भारत डेवलप कर रहा खुद का हाई स्पीड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम, बुलेट ट्रेन प्लान से सिग्नलिंग तकनीक को मिलेगा बढ़ावा

भविष्य के बुलेट-ट्रेन कॉरिडोर के डिजाइन और रूट प्लान को भी 2027 के मध्य तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है. दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर, जहां अभी भारत की सबसे तेज ट्रेन चलती है, वहां भी ETCS लेवल 2 सिग्नलिंग सिस्टम लगा है, जिसे फ्रांस की कंपनी एल्सटॉम (Alstom) ने लगाया था.

बुलेट ट्रेन

भारतीय रेलवे अपनी खुद की हाई-स्पीड रेल सिग्नलिंग सिस्टम, ‘भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम’ (BTCS) तैयार कर रही है. इसे भारत की स्थितियों के हिसाब से बनाया जाएगा और इससे भारत में बनने वाले लगभग 7,000 किलोमीटर लंबे नए बुलेट-ट्रेन कॉरिडोर के लिए विदेशी टेक्नोलॉजी प्रोटोकॉल पर निर्भरता खत्म हो जाएगी. भविष्य के बुलेट-ट्रेन कॉरिडोर के डिजाइन और रूट प्लान को भी 2027 के मध्य तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है.

किस प्रोजेक्ट पर होगा आधारित?

ET ने सीनियर अधिकारियों के हवाले से बताया कि भारत हाई-स्पीड रेल के लिए अपने खुद के कंट्रोल प्रोटोकॉल विकसित करेगा. उन्होंने कहा कि यह मुंबई-अहमदाबाद प्रोजेक्ट के अनुभव पर आधारित होगा. हाई-स्पीड रेल (MAHSR) कॉरिडोर, जहां यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ETCS) लगाया जा रहा है.

अधिकारी ने कहा, ‘भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम ओपन-सोर्स और किफायती होगा. इसे देश भर में तेजी से और सुरक्षित रूप से लागू करने की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जा सकेगा.’ उन्होंने आगे कहा कि एक बार तैयार हो जाने पर, इसे दूसरे देशों को भी पेश किया जा सकता है.

इक्विपमेंट सप्लायर्स को मिलेगा बढ़ावा

अधिकारी ने कहा, ‘देश के अपने हाई-स्पीड ट्रेन ऑपरेशन प्रोटोकॉल से घरेलू रेलवे डिजाइन और इक्विपमेंट सप्लायर्स को बढ़ावा मिलेगा.’

पिछले साल जून में, नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने MAHSR कॉरिडोर के लिए 4,100 करोड़ रुपये का सिग्नलिंग सिस्टम कॉन्ट्रैक्ट भारत की दिनेशचंद्र आर अग्रवाल इन्फ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड और जर्मनी की सीमेंस के कंसोर्टियम को दिया था.

ये दोनों कंपनियां ETCS लेवल 2-बेस्ड सिस्टम लागू कर रही हैं, जिन्हें 350 किमी प्रति घंटे तक की स्पीड पर ऑपरेशन को सपोर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है.

फ्रांस की कंपनी का सिग्नलिंग सिस्टम

दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर, जहां अभी भारत की सबसे तेज ट्रेन चलती है, वहां भी ETCS लेवल 2 सिग्नलिंग सिस्टम लगा है, जिसे फ्रांस की कंपनी एल्सटॉम (Alstom) ने लगाया था.

सेक्टर पर नजर रखने वालों का कहना है कि जापान के सहयोग से बन रहे MAHSR प्रोजेक्ट के लिए ETCS लेवल 2 सिग्नलिंग को चुनने के भारत के फैसले से इस प्रोजेक्ट के लिए कई तरह के इक्विपमेंट सप्लायर्स के लिए रास्ते खुल गए.

जापान के पूर्व मंत्री का आरोप

इस महीने की शुरुआत में जापान के पूर्व मंत्री हिदेकी माकिहारा ने आरोप लगाया कि भारत MAHSR प्रोजेक्ट के लिए पूरी तरह से जापानी टेक्नोलॉजी पर निर्भर नहीं है. उन्होंने जापान के ‘डिजिटल ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल’ के बजाय ‘ओपन-सोर्स सिग्नलिंग प्रोटोकॉल’ चुनने के फैसले पर सवाल उठाए.

इन चिंताओं का जवाब देते हुए अधिकारियों ने कहा कि जापान की हिताची द्वारा दी जाने वाली ट्रेनें ETCS के साथ काम कर सकती हैं, लेकिन उनकी (जापान की) तरफ से पहले प्रस्ताव आने चाहिए.

अधिकारी ने आगे कहा कि भारत जापानी प्रोटोकॉल अपनाने की अनुमति देने के लिए भी तैयार है, बशर्ते सप्लायर उचित प्रस्ताव पेश करें.

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