25 की जगह 35 साल में शुरू किया SIP? एक गलती की कीमत पड़ सकती है ₹2.5 करोड़; जानें कैसे

ज्यादातर लोग सही शेयर या म्यूचुअल फंड चुनने में समय लगाते हैं, जबकि सबसे बड़ी गलती निवेश शुरू करने में देरी करना है. अगर कोई निवेशक 25 की बजाय 35 साल की उम्र में 10,000 रुपये महीने का SIP शुरू करता है तो 55 साल की उम्र तक उसकी संपत्ति में 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो सकता है.

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SIP Investment: ज्यादातर निवेशक अच्छी कमाई की उम्मीद में मल्टीबैगर शेयर या सबसे बेहतर म्यूचुअल फंड खोजने में लगे रहते हैं. लेकिन कई फाइनेंशियल एक्सपर्ट का कहना है कि लंबी अवधि में सबसे ज्यादा असर इस बात का पड़ता है कि आपने निवेश कब शुरू किया. अगर निवेश की शुरुआत 10 साल देर से होती है तो करोड़ों रुपये की संभावित संपत्ति हाथ से निकल सकती है. आइए जानते हैं कैसे.

समय ही है सबसे बड़ा वेल्थ क्रिएटर

WealthEnrich के संस्थापक और निवेशक अद्वैत अरोड़ा के मुताबिक, संपत्ति बनाने का सबसे बड़ा मंत्र कोई जादुई निवेश नहीं, बल्कि समय पर शुरुआत और लगातार अनुशासित निवेश है.

उदाहरण के तौर पर, अगर कोई निवेशक 25 साल की उम्र से हर महीने 10000 रुपये का SIP करता है और उसे औसतन 12 फीसदी का सालाना रिटर्न मिलता है, तो 55 साल की उम्र तक उसके पास करीब 3.5 करोड़ रुपये की संपत्ति हो सकती है.

वहीं, अगर यही निवेश 35 साल की उम्र से शुरू किया जाए और हर महीने समान राशि निवेश की जाए, तो 55 साल की उम्र तक फंड करीब 1 करोड़ रुपये ही बन पाएगा. यानी सिर्फ 10 साल की देरी से 2.5 करोड़ से ज्यादा का अंतर आ सकता है.

कंपाउंडिंग का असली फायदा आखिर में दिखता है

शुरुआती वर्षों में निवेश की रफ्तार धीमी नजर आती है, इसलिए कई लोग बीच में ही निवेश बंद कर देते हैं. लेकिन कंपाउंडिंग का सबसे बड़ा फायदा आखिरी वर्षों में मिलता है.

₹10,000 के मासिक SIP में पहले 10 साल में कुल निवेश करीब ₹12 लाख होता है और फंड लगभग ₹23 लाख तक पहुंचता है. 20 साल बाद यही निवेश करीब ₹1 करोड़ का हो जाता है. इसके बाद अगले 10 साल में फंड लगभग ₹3.5 करोड़ तक पहुंच सकता है. यानी कुल संपत्ति का 70% से ज्यादा हिस्सा आखिरी 10 वर्षों में बनता है.

हर साल SIP बढ़ाने से दोगुनी हो सकती है संपत्ति

विशेषज्ञों के मुताबिक, सिर्फ जल्दी शुरुआत ही नहीं बल्कि हर साल निवेश बढ़ाना भी जरूरी है. अगर कोई निवेशक 20 साल तक हर महीने ₹10,000 का स्थिर SIP करता है तो करीब ₹1 करोड़ का फंड बन सकता है.

लेकिन अगर वही निवेशक हर साल अपने SIP में 10% की बढ़ोतरी करता है तो 20 साल बाद उसकी कुल संपत्ति करीब ₹2.3 करोड़ तक पहुंच सकती है. इसे स्टेप-अप SIP रणनीति कहा जाता है, जो वेतन बढ़ने के साथ निवेश बढ़ाने में मदद करती है.

कार EMI भी घटा सकती है आपकी दौलत

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि गैर-जरूरी खर्चों की अवसर लागत (Opportunity Cost) को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति पांच साल तक हर महीने ₹25,000 की कार EMI भरता है तो कुल भुगतान करीब ₹15 लाख होता है.

अगर यही ₹25,000 हर महीने पांच साल तक निवेश किए जाएं और फिर अगले 15 साल तक कंपाउंड होने दिए जाएं, तो यह रकम करीब ₹1.2 करोड़ तक पहुंच सकती है.

इमरजेंसी फंड रखना भी जरूरी

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों के पास कम से कम 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड होना चाहिए. यह राशि लिक्विड फंड या फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी जा सकती है. इससे बाजार में गिरावट आने पर लंबी अवधि के निवेश को नुकसान में बेचने की जरूरत नहीं पड़ती और कंपाउंडिंग का फायदा लगातार मिलता रहता है.

क्या है सबसे बड़ा सबक?

हालांकि किसी भी निवेश में 12% सालाना रिटर्न की गारंटी नहीं होती, लेकिन लंबी अवधि में संपत्ति बनाने का मूल मंत्र यही है कि निवेश जल्दी शुरू करें, नियमित निवेश करें, समय-समय पर निवेश की राशि बढ़ाएं और बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेश जारी रखें.

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