FD मैच्योर होने के बाद ऑटो-रिन्यूअल कराना फायदे या घाटे का सौदा? फैसला लेने से पहले समझ लें पूरा गणित

एफडी मैच्योर होने पर उसे ऑटो-रिन्यू कराना हमेशा फायदे का सौदा नहीं होता. नई ब्याज दर पुरानी एफडी से कम हो सकती है, जिससे रिटर्न प्रभावित हो सकता है. साथ ही टैक्स, फ्यूचर की जरूरतों और दूसरे निवेश विकल्पों को भी ध्यान में रखना जरूरी है. इसलिए एफडी रिन्यू करने से पहले ब्याज दर, टैक्स और वित्तीय लक्ष्यों का आकलन जरूर करें.

फिक्स्ड डिपॉजिट Image Credit: Tv9 Bharatvarsh

FD Auto Renewal: फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भारतीय निवेशकों का सबसे पसंदीदा निवेश विकल्प माना जाता है. लोग अलग-अलग बैंकों में बेहतर ब्याज दर मिलने पर एफडी कराते हैं. लेकिन जब एफडी मैच्योर होती है, तो ज्यादातर लोग बिना सोचे-समझे उसे ऑटो-रिन्यू होने देते हैं. हालांकि हर बार ऑटो-रिन्यू कराना सही फैसला नहीं होता. ऐसा करने से आप बेहतर ब्याज दर, अधिक रिटर्न और अपने वित्तीय लक्ष्यों के मुताबिक बेहतर निवेश विकल्पों से चूक सकते हैं.

क्योंकि एफडी के ऑटो-रिन्यू होने पर वह बैंक की मौजूदा ब्याज दर पर दोबारा शुरू होती है, जो आपकी पुरानी एफडी की ब्याज दर से कम भी हो सकती है. उदाहरण के लिए, एक साल की एफडी पर 6.80 फीसदी ब्याज मिल रहा हो, जबकि दो साल से अधिक अवधि की एफडी पर 7 फीसदी तक ब्याज उपलब्ध हो सकता है.

ऑटो-रिन्यू के दौरान निवेशक करते हैं ये बड़ी गलतियां

सबसे बड़ी गलती यह है कि निवेशक शर्तों की समीक्षा किए बिना एफडी को ऑटो-रिन्यू होने देते हैं. इससे उन्हें कम ब्याज दर पर निवेश जारी रखना पड़ सकता है. दूसरी गलती फ्यूचर जरूरतों को नजरअंदाज करना है. अगर किसी व्यक्ति को 18 महीने बाद शादी, घर खरीदने या किसी बड़े खर्च के लिए पैसे चाहिए हों और एफडी दो साल के लिए रिन्यू हो जाए, तो समय से पहले पैसा निकालने पर उसे पेनाल्टी चुकानी पड़ सकती है.

इसके अलावा टैक्स का पहलू भी अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. एफडी से मिलने वाला ब्याज निवेशक के इनकम स्लैब के अनुसार टैक्स के दायरे में आता है. अप्रैल 2025 से सालाना ब्याज 50,000 रुपये (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1 लाख रुपये) से अधिक होने पर टीडीएस भी काटा जाता है.

क्या मौजूदा समय में FD ऑटो-रिन्यू कराना सही है?

2025 में RBI ने रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती कर इसे 5.25 फीसदी तक ला दिया था, जिसका असर एफडी की ब्याज दरों पर भी पड़ा. हालांकि जून 2026 की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में RBI ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा है.

हालांकि सिर्फ मौजूदा ब्याज दरों को देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए. आने वाली MPC बैठकों और ब्याज दरों के रुझान पर भी नजर रखना जरूरी है. अगर दरों में बदलाव की संभावना हो, तो लंबी अवधि की एफडी कराने से पहले अच्छी तरह विचार करना बेहतर रहेगा.

FD रिन्यू करने से पहले अपने लक्ष्यों की करें समीक्षा

एफडी रिन्यू करने से पहले अपनी पूरी निवेश रणनीति पर नजर डालनी चाहिए. अगर आपके पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा कम हो गया है, तो एफडी की राशि को इक्विटी म्यूचुअल फंड में लगाकर संतुलन बनाया जा सकता है. वहीं निकट फ्यूचर की जरूरतों के लिए एफडी और दूसरे डेट विकल्प बेहतर साबित हो सकते हैं.

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