PF निकालने में हो रही देरी? EPFO अधिकारियों ने बताई बड़ी वजह

EPFO में लाखों PF क्लेम 20 दिन से ज्यादा समय से अटके होने का दावा किया गया है. अधिकारियों के संगठन ने IT सिस्टम की दिक्कत, कर्मचारियों की कमी और तकनीकी विशेषज्ञों की कमी को इसकी बड़ी वजह बताया है.

EPFO Image Credit:

EPFO में डिजिटल तरीके से PF क्लेम जल्दी निपटाने की कोशिशों के बावजूद बड़ी संख्या में ऑटो क्लेम 20 दिन से ज्यादा समय से अटके हुए हैं. EPF Officers’ Association ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए IT सिस्टम, स्टाफ की कमी और संगठन के कामकाज से जुड़ी कई समस्याएं गिनाई हैं.

20 दिन से ज्यादा समय से अटके लाखों क्लेम

EPF Officers’ Association ने 3 अगस्त को श्रम एवं रोजगार मंत्री को एक पत्र भेजकर EPFO के कामकाज से जुड़ी कई चिंताएं सामने रखीं. यह पत्र EPF के Central Board of Trustees के चेयरमैन को भी भेजा गया है.

अधिकारियों के संगठन के मुताबिक, नए Centralized IT Enabled System (CITES) से उम्मीद थी कि ज्यादातर PF क्लेम ऑटोमेटिक तरीके से 2-3 दिन में निपटा दिए जाएंगे. लेकिन संगठन का दावा है कि इसके उलट लाखों ऑटो क्लेम 20 दिन से ज्यादा समय से सिस्टम में लंबित हैं. इन क्लेम की स्थिति को लेकर फील्ड ऑफिस और सदस्यों को भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है.

CITES सिस्टम लागू होने में हुई देरी

अधिकारियों के संगठन ने CITES प्रोजेक्ट के लागू होने में हुई देरी पर भी सवाल उठाए हैं. पत्र के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट जनवरी 2023 में C-DAC को दिया गया था और इसे 10 महीने में पूरा करने की समयसीमा तय की गई थी.

हालांकि, संगठन का कहना है कि प्रोजेक्ट के विकास में काफी देरी हुई और जुलाई 2026 में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया. अधिकारियों के मुताबिक, सिस्टम से जुड़ी समस्याओं का असर PF क्लेम के निपटारे और सदस्यों की शिकायतों पर दिखाई दे रहा है.

2004 के बाद IT विभाग में सीधी भर्ती नहीं

EPF Officers’ Association ने EPFO के Information Services Division (ISD) में कर्मचारियों की कमी को भी बड़ी समस्या बताया है. संगठन के अनुसार, ISD में आखिरी सीधी भर्ती 2004 में हुई थी. यानी पिछले 22 वर्षों से इस महत्वपूर्ण IT विभाग में सीधी भर्ती नहीं हुई है.

संगठन ने यह भी दावा किया कि EPFO पिछले तीन वर्षों से फुल-टाइम Chief Technology Officer (CTO) की नियुक्ति नहीं कर पाया है. अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक और तकनीक आधारित संगठन को पर्याप्त IT विशेषज्ञों के बिना चलाना मुश्किल है.

2008 के स्तर पर स्टाफिंग, बढ़ रहा काम का दबाव

अधिकारियों के संगठन के मुताबिक, EPFO में मौजूदा स्टाफ की मंजूर संख्या मार्च 2008 के स्तर पर बनी हुई है. वहीं, काम का बोझ और सदस्यों की संख्या काफी बढ़ चुकी है.

मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों के कार्यालयों पर खास तौर पर ज्यादा दबाव होने का दावा किया गया है. संगठन का कहना है कि पुराने स्टाफिंग मानकों की वजह से कर्मचारियों पर काम का दबाव और सदस्यों की शिकायतें बढ़ रही हैं.

EPS और EPFO के कामकाज में सुधार की मांग

अधिकारियों के संगठन ने Employees’ Pension Scheme (EPS) में भी सुधार की मांग की है. संगठन का कहना है कि EPS की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए बदलाव जरूरी हैं.

इसके अलावा, संगठन ने EPFO में विशेषज्ञ अधिकारियों की भूमिका बढ़ाने और वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति से जुड़ी नीति की समीक्षा करने की मांग की है. अधिकारियों के मुताबिक, EPFO को एक आधुनिक वित्तीय संस्था की तरह काम करने के लिए मजबूत IT ढांचे, पर्याप्त कर्मचारियों और विशेषज्ञ नेतृत्व की जरूरत है.

यह भी पढ़ें- PF में ज्यादा पैसा जमा करते हैं? ब्याज पर लग सकता है टैक्स, जानें ₹2.5 लाख वाला नियम