने के लिए की गई सामान्य प्रोसेसिंग से होने वाली आय शामिल हो सकती है. अगर पैतृक जमीन पर वास्तव में खेती हो रही है और उससे मिलने वाली आय कृषि गतिविधियों से जुड़ी है, तो उस आय पर टैक्स छूट जारी रहती है.
जमीन बेचने पर बदल जाता है नियम
पैतृक कृषि जमीन बेचने पर टैक्स का मामला अलग हो जाता है. यहां सबसे जरूरी बात यह है कि जमीन ग्रामीण कृषि भूमि है या शहरी कृषि भूमि. ग्रामीण कृषि भूमि को आमतौर पर कैपिटल एसेट नहीं माना जाता. इसलिए ऐसी जमीन बेचने से होने वाला लाभ सामान्य तौर पर कैपिटल गेन टैक्स के दायरे में नहीं आता. वहीं, शहरी कृषि भूमि को कैपिटल एसेट माना जा सकता है. ऐसी जमीन बेचने पर होने वाला मुनाफा कैपिटल गेन के तौर पर टैक्स योग्य हो सकता है.
विरासत में मिली जमीन बेचने पर कैसे होगी गणना?
अगर जमीन आपको माता-पिता या दादा-दादी से विरासत में मिली है और वह टैक्स के दायरे वाली जमीन है, तो कैपिटल गेन की गणना करते समय सिर्फ उस दिन की जमीन की कीमत नहीं देखी जाती, जिस दिन आपको जमीन विरासत में मिली थी. आम तौर पर पिछले मालिक की खरीद लागत और होल्डिंग पीरियड को भी ध्यान में रखा जाता है. कृषि जमीन बेचने से कैपिटल गेन होता है तो कुछ शर्तों के तहत दूसरी कृषि जमीन खरीदकर टैक्स छूट का लाभ भी लिया जा सकता है.
परिवार में जमीन बंटी है तो किसे देना होगा टैक्स?
अगर पैतृक जमीन कई कानूनी वारिसों को संयुक्त रूप से मिली है, तो कृषि आय आमतौर पर प्रत्येक व्यक्ति के हिस्से के हिसाब से बांटी जाती है. यानी जिस व्यक्ति की जमीन में जितनी हिस्सेदारी है, उसे उतनी ही कृषि आय अपने नाम रिपोर्ट करनी होगी. अगर जमीन HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) के नाम है और अभी परिवार के सदस्यों में बंटवारा नहीं हुआ है, तो कृषि आय HUF की मानी जाएगी और उसी के ITR में रिपोर्ट की जाएगी.
ITR भरते समय इन बातों का रखें ध्यान
कृषि आय टैक्स फ्री होने के बावजूद, जहां लागू हो, इसे ITR में बताना जरूरी होता है. अगर कृषि आय 5,000 रुपये से ज्यादा है और गैर-कृषि आय बेसिक छूट सीमा से अधिक है, तो टैक्स की दर तय करने में कृषि आय का इस्तेमाल हो सकता है. ऐसे मामलों में ITR-1 या ITR-4 हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध नहीं होता. कृषि आय और अन्य आय के आधार पर ITR-2 या ITR-3 जैसे दूसरे फॉर्म की जरूरत पड़ सकती है.
इन गलतियों से आ सकता है टैक्स नोटिस
पैतृक कृषि जमीन से जुड़े मामलों में कुछ गलतियां टैक्स विभाग की नजर में आ सकती हैं. मसलन, विरासत में मिली जमीन बेचते समय कैपिटल गेन की गलत गणना करना, हर कृषि जमीन की बिक्री को टैक्स फ्री मान लेना और ITR में कृषि आय या जमीन से जुड़े बड़े लेनदेन की सही जानकारी नहीं देना.
इसलिए जमीन के विरासत संबंधी दस्तावेज, पुराने मालिक की खरीद से जुड़े कागज और राजस्व रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए. जमीन ग्रामीण या शहरी कृषि भूमि है, यह भी पहले जांच लेना चाहिए. साथ ही ITR में दी गई जानकारी को AIS (Annual Information Statement) और अन्य रिकॉर्ड से मिलाना जरूरी है.