मिडिल क्लास देता है 5 गुना ज्यादा ‘लगान’, IPL और राजनीतिक दलों पर जीरो टैक्स, खुल गया कच्चा चिट्ठा

Tax पर कई सारे मीम्स सोशल मीडिया पर शेयर होते रहते हैं. मीम भले ही हंसी उड़ाने के लिए बनाए जाते हो लेकिन इसके जरिए मिडिल क्लास पर बढ़ता टैक्स का बोझ और बढ़ती टैक्स असमानता उजागर होती है. एक तरफ मीडिल क्लास जहां भारी टैक्स चुकाता है वहीं बड़े बिजनेस को टैक्स में छूट मिल जाती है.

मिडिल क्लास पर ज्यादा है टैक्स का बोझ Image Credit: Money9live/Canva

Income Tax: टैक्स को लेकर सोशल मीडिया पर अक्सर कई मीम और बहस होते हुए दिख जाती है कि भारत में हर चीज पर बहुत ज्यादा टैक्स वसूला जाता है. यही नहीं सैलरी क्लास या मिडिल क्लास की भी शिकायत करता रहता है कि टैक्स का बोझ सबसे ज्यादा मिडिल क्लास पर डाला गया है. बहस ये भी है कि बड़े-बड़े बिजनेस, कृषि से मोटी कमाई करने वाले और यहां तक राजनीतिक दलों से या तो कम टैक्स वसूला जाता है या कोई टैक्स नहीं लगाया जाता है.

टैक्स सिस्टम में बड़ी असमानता

हाल ही में, SEBI रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट एके मंधन ने एक्स पर ट्वीट किया. इसमें उन्होंने बताया कि भारत में टैक्स को लेकर बहुत असमानता है. उन्होंने पोस्ट में बताया:

  • 9 करोड़ रुपये की सैलरी पाने वाले व्यक्ति को 4 करोड़ रुपये टैक्स देना पड़ता है.
  • 20 करोड़ रुपये का बिजनेस करने वाले को लगभग 80 लाख रुपये टैक्स देना पड़ता है.
  • 40 करोड़ रुपये की कृषि आय पर कोई टैक्स नहीं लगता.
  • राजनीतिक दलों की 7,000 करोड़ रुपये की कमाई पर भी कोई टैक्स नहीं.
  • IPL जैसी बड़ी स्पोर्ट्स इंडस्ट्री, जिसकी कमाई 12,000 करोड़ रुपये है, वह भी कोई टैक्स नहीं देती.

मंधन ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, “और फिर लोग पूछते हैं कि भारत में ब्रेन ड्रेन कब रुकेगा?” यानी इतनी असामना के बाद लोग पूछते हैं कि भारत से लोग विदेश जाकर काम करना कब बंद करेंगे.

बता दें कि कृषि भूमि से होने वाली इनकम टैक्स फ्री होती है. सरकार ने यह प्रावधान छोटे और गरीब किसानों को आर्थिक रूप से राहत देने के लिए बनाया था. लेकिन ये भी एक फैक्ट है कि बड़े और अमीर किसान, सरकारी सब्सिडी, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सुविधाओं का लाभ लेते हुए भी इस नियम का फायदा उठाकर टैक्स से बच जाते हैं.

यह भी पढ़ें: इनकम टैक्स देने वालों को बड़ी राहत! मिलेगा कंपाउंडिंग का फायदा, जानें कैसे सेटल हो जाएगा केस

हालांकि भारत में सिर्फ 6% लोग ही इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं, और 3% से भी कम लोग टैक्स भरते हैं. सैलरी पाने वाला मिडिल क्लास कुल पर्सनल इनकम टैक्स का लगभग 50% भरता है, जबकि बड़े बिजनेस, राजनीतिक दल और अमीर किसानों को टैक्स से छूट मिल जाती है.

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