ITR 4 में बड़ा बदलाव, अब दिखा सकेंगे 2 मकानों की इनकम; किराया नहीं मिला तो भी जान लें नया टैक्स नियम
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ITR 4 फॉर्म में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. अब पात्र टैक्सपेयर दो मकानों से होने वाली इनकम की जानकारी एक ही रिटर्न में दे सकेंगे. साथ ही वसूल न हो सके किराये को दर्ज करने के लिए नया कॉलम जोड़ा गया है.

ITR 4: इनकम टैक्स रिटर्न भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए इस बार कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं. वित्त वर्ष 2025-26 और आकलन वर्ष 2026-27 के लिए ITR 4 फॉर्म में नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं. अब योग्य टैक्सपेयर एक के बजाय दो मकानों से होने वाली इनकम की जानकारी दे सकेंगे. इसके साथ ही ऐसा किराया जो वसूल नहीं हो सका, उसे दर्ज करने के लिए अलग कॉलम भी जोड़ा गया है. इन बदलावों का मकसद रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को अधिक आसान और ट्रांसपेरेंसी बनाना है.
किन लोगों के लिए है ITR 4 फॉर्म
ITR 4 या सुगम फॉर्म भारत के निवासी व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स, हिंदू अविभाजित परिवार और कुछ फर्मों के लिए है. यह फॉर्म उन लोगों के लिए लागू होता है जिनकी कुल इनकम 50 लाख रुपये तक है. साथ ही उनकी इनकम अनुमानित कराधान योजना के तहत व्यापार या पेशे से होती है. वेतन, पेंशन, सीमित कृषि इनकम और कुछ अन्य से इनकम वाले टैक्सपेयर्स भी इस फॉर्म का उपयोग कर सकते हैं.
दो मकानों की जानकारी देने की मिली सुविधा
इस बार ITR 4 में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि टैक्सपेयर अब दो मकानों से जुड़ी इनकम की जानकारी दे सकते हैं. पहले केवल एक मकान की जानकारी देने की अनुमति थी. इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जिनके पास एक से अधिक आवासीय संपत्तियां हैं. नए नियम के तहत दोनों संपत्तियों की इनकम का डिटेल एक ही रिटर्न में शामिल किया जा सकेगा.
किराये वाले मकान का नियम
यदि किसी मकान का एक हिस्सा मालिक खुद यूज करता है और दूसरा हिस्सा किराये पर दिया गया है तो दोनों हिस्सों को अलग संपत्ति माना जाएगा. खुद के यूज वाले हिस्से की इनकम का आकलन स्व-उपयोग वाली संपत्ति के नियमों के अनुसार होगा. वहीं किराये पर दिए गए हिस्से की आय का आकलन किराये वाली संपत्ति के नियमों के अनुसार किया जाएगा.
वसूल न हो सके किराये के लिए नया कॉलम
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ITR 4 में ऐसा किराया दर्ज करने के लिए नया कॉलम जोड़ा है जो मकान मालिक वसूल नहीं कर सका. यह सुविधा उन टैक्सपेयर्स के लिए यूज होगी जिन्हें किरायेदार से पूरा किराया प्राप्त नहीं हुआ है. इससे वास्तविक इनकम की सही जानकारी रिटर्न में दर्ज की जा सकेगी और कर निर्धारण में ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी.
किराये पर कैसे लगेगा टैक्स
यदि पहले वसूल नहीं हो सका किराया बाद में प्राप्त हो जाता है तो उसे उस वर्ष की इनकम माना जाएगा जिसमें वह अमाउंट मिली है. यह नियम तब भी लागू होगा जब उस समय तक व्यक्ति उस संपत्ति का मालिक न हो. हालांकि टैक्सपेयर को ऐसे किराये पर कर लगाने से पहले 30 फीसदी की मानक कटौती का लाभ मिलेगा. इसके बाद बची हुई राशि पर कर लगाया जाएगा.
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रिटर्न भरते समय इन बातों का रखें ध्यान
टैक्स जानकारों का कहना है कि ITR 4 भरते समय संपत्ति से जुड़ी सभी जानकारियां सही तरीके से दर्ज करनी चाहिए. दो मकानों की इनकम, किराये की प्राप्ति और अवास्तविक किराये से जुड़े नए नियमों को समझना जरूरी है. सही जानकारी देने से टैक्सपेयर भविष्य में नोटिस और विवाद जैसी समस्याओं से बच सकते हैं.