Closing Bell: निफ्टी 23200 के नीचे और सेंसेक्स 150 अंक गिरकर बंद, टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी बिकवाली
Closing Bell: गुरुवार, 11 जून को भारतीय शेयर बाजार में एक और उतार-चढ़ाव वाला दिन देखने को मिला. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच, दिन के ज्यादातर समय दोनों मुख्य इंडेक्स एक सीमित दायरे में रहे और अंत में गिरावट के साथ बंद हुए.
Closing Bell: गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती गिरावट के बाद रिकवरी हुई और यह पॉजिटिव स्तर पर ट्रेड करने लगा. इससे पहले, पश्चिम एशिया में नए सिरे से तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की चिंताओं के कारण तेल की कीमतें बढ़ गईं और निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में 0.6 फीसदी तक की गिरावट आई थी.
उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए. ज्यादातर सेक्टर में खरीदारी के बावजूद निफ्टी 23,200 के नीचे रहा.
सेंसेक्स 150.63 अंक या 0.20 फीसदी गिरकर 73,832.55 पर और निफ्टी 53.35 अंक या 0.23 फीसदी गिरकर 23,161.60 पर बंद हुआ. लगभग 1325 शेयरों में बढ़त हुई, 2681 शेयरों में गिरावट आई और 187 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.
टॉप गेनर्स और लूजर्स
निफ्टी पर सबसे अधिक बढ़त बनाने वाले शेयरों में ICICI बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, ग्रासिम इंडस्ट्रीज और JSW स्टील शामिल रहे. जबकि गिरने वाले शेयरों में इन्फोसिस, HCL टेक, ट्रेंट, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और एटरनल शामिल थे.
बड़ी कंपनियों के शेयरों (हेवीवेट स्टॉक्स) में कम भागीदारी और टेक्नोलॉजी शेयरों में लगातार बिकवाली के दबाव का असर बाजार की सेंटीमेंट पर भी पड़ा.
पश्चिम एशिया तनाव
अमेरिका द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरान पर हमले जारी रखने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया. ये हमले तब हुए जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि रुकी हुई बातचीत के लिए तेहरान को ‘कीमत चुकानी होगी’, वहीं ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन को निशाना बनाकर जवाबी हमले किए.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हालिया हमलों ने मौजूदा युद्धविराम समझौते को ‘बेमतलब’ बना दिया है. हालांकि, व्यापारियों को इस बात से कुछ राहत मिली कि तनाव का और बढ़ना किसी भी पक्ष के हित में नहीं है.
रुपया का हाल
गुरुवार को भारतीय रुपया 95.27 के पिछले क्लोजिंग भाव के मुकाबले 95.75 प्रति डॉलर पर नीचे बंद हुआ.
मार्केट का सेंटीमेंट हुआ कमजोर
लगातार विदेशी फंड की निकासी, US में महंगाई में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर किया.
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