EV का नया सुपर मटेरियल कार्बन ब्लैक, चीन को भारत दे रहा जोरदार टक्कर; ये 2 कंपनियां मार रहीं हैं बाजी
EV इंडस्ट्री में कार्बन ब्लैक तेजी से सबसे अहम मैटेरियल बनकर उभर रहा है. भारत अब इस सेक्टर में चीन को कड़ी टक्कर दे रहा है और यूरोप का बड़ा सप्लायर बन चुका है. पीसीबीएल केमिकल और हिमाद्री स्पेशलिटी जैसी भारतीय कंपनियां इस तेजी से बढ़ते बाजार का बड़ा फायदा उठा रही हैं.

EV Stocks: इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी ईवी इंडस्ट्री में अब तक लिथियम, कोबाल्ट और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टर्स की सबसे ज्यादा चर्चा होती रही है. हालांकि अब एक ऐसा औद्योगिक मैटेरियल तेजी से वैश्विक बाजार में अहम भूमिका निभा रहा है, जिसने भारत को नई रणनीतिक बढ़त दिला दी है. यह मैटेरियल है कार्बन ब्लैक. ईवी बैटरी, टायर, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और केबल निर्माण में इस्तेमाल होने वाला यह मैटेरियल अब तेजी से बढ़ती मांग के केंद्र में आ गया है. खास बात यह है कि भारत इस क्षेत्र में दुनिया की सबसे मजबूत ताकतों में शामिल हो चुका है और यूरोप के बाजार में चीन को कड़ी चुनौती दे रहा है.
टायर केमिकल से एडवांस्ड मैटेरियल तक का सफर
कार्बन ब्लैक एक महीन काला पाउडर होता है, जिसे पेट्रोलियम आधारित मैटेरियल को नियंत्रित तरीके से जलाकर तैयार किया जाता है. पहले इसका उपयोग मुख्य रूप से टायर निर्माण में होता था, क्योंकि यह टायरों को मजबूती और टिकाऊपन देता है. लेकिन ईवी क्रांति ने इसकी भूमिका को पूरी तरह बदल दिया है.
अब स्पेशलिटी कार्बन ब्लैक का इस्तेमाल लिथियम-आयन बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंडक्टिव प्लास्टिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे हाई-टेक क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है. यही वजह है कि इस इंडस्ट्री को अब केवल कमोडिटी केमिकल कारोबार नहीं, बल्कि एडवांस्ड मैटेरियल बिजनेस के रूप में देखा जाने लगा है.
ईवी बैटरी और टायर में बढ़ रही मांग
ईवी बैटरियों में स्पेशलिटी कार्बन ब्लैक की भूमिका बेहद अहम होती है. यह बैटरी के भीतर बिजली के फ्लो को बेहतर बनाता है और बैटरी की क्षमता मजबूत बनाए रखने में मदद करता है. इसके अलावा इलेक्ट्रिक गाड़ियां सामान्य पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में ज्यादा भारी होती हैं, क्योंकि इनमें बड़े बैटरी पैक लगे होते हैं. साथ ही ईवी वाहनों में तुरंत टॉर्क मिलने के कारण टायरों पर अधिक दबाव पड़ता है. ऐसे में मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले टायरों की जरूरत बढ़ जाती है, जहां कार्बन ब्लैक की मांग तेजी से बढ़ रही है.
चीन को चुनौती देता भारत
रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन में आए बदलाव ने भारत के लिए इस सेक्टर में बड़ा अवसर पैदा किया है. यूरोप ने रूसी औद्योगिक उत्पादों पर प्रतिबंध लगाए, जिसके बाद उसे कार्बन ब्लैक के नए सप्लायर्स तलाशने पड़े. चीन इस क्षेत्र में बड़ा खिलाड़ी जरूर है, लेकिन पर्यावरणीय नियमों और सप्लाई चेन जोखिमों के चलते यूरोपीय कंपनियां अब केवल चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं.
ऐसे में भारत तेजी से भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है. मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार भारत का कार्बन ब्लैक निर्यात 20 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ रहा है, जबकि चीन की बढ़ोतरी दर करीब 4 फीसदी है. केवल तीन वर्षों में भारत यूरोप का सबसे बड़ा कार्बन ब्लैक सप्लायर बन गया.
भारतीय कंपनियों को मिल रहा बड़ा फायदा
इस बढ़ते अवसर का सबसे ज्यादा फायदा दो भारतीय कंपनियां उठा रही हैं. इनमें पीसीबीएल केमिकल और हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल प्रमुख हैं. पीसीबीएल दुनिया की छठी सबसे बड़ी कार्बन ब्लैक उत्पादक कंपनी मानी जाती है और यूरोप में इसकी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है.
वहीं हिमाद्री स्पेशलिटी केमिकल एडवांस्ड बैटरी मैटेरियल और हाई-वैल्यू स्पेशलिटी उत्पादों पर फोकस कर रही है. कंपनी अब एलएफपी यानी लिथियम आयरन फॉस्फेट कैथोड मैटेरियल प्लांट पर भी काम कर रही है, जिसे भविष्य की ईवी और एनर्जी स्टोरेज इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
कैसा है शेयर हाल
PCBL Chemical का शेयर गुरुवार को इंट्रा डे में 0.73 फीसदी गिरकर 287.50 रुपये पर ट्रेड कर रहा है. वहीं पिछले एक सप्ताह में इसके शेयर में 2.04 फीसदी की गिरावट हुई है. वहीं Himadri Speciality का शेयर इंट्रा डे में 0.13 फीसदी बढ़कर 607.20 रुपये पर ट्रेड कर रहा है. पिछले एक सप्ताह में इसके शेयर में 4.09 फीसदी की तेजी आई है.
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