Closing Bell: सेंसेक्स-निफ्टी लगातार चौथे दिन टूटे, निवेशकों के ₹3 लाख करोड़ खाक; तेल की कीमतों ने झकझोरा बाजार
Closing Bell: पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच, गुरुवार 23 जुलाई को शेयर बाजार के बेंचमार्क - सेंसेक्स और निफ्टी50- में लगातार चौथे दिन भी गिरावट जारी रही.
Closing Bell: गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट जारी रही. अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर लगातार 12वीं रात हमले किए जाने के बाद तेल की कीमतें बढ़ने से सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट देखी गई. 23 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 22,900 के नीचे रहा.
सेंसेक्स 364 अंक या 0.47% गिरकर 76,391.39 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 127 अंक या 0.53% की गिरावट के साथ 23,869.60 पर बंद हुआ.
टॉप गेनर्स और लूजर्स
निफ्टी पर सबसे अधिक गिरावट वाले शेयरों में अडानी एंटरप्राइजेज, श्रीराम फाइनेंस, नेस्ले इंडिया, अडानी पोर्ट्स और सिप्ला शामिल थे, जबकि बढ़त वाले शेयरों में बजाज ऑटो, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, एमएंडएम, टीसीएस और आयशर मोटर्स शामिल थे.
सेक्टोरल इंडेक्स
सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस काफी हद तक कमजोर रही और कुछ ही इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए. गिरावट के मामले में, निफ्टी रियल्टी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 1.94% की गिरावट आई. इसके बाद निफ्टी ऑयल एंड गैस, इंफ्रास्ट्रक्चर, पीएसयू बैंक और निफ्टी एनर्जी में 1-1% की गिरावट दर्ज की गई.
अन्य पिछड़ने वाले सेक्टरों में निफ्टी मेटल (-0.79%), निफ्टी फार्मा (-0.52%), निफ्टी एफएमसीजी (-0.50%), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.49%) और निफ्टी आईटी (-0.14%) शामिल थे. निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने अच्छा प्रदर्शन किया और इसमें 0.66% की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी मीडिया में 0.26% की बढ़त दर्ज की गई. निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1-1% की गिरावट आई.
निवेशकों के 3 लाख करोड़ रुपये खाक
एक ही दिन में निवेशकों को 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ, क्योंकि BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सेशन के 480 लाख करोड़ रुपये से घटकर 477 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया.
इन चार सेशन में सेंसेक्स 1,760 अंक या 2.3% गिरा है, जबकि NSE इंडेक्स में 465 अंक या लगभग 2% की गिरावट आई है.
बाजार में गिरावट की क्या वजह रही?
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण घरेलू बाजार में गिरावट देखी गई है. इससे भारत की वित्तीय स्थिति पर दबाव, महंगाई बढ़ने, मॉनेटरी टाइटनिंग (ब्याज दरें बढ़ाने जैसे कदम) और कंपनियों की कमाई के अनुमान घटने जैसी चिंताएं पैदा हो गई हैं.
ब्रेंट क्रूड के सितंबर फ्यूचर्स 4% बढ़कर $99 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहे थे.
गुरुवार को तेल की कीमतों में उछाल आया, जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब की नाकेबंदी के तहत बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया है.
महंगाई का दबाव बढ़ा
सऊदी तेल टैंकरों पर हुए हमले से यह डर पैदा हो गया है कि तेल की सप्लाई में रुकावट जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आगे भी फैल सकती है.
तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई का दबाव बढ़ा दिया है और भारतीय रुपये की कीमत को नीचे गिरा रही हैं. शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को रुपया 4 पैसे गिरकर 96.57 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. इस महीने अब तक घरेलू मुद्रा डॉलर के मुकाबले 2% से अधिक गिर चुकी है.
Latest Stories
4 महीने के निचले स्तर पर क्यों पहुंच गए बंधन बैंक के शेयर, दो दिन में 20 फीसदी की गिरावट; आखिर क्या है वजह?
Cipla के Q1 रिजल्ट ने बिगाड़ा निवेशकों का मूड, मुनाफे में 39% की गिरावट; 3 फीसदी लुढ़का शेयर
AI बूम का फायदा उठा सकते हैं ये 3 स्टॉक, सरकार के ₹100 अरब का दांव बदल सकता है गेम; जानें शेयर का हाल
