1088% तक रिटर्न, ₹33600 करोड़ का डिफेंस बाजार! मजबूत ऑर्डर बुक वाली इन 2 कंपनियों पर रखें नजर

भारत का मशीन टूल बाजार 2034 तक करीब 33600 करोड़ रुपये का हो सकता है. रक्षा और विमान निर्माण बढ़ने से सीएनसी मशीनों की मांग बढ़ने की उम्मीद है. ज्योति सीएनसी और मैकपावर सीएनसी इस कारोबार में अपनी क्षमता और रक्षा क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं. दोनों कंपनियों के ऑर्डर बुक, उत्पादन क्षमता और पहली तिमाही के नतीजे अहम हैं.

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Defence CNC Stocks: भारत में रक्षा और विमान निर्माण का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है. लड़ाकू विमान, मिसाइल, इंजन और दूसरे रक्षा उपकरण बनाने के लिए बेहद सटीक पुर्जों की जरूरत होती है. ऐसे पुर्जों को तैयार करने में सीएनसी मशीनों की अहम भूमिका होती है. इन मशीनों की मदद से एल्युमिनियम, टाइटेनियम, स्टील और दूसरी धातुओं को कंप्यूटर के जरिए बेहद सटीक आकार दिया जाता है.

आईएमटेक्स 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, मशीन टूल के इस्तेमाल के मामले में भारत दुनिया में 7वें और उत्पादन के मामले में 9वें स्थान पर है. भारत का मशीन टूल बाजार 1.8 अरब डॉलर से बढ़कर 2034 तक 3.5 अरब डॉलर यानी करीब 33600 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. रक्षा और विमान निर्माण का काम देश में बढ़ने के साथ सटीक मशीनों की जरूरत भी बढ़ सकती है. इसी कारोबार में ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन और मैकपावर सीएनसी मशीन्स दो ऐसी कंपनियां हैं, जिन पर नजर रखी जा सकती है.

पहला है Jyoti CNC Automation

ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन सीएनसी धातु काटने वाली मशीनें बनाती है. कंपनी की 60 से ज्यादा देशों में 1.40 लाख से अधिक सीएनसी मशीनें लगाई जा चुकी हैं. कंपनी 44 अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी में 200 से ज्यादा तरह की मशीनें बनाती है. इनमें सामान्य मशीनों से लेकर 5-अक्ष और कई-अक्ष वाली अत्याधुनिक मशीनें शामिल हैं.

कंपनी के कारोबार में रक्षा और विमानन क्षेत्र की हिस्सेदारी लगातार अहम बनी हुई है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी की कुल आय में रक्षा और विमानन क्षेत्र की हिस्सेदारी 37% रही. इसके बाद वाहन और वाहन पुर्जे 35%, सामान्य इंजीनियरिंग 17% और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सेवाओं की हिस्सेदारी 6% रही.

₹4,848 करोड़ का ऑर्डर बुक

30 जून 2026 तक ज्योति सीएनसी के पास 4848 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक था. इसमें रक्षा और विमानन क्षेत्र की हिस्सेदारी 38% थी. सामान्य इंजीनियरिंग की हिस्सेदारी 20%, वाहन और वाहन पुर्जों की 19% और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सेवाओं की 13% थी. कंपनी को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 601 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले हैं. पूरे वित्त वर्ष में कंपनी को 2500-3000 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद है.

क्षमता बढ़ाकर 16,000 मशीन करने की तैयारी

ज्योति सीएनसी की मौजूदा सालाना उत्पादन क्षमता 6,000 मशीनों की है. पहली तिमाही में इसका इस्तेमाल 86% क्षमता पर हुआ. कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 5,550 मशीनें बनाई थीं और वित्त वर्ष 2026-27 में 8,000 से ज्यादा मशीनें बनाने का लक्ष्य रखा है. कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता में 10,000 मशीनों की बढ़ोतरी कर रही है. इसके बाद देश में कंपनी की कुल सालाना क्षमता 16,000 मशीनों तक पहुंच जाएगी. नए संयंत्र को अक्टूबर 2026 के अंत तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य है.

कंपनी विमानन क्षेत्र के लिए जीयू 8, टैच्यॉन बीटा और एटीएम 200 जैसी अत्याधुनिक मशीनें बनाती है. भारतीय रक्षा और विमान पुर्जा कंपनियां एयरबस, डसॉल्ट और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स जैसे कार्यक्रमों के लिए अपनी उत्पादन सुविधाओं को बेहतर बनाने में इन मशीनों का इस्तेमाल कर रही हैं.

कंपनी के शेयर का हाल?

Jyoti CNC Automation का शेयर 18 सितंबर को 1050 रुपये के भाव पर बंद हुआ, जिसमें 7.02% की तेजी रही. कंपनी का मार्केट कैप 23873 करोड़ रुपये है और इसका 52 हफ्ते का हाई 1066 रुपये जबकि लो 580 रुपये है. शेयर का P/E Ratio 74.2 है, जबकि बुक वैल्यू 88 रुपये है.

कंपनी के शेयर ने सिर्फ एक हफ्ते में 6 फीसदी का रिटर्न दिया है. 6 महीने में 39 फीसदी वही 5 साल में 183 फीसदी का रिटर्न दिया है.

Macpower CNC Machines

मैकपावर सीएनसी मशीन्स ने भी रक्षा और विमानन क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है. कंपनी ने 35 रक्षा कारखानों को 200 से ज्यादा मशीनें दी हैं, जिनमें डीआरडीओ की सुविधाएं भी शामिल हैं. इसके अलावा 6 विमानन और एयरोस्पेस सुविधाओं को 100 से ज्यादा मशीनों की आपूर्ति की गई है. कंपनी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स को एलसीए तेजस एमके-1ए विमान के लिए और इसरो को चंद्रयान-3 से जुड़े काम के लिए मशीनें दी हैं.

कंपनी की कुल मांग में वाहन क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 20 से 25% है, जबकि रक्षा क्षेत्र से 15 से 20% मांग आती है. विमानन, एयरोस्पेस, पंप और मोटर, बेयरिंग, तेल और गैस तथा इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण भी कंपनी के प्रमुख क्षेत्र हैं.

महंगी मशीनों पर बढ़ा फोकस

मैकपावर की मौजूदा सालाना उत्पादन क्षमता 2,500 मशीनों की है. कंपनी इस क्षमता का पूरा इस्तेमाल करके ₹460-475 करोड़ की सालाना उत्पादन कीमत हासिल करने का लक्ष्य रखती है. कंपनी की नेक्सा कैटेगरी की मशीनें अभी करीब 27% बिक्री में योगदान देती हैं. कंपनी इसे बढ़ाकर 35% करना चाहती है. सामान्य सीएनसी मशीन की कीमत करीब 20 लाख रुपये होती है, जबकि नेक्सा मशीनें 70-80 लाख रुपये की और रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली मशीनें 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की हो सकती हैं. हाल में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स से मिले एक मशीन ऑर्डर की कीमत 1.5 करोड़ रुपये थी.

कंपनी के शेयर का हाल?

Macpower CNC Machines का शेयर 18 सितंबर को 2104 रुपये के भाव पर बंद हुआ, जिसमें 9.52% की तेजी रही. कंपनी का मार्केट कैप 2105 करोड़ रुपये है और इसका 52 हफ्ते का हाई 2149 रुपये जबकि लो 761 रुपये है. शेयर का P/E Ratio 54.1 है, जबकि बुक वैल्यू 175 रुपये है.

कंपनी के शेयर ने सिर्फ एक हफ्ते में 13 फीसदी का रिटर्न दिया है. तीन महीने में 70 फीसदी का, 6 महीने में 146 फीसदी तो वहीं 5 साल में 1,088 फीसदी का रिटर्न दिया है.

₹456 करोड़ का ऑर्डर बुक, ₹1043 करोड़ के प्रस्ताव

30 जून 2026 तक मैकपावर का ऑर्डर बुक 456 करोड़ रुपये था. इसमें ज्यादा मार्जिन वाली नेक्सा मशीनों की हिस्सेदारी 40% थी. कंपनी ने कुल ₹1,042.9 करोड़ के लिए बोली लगाई है, जिसमें रक्षा और विमानन से जुड़े ऑर्डर की राशि 304 करोड़ रुपये है.

मांग को पूरा करने के लिए कंपनी ने सालाना 5,000 मशीनों की क्षमता का लक्ष्य रखा है और इसे अगले 12 महीनों में हासिल करने की योजना है. रक्षा और विमानन क्षेत्र की गुणवत्ता जरूरतों को पूरा करने के लिए कंपनी 1,50,000 से 2,00,000 वर्ग फुट की वातानुकूलित मशीन जोड़ने वाली इकाई भी बना रही है.

पहली तिमाही में मुनाफा 110% बढ़ा

मैकपावर की वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में आय 56.1% बढ़कर ₹95.2 करोड़ हो गई. प्रति मशीन औसत बिक्री मूल्य 20.9-21.9 लाख रुपये रहा. कंपनी का एबिटा 94.8% बढ़कर 15.4 करोड़ रुपये हो गया और एबिटा मार्जिन 322 आधार अंक बढ़कर 16.2% पहुंच गया. कंपनी का नेट प्रॉफिट 110.1% बढ़कर 9.6 करोड़ रुपये रहा. प्रबंधन ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आय में 30% से ज्यादा वृद्धि का अनुमान जताया है.

दोनों कंपनियों के शेयरों में क्या देखना होगा?

भारत में रक्षा और विमान निर्माण बढ़ने के साथ सटीक मशीनों की जरूरत भी बढ़ सकती है. ज्योति सीएनसी की रक्षा और विमानन कारोबार में ज्यादा हिस्सेदारी है, जबकि मैकपावर रक्षा कारखानों, विमानन कंपनियों और महंगी नेक्सा मशीनों के जरिए अपनी पकड़ बढ़ा रही है. 18 सितंबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, ज्योति सीएनसी का 3 साल का औसत पी/ई 74.2 गुना और मैकपावर का 54.1 गुना था. उद्योग का औसत पी/ई 35.6 गुना था. ज्योति सीएनसी का आरओई 18.2% और आरओसीई 21.3% था, जबकि मैकपावर का आरओई 21.3% और आरओसीई 29.1% था.

इसलिए इन कंपनियों को देखते समय सिर्फ रक्षा क्षेत्र की बढ़ती मांग या बड़े ऑर्डर पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होगा. निवेशकों को ऑर्डर मिलने के बाद उसकी समय पर डिलीवरी, मुनाफे का मार्जिन, कंपनी पर कर्ज का बोझ और नई क्षमता से मिलने वाले रिटर्न पर भी नजर रखनी होगी.

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डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.