महंगे फ्यूल ने रोकी IndiGo की रफ्तार, Q1 में मुनाफे से 238 करोड़ रुपये के घाटे में पहुंची कंपनी
IndiGo की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 237.6 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ. कंपनी का रेवेन्यू करीब 20 फीसदी बढ़ा, लेकिन ATF की कीमतों में 85.7 फीसदी की बढ़ोतरी से मुनाफा घाटे में बदल गया. पश्चिमी एशिया में बढ़े जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण Fuel Cost में भारी उछाल आया है.
InterGlobe Aviation Q1 Results: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बड़ा झटका लगा है. कंपनी एक साल पहले के मुनाफे से निकलकर अब घाटे में पहुंच गई है. इसकी सबसे बड़ी वजह Aircraft Fuel (ATF) की कीमतों में आई भारी बढ़ोतरी रही, जिसने कंपनी की लागत पर बड़ा असर डाला. हालांकि, इस दौरान कंपनी की आय में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन ईंधन खर्च उससे कहीं अधिक तेजी से बढ़ने के कारण कंपनी का मुनाफा पूरी तरह खत्म हो गया.
जून 2026 को समाप्त तिमाही में InterGlobe Aviation को 237.6 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड शुद्ध घाटा हुआ. पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने 2,176.3 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था. यानी एक साल के भीतर कंपनी का प्रदर्शन मुनाफे से घाटे में बदल गया.
20 फीसदी बढ़ा रेवेन्यू, फिर भी घाटा
पहली तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस सालाना आधार पर करीब 19.9 फीसदी बढ़कर 24,584.1 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 20,496.3 करोड़ रुपये था. वहीं कंपनी की टोटल इनकम भी 18.9 फीसदी बढ़कर 25,614.1 करोड़ रुपये हो गई. हालांकि, अदर इनकम में 1.6 फीसदी की मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह 1,030 करोड़ रुपये रही. आय में बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी का खर्च इतनी तेजी से बढ़ा कि उसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ा.
ATF खर्च में 86 फीसदी का उछाल
तिमाही के दौरान कंपनी का कुल खर्च 34.4 फीसदी बढ़कर 25,852.5 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 19,231.9 करोड़ रुपये था. सबसे ज्यादा बढ़ोतरी Aircraft Fuel खर्च में देखने को मिली. यह खर्च 85.7 फीसदी बढ़कर 10,832.9 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले 5,832.6 करोड़ रुपये था.
यानी केवल ईंधन पर कंपनी का खर्च करीब 5,000 करोड़ रुपये बढ़ गया. दिलचस्प बात यह है कि जहां कंपनी की ऑपरेटिंग रेवेन्यू में करीब 4,087.8 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई, वहीं केवल ईंधन खर्च ही उससे अधिक बढ़ गया. यही वजह रही कि कंपनी घाटे में पहुंच गई.
रेवेन्यू का 44 फीसदी हिस्सा केवल Fuel पर खर्च
पहले Aircraft Fuel खर्च कंपनी की ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 28.5 फीसदी था, लेकिन अब यह बढ़कर 44.1 फीसदी हो गया है. यानी कंपनी की कमाई का लगभग हर दूसरा रुपया ईंधन पर खर्च हो रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी एयरलाइन के लिए ईंधन सबसे बड़ा ऑपरेशनल खर्च होता है. ऐसे में ATF की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का सीधा असर एयरलाइंस की लाभ पर पड़ता है.
पश्चिमी एशिया तनाव बना बड़ी वजह
कंपनी ने Aircraft Turbine Fuel (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए वेस्ट एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव को जिम्मेदार ठहराया है. कंपनी के अनुसार, 1 अप्रैल से 8 जून 2026 तक सरकार की ओर से घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों को मार्च 2026 के घोषित स्तर से 25 फीसदी अधिक तक सीमित रखा गया था.
हालांकि, 9 जून से कंपनी ने बाजार भाव के अनुसार ईंधन खर्च को दर्ज करना शुरू कर दिया. कंपनी ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा घोषित प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है और फिलहाल इसमें शामिल होने पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.
दूसरे खर्चों में भी बढ़ोतरी
ईंधन के अलावा कंपनी के अन्य खर्चों में भी इजाफा हुआ. सप्लीमेंट्री रेंटल्स और एयरक्राफ्ट रिपेयर एंड मेंटेनेंस पर होने वाला खर्च 13.9 फीसदी बढ़कर 3,497.5 करोड़ रुपये हो गया. वहीं एम्प्लॉयी बेनिफिट एक्सपेंसेज 11.2 फीसदी बढ़कर 2,279.3 करोड़ रुपये, फाइनेंस कॉस्ट्स 12.1 फीसदी बढ़कर 1,565.3 करोड़ रुपये और डेप्रिसिएशन एंड एमॉर्टाइजेशन खर्च 15.8 फीसदी बढ़कर 2,970.2 करोड़ रुपये पहुंच गया.
PBT भी हुआ निगेटिव
कंपनी का PBT भी मुनाफे से घाटे में बदल गया. पहली तिमाही में PBT 238.4 करोड़ रुपये के घाटे पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने 2,310.7 करोड़ रुपये का PBT दर्ज किया था. वहीं कंपनी का नेट मार्जिन भी 10.6 फीसदी से घटकर निगेटिव 1 फीसदी हो गया.
रेगुलेटरी और Tax मामलों पर भी बनी नजर
InterGlobe Aviation ने बताया कि दिसंबर 2025 में उड़ानों के रद्द होने से जुड़े मामले में CCI की जांच अभी जारी है. कंपनी ने इस मामले में फिलहाल किसी अतिरिक्त प्रावधान को अपने खातों में शामिल नहीं किया है. इसके अलावा कंपनी ने 2,418.5 करोड़ रुपये के संभावित Tax जोखिम का भी खुलासा किया है.
यह मामला विमान और इंजन खरीद पर मिले कुछ प्रोत्साहनों के टैक्सेशन से जुड़ा है. वहीं, मरम्मत के बाद दोबारा आयात किए गए विमान, इंजन और पुर्जों पर विरोध दर्ज कराते हुए चुकाए गए 2,293.2 करोड़ रुपये के Integrated GST (IGST) को कंपनी ने वसूली योग्य राशि के रूप में दिखाया है, क्योंकि इससे जुड़े मामले अभी लंबित हैं.
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