कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, नए नियमों से ग्रेच्युटी में मिल सकता है ज्यादा फायदा; जानें डिटेल

नए लेबर कोड लागू होने के बाद ग्रेच्युटी नियमों में अहम बदलाव किए गए हैं. Ministry of Labour and Employment के अनुसार अब वेतन की नई परिभाषा के कारण ग्रेच्युटी का पेमेंट बढ़ सकता है. फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को भी एक साल की सर्विस के बाद ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा.

नए लेबर कोड लागू होने के बाद ग्रेच्युटी नियमों में अहम बदलाव किए गए हैं. Image Credit: Money9live

Gratuity Rules 2026: देश में नए लेबर कोड लागू होने के बाद ग्रेच्युटी के नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं. ये नियम 21 नवंबर से लागू माने जाएंगे. मिनिस्ट्री ऑफ लेबर एंड एंप्लॉयमेंट के मुताबिक इन बदलावों का असर कर्मचारियों और कंपनियों दोनों पर पड़ेगा. सबसे बड़ा बदलाव वेतन की नई परिभाषा को लेकर है. इससे ग्रेच्युटी की कैलकुलेस पर सीधा असर पड़ेगा. नए नियम कर्मचारियों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकते हैं.

क्या नहीं बदला ग्रेच्युटी में

नए नियमों के बावजूद ग्रेच्युटी का बेसिक स्ट्रक्चर पहले जैसा ही रखा गया है. कर्मचारियों को लगातार 5 साल की सर्विस के बाद ग्रेच्युटी मिलती रहेगी. रिटायरमेंट, इस्तीफा या अन्य स्थितियों में इसका भुगतान होगा. कैलकुलेशन का तरीका भी पहले जैसा ही है. इसमें अंतिम सैलरी और सर्विस के वर्षों को आधार बनाया जाता है.

फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को बड़ा फायदा

नए नियमों में फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है. अब यदि कोई कर्मचारी एक साल तक काम करता है तो उसे ग्रेच्युटी मिलेगी. यह राशि काम की अवधि के हिसाब से तय होगी. इससे कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वालों को बड़ा लाभ मिलेगा. हालांकि एक साल से कम अवधि वाले कर्मचारी इसके पात्र नहीं होंगे.

ग्रेच्युटी की कैलकुलेश कैसे होगी

ग्रेच्युटी की कैलकुलशनो का फॉर्मूला पहले जैसा ही रखा गया है. इसमें लास्ट सैलरी और पूरे किए गए वर्षों को ध्यान में रखा जाता है. हर साल के लिए 15 दिन के वेतन के बराबर राशि मिलती है. यह कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण रिटायरमेंट लाभ है. इससे लंबी अवधि में अच्छी बचत तैयार होती है.

क्यों बढ़ सकता है ग्रेच्युटी का पैसा

सबसे बड़ा बदलाव वेतन की नई परिभाषा में हुआ है. अब बेसिक वेतन और भत्तों को मिलाकर कुल वेतन का कम से कम 50 फीसदी होना जरूरी है. अगर भत्ते ज्यादा हैं तो अतिरिक्त हिस्सा वेतन में जोड़ा जाएगा. इससे ग्रेच्युटी की कैलकुलेशन बढ़ेगी. कई मामलों में भुगतान 20 से 50 फीसदी तक ज्यादा हो सकता है.

क्या शामिल और क्या नहीं

ग्रेच्युटी के लिए वेतन में बेसिक पे और महंगाई भत्ता शामिल होता है. वहीं HRA, बोनस और अन्य भत्ते इसमें शामिल नहीं किए जाते. यह स्पष्ट नियम कर्मचारियों और कंपनियों दोनों के लिए जरूरी है. इससे कैलकुलेशन में ट्रांसपेरेंसी आती है.

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कंपनियों और कर्मचारियों पर असर

नए नियम कर्मचारियों के लिए ज्यादा प्रॉफिटेबल साबित हो सकते हैं. इससे उन्हें रिटायरमेंट के समय ज्यादा पैसा मिलेगा. वहीं कंपनियों के लिए यह लागत बढ़ाने वाला हो सकता है. उन्हें अपने सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करना होगा. साथ ही 30 दिन के भीतर ग्रेच्युटी का पेमेंट करना जरूरी होगा.