शेयर बाजार में ज्यादा रिटर्न, फिर भी EPF क्यों है करोड़ों कर्मचारियों की पहली पसंद? जानें 6 वजह

EPF और शेयर बाजार दोनों ही पैसा बढ़ाने के विकल्प हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग है. EPFO के मुताबिक EPF नियमित बचत, नियोक्ता के योगदान, घोषित ब्याज दर, टैक्स लाभ, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाएं देता है. वहीं, शेयर बाजार में ज्यादा रिटर्न की संभावना है, लेकिन कीमतों में उतार-चढ़ाव और नुकसान का जोखिम भी रहता है.

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Highlights

  • EPF और शेयर बाजार दोनों ही पैसा बढ़ाने के विकल्प हैं.
  • शेयर बाजार में ज्यादा रिटर्न की संभावना है.
  • EPFO के मुताबिक EPF नियमित बचत, नियोक्ता के योगदान, घोषित ब्याज दर, टैक्स लाभ, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाएं देता है.

EPF vs Share Market: नौकरी करने वाले लोगों के सामने अक्सर यह सवाल होता है कि रिटायरमेंट के लिए EPF बेहतर है या शेयर बाजार. दोनों ही विकल्प लंबे समय में पैसा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इनकी प्रकृति और उद्देश्य अलग-अलग हैं. शेयर बाजार में लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना हो सकती है, लेकिन इसमें जोखिम भी ज्यादा होता है.

वहीं, EPF का मुख्य मकसद कर्मचारियों को रिटायरमेंट के लिए नियमित बचत करने और एक सुरक्षित फंड बनाने में मदद करना है. EPFO ने अपने आधिकारिक YouTube चैनल पर एक वीडियो के जरिए EPF और शेयर बाजार के बीच 6 बड़े अंतर बताए हैं.

1. EPF में नियमित योगदान, शेयर बाजार में निवेश पूरी तरह अपनी मर्जी से

EPFO के मुताबिक जिन संस्थानों पर EPF Act लागू होता है और जहां कर्मचारी तय वेतन सीमा के दायरे में आते हैं, वहां EPF में योगदान के नियम लागू होते हैं.

EPF में जमा पैसा आमतौर पर तय नियमों और उद्देश्यों के तहत निकाला जा सकता है. इसका मकसद रिटायरमेंट के लिए पैसा सुरक्षित रखना है.

इसके उलट शेयर बाजार में निवेश पूरी तरह अपनी मर्जी से किया जाता है. निवेशक अपनी जरूरत और फैसले के आधार पर शेयर खरीद या बेच सकता है.

2. EPF में कर्मचारी के साथ नियोक्ता भी देता है योगदान

EPF और शेयर बाजार के बीच सबसे बड़ा अंतर निवेश के स्रोत का है. EPF में कर्मचारी के योगदान के साथ नियोक्ता भी तय नियमों के तहत योगदान करता है. इससे कर्मचारी के रिटायरमेंट फंड में अतिरिक्त पैसा जुड़ता है. यानी कर्मचारी को सिर्फ अपनी बचत पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.

वहीं, शेयर बाजार में निवेशक को अपनी जेब से ही पैसा लगाना होता है. यहां नियोक्ता या किसी अन्य व्यक्ति की तरफ से अनिवार्य योगदान नहीं मिलता.

3. EPF में नियमित बचत और घोषित ब्याज, शेयर बाजार में बाजार का जोखिम

EPF में हर महीने नियमित योगदान किया जाता है. इससे कर्मचारियों के लिए बचत की एक आदत बनती है और रिटायरमेंट के लिए लगातार पैसा जमा होता रहता है. EPF पर ब्याज दर सरकार की तरफ से घोषित की जाती है. दूसरी ओर, शेयर बाजार में मिलने वाला रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है.

शेयर बाजार में लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिल सकता है, लेकिन इसमें कीमतों में तेजी से उतार-चढ़ाव हो सकता है. इसलिए निवेश की वैल्यू कम होने का जोखिम भी रहता है.

4. EPF में टैक्स लाभ के साथ पेंशन और बीमा की सुविधा

EPFO के मुताबिक EPF में योगदान, ब्याज और नियमों के अनुसार निकासी पर टैक्स लाभ मिलते हैं. इसके अलावा, पात्र कर्मचारियों को Employees’ Pension Scheme यानी EPS के तहत पेंशन से जुड़े लाभ भी मिल सकते हैं. Employees’ Deposit Linked Insurance यानी EDLI के तहत भी लागू नियमों के अनुसार बीमा का लाभ मिलता है.

यानी EPF सिर्फ निवेश या बचत का विकल्प नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक सुरक्षा के कई पहलू जुड़े हुए हैं.

वहीं, शेयर बाजार में निवेशक को मुख्य रूप से शेयरों की वैल्यू बढ़ने और डिविडेंड से फायदा हो सकता है. शेयर बेचकर मुनाफा होने पर कैपिटल गेन्स टैक्स के नियम भी लागू होते हैं. शेयर बाजार में EPF जैसी पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं नहीं मिलतीं.

5. रिटायरमेंट के लिए EPF में ज्यादा स्थिरता

EPF का संचालन और नियमन केंद्र सरकार के तहत होता है. इसका मुख्य उद्देश्य लंबे समय में कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट फंड तैयार करना है. शेयर बाजार भी नियामकों के नियमों के तहत काम करता है, लेकिन शेयरों की कीमतें आर्थिक परिस्थितियों, कंपनियों के प्रदर्शन और बाजार की स्थितियों के कारण ऊपर-नीचे हो सकती हैं.

इसलिए EPFO के मुताबिक EPF लंबे समय में एक स्थिर और भरोसेमंद रिटायरमेंट फंड बनाने में मदद करता है. वहीं, शेयर बाजार में रिटर्न को लेकर निश्चितता नहीं होती.

6. दोनों का उद्देश्य ही अलग है

EPF का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा देना और रिटायरमेंट के लिए एक फंड तैयार करना है. इसके उलट शेयर बाजार में निवेश का फैसला निवेशक की जोखिम लेने की क्षमता, वित्तीय लक्ष्य और निवेश अवधि पर निर्भर करता है.

शेयर बाजार उन लोगों के लिए ज्यादा उपयुक्त हो सकता है जो बाजार के जोखिम को समझते हैं और कीमतों में उतार-चढ़ाव सहने की क्षमता रखते हैं. वहीं, EPF का मकसद कर्मचारियों के लिए नियमित बचत और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा तैयार करना है.

EPF और शेयर बाजार में 6 बड़े अंतर एक नजर में

आधारEPFशेयर बाजार
निवेश का तरीकानियमित और नियमों के तहत योगदानपूरी तरह निवेशक की इच्छा पर
योगदानकर्मचारी के साथ नियोक्ता भी योगदान करता हैनिवेशक अपनी जेब से पैसा लगाता है
रिटर्नघोषित ब्याज दरबाजार के प्रदर्शन पर निर्भर
जोखिमतुलनात्मक रूप से कमबाजार जोखिम ज्यादा
अतिरिक्त लाभपेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षाऐसी सामाजिक सुरक्षा नहीं
उद्देश्यरिटायरमेंट और आर्थिक सुरक्षासंपत्ति बढ़ाना और निवेश

तो रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर?

EPF और शेयर बाजार को एक-दूसरे का पूरी तरह विकल्प मानना सही नहीं होगा. दोनों की भूमिका अलग है. EPF रिटायरमेंट के लिए एक स्थिर आधार तैयार कर सकता है, जबकि शेयर बाजार लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न की संभावना दे सकता है, लेकिन इसके साथ ज्यादा जोखिम भी जुड़ा है.

इसलिए रिटायरमेंट की योजना बनाते समय सिर्फ ज्यादा रिटर्न को नहीं देखना चाहिए. निवेश का फैसला अपनी उम्र, आय, जोखिम लेने की क्षमता और भविष्य के खर्चों को ध्यान में रखकर करना जरूरी है. EPF को रिटायरमेंट फंड का आधार और शेयर बाजार को लंबी अवधि में अतिरिक्त संपत्ति बनाने के विकल्प के तौर पर देखा जा सकता है.

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