ITR भरने वालों के लिए अलर्ट, इन मामलों में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कर सकता है जांच, जारी की नई गाइडलाइन

CBDT ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न की अनिवार्य स्क्रूटनी से जुड़े नए गाइडलाइन जारी किए हैं. इन नियमों के तहत कुछ टैक्सपेयर्स के ITR को रिक्स स्टैंडर्ड के आधार पर जांच के लिए चुना जाएगा. जिन मामलों में पिछले आकलन के दौरान इनकम में ग्रोथ की गई थी, वे भी स्क्रूटनी के दायरे में आ सकते हैं.

CBDT ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इनकम रिटर्न की अनिवार्य स्क्रूटनी से जुड़े नए गाइडलाइन जारी किए हैं. Image Credit: Canva/ Money9

ITR Scrutiny: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इनकम रिटर्न की अनिवार्य स्क्रूटनी से जुड़े नए दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं. CBDT ने उन मामलों की पहचान के लिए नियम तय किए हैं, जिन्हें गहन जांच के लिए चुना जाएगा. ये दिशा निर्देश वित्त वर्ष 2025-26 में दाखिल किए गए इनकम रिटर्न पर लागू होंगे. विभाग का उद्देश्य ऐसे मामलों की जांच करना है जहां इनकम, ट्रांजेक्शन या अन्य जानकारियों में किसी तरह का रिस्क या गलती दिखाई देती है. इससे टैक्स अनुपालन को मजबूत करने और टैक्स चोरी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.

क्या होती है कंप्लीट स्क्रूटनी

कंप्लीट स्क्रूटनी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वह प्रोसेस है जिसमें किसी टैक्सपेयर्स के इनकम रिटर्न की डिटे से जांच की जाती है. इस दौरान विभाग इनकम, खर्च, निवेश, कर छूट और अन्य फाइनेंशियल डिटेल का वेरिफिकेशन करता है. यदि विभाग को रिटर्न में दी गई जानकारी पर संदेह होता है या कोई जोखिम संकेत मिलता है, तो मामला स्क्रूटनी के लिए चुना जा सकता है.

अनिवार्य जांच के लिए चुना जाएगा

CBDT के अनुसार कुछ विशेष कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के रिटर्न को अनिवार्य रूप से जांच के लिए चुना जाएगा. ये वे मामले होंगे जिनमें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा तय रिक्स स्टैंडर्ड के आधार पर किसी प्रकार की विसंगति या संदेह पाया गया हो. ऐसे मामलों में टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त डॉक्यूमेंट और स्पष्टीकरण देने पड़ सकते हैं.

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पिछले आकलन का भी होगा असर

जानकारों के मुताबि, यदि किसी टैक्सपेयर्स के पिछले आकलन में आयकर अधिकारी ने रिटर्न में दिखाई गई इनकम को स्वीकार नहीं किया था और टैक्स योग्य इनकम में ग्रोथ की थी, तो यह अगले वर्ष के रिटर्न को स्क्रूटनी के लिए चुनने का आधार बन सकता है. यानी पुराने आकलन का प्रभाव भविष्य की जांच प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है.

नियमों में बड़ा बदलाव नहीं

कई टैक्स जानकार, वर्ष 2026-27 के लिए जारी दिशा निर्देशों में ऐसा कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है जो टैक्सपेयर्स पर व्यापक प्रभाव डाले. अधिकांश नियम पिछले वर्ष की तरह ही हैं. इसलिए रेगुलर और सही तरीके से रिटर्न भरने वाले टैक्सपेयर्स को घबराने की जरूरत नहीं है.

टैक्सपेयर्स को क्या सावधानी बरतनी चाहिए

जानकारों के मुताबिक, टैक्सपेयर्स को अपनी इनकम, निवेश, बैंक लेनदेन और टैक्स छूट से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट सही और अपडेट रखने चाहिए. इनकम रिटर्न दाखिल करते समय दी गई जानकारी और वित्तीय रिकॉर्ड में किसी प्रकार का अंतर नहीं होना चाहिए. इससे स्क्रूटनी की स्थिति में जवाब देना आसान होगा और अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकेगा.