न्यूक्लियर एनर्जी में भारत की बड़ी छलांग, थोरियम से मिलेगी एनर्जी सिक्योरिटी; इन 3 स्टॉक्स पर रखें नजर
भारत ने न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में बड़ा कदम उठाते हुए PFBR की सफल क्रिटिकलिटी हासिल की है, जिससे थोरियम आधारित एनर्जी पर फोकस बढ़ गया है. देश के पास दुनिया के लगभग 25 फीसद थोरियम भंडार होने के कारण यह लॉन्ग टर्म एनर्जी सिक्योरिटी के लिए अहम साबित हो सकता है. सरकार का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर क्षमता हासिल करना है, जिससे भारत की ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

Thorium Related Stocks: भारत के न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में एक बड़ी सफलता मिली है, जिसने निवेशकों का ध्यान थोरियम आधारित एनर्जी की ओर खींच लिया है. अप्रैल 2026 की शुरुआत में चेन्नई के पास स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने पहली बार सफलतापूर्वक क्रिटिकलिटी हासिल की. इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की न्यूक्लियर यात्रा का “निर्णायक कदम” बताया. यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के पास दुनिया के लगभग 25 फीसद थोरियम भंडार मौजूद हैं, जबकि यूरेनियम का हिस्सा बेहद कम है. ऐसे में थोरियम आधारित न्यूक्लियर एनर्जी भारत की लॉन्ग टर्म एनर्जी सिक्योरिटी के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है. आइए आपको बताते हैं उन 3 कंपनियों के बारे में, जिन पर आप नजर रख सकते हैं.
BHEL
BHEL भारत की सबसे पुरानी और बड़ी इंजीनियरिंग कंपनियों में से एक है, जो न्यूक्लियर प्रोग्राम में शुरुआत से ही अहम भूमिका निभा रही है. कंपनी ने थोरियम आधारित एडवांस्ड हेवी वाटर रिएक्टर (AHWR) के सेकेंडरी सिस्टम को विकसित किया है. इसके अलावा, कंपनी ने कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट में भी टर्बाइन से जुड़े कार्यों में योगदान दिया है. यह इसे थोरियम स्पेस में एक मजबूत खिलाड़ी बनाता है.
Larsen & Toubro
Larsen & Toubro (L&T) न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग में प्रमुख कंपनी है. इसने भारत के सभी 22 ऑपरेशनल न्यूक्लियर रिएक्टर्स में योगदान दिया है. कंपनी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर और PHWR के लिए जरूरी उपकरण बनाती है. साथ ही, इसने क्लीन कोर थोरियम एनर्जी के साथ मिलकर थोरियम आधारित फ्यूल डेवलपमेंट में भी साझेदारी की है, जो भविष्य में बड़ा अवसर बन सकती है.
NTPC
NTPC देश की सबसे बड़ी पावर कंपनी है, जो अब थोरियम आधारित न्यूक्लियर एनर्जी में भी कदम बढ़ा रही है. कंपनी क्लीन कोर थोरियम एनर्जी के साथ मिलकर ANEEL फ्यूल पर काम कर रही है, जो न्यूक्लियर वेस्ट को 85 फीसद तक कम कर सकता है. NTPC भविष्य में 30 गीगावाट न्यूक्लियर क्षमता विकसित करने की योजना भी बना रही है.
तीन चरणों वाले न्यूक्लियर प्रोग्राम पर फोकस
भारत का तीन-स्टेज न्यूक्लियर प्रोग्राम इस दिशा में अहम भूमिका निभाता है. दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर यूरेनियम और प्लूटोनियम का उपयोग करते हुए यूरेनियम-233 तैयार करते हैं, जिसे तीसरे चरण में थोरियम रिएक्टर में इस्तेमाल किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य 2024 के 8,180 मेगावाट से बढ़ाकर 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर क्षमता हासिल करना है. फिलहाल न्यूक्लियर एनर्जी देश की कुल एनर्जी मिक्स का केवल 3 फीसद ही योगदान देती है.
क्यों महत्वपूर्ण है थोरियम एनर्जी
थोरियम, यूरेनियम के मुकाबले अधिक सुरक्षित और अधिक मात्रा में उपलब्ध है. भारत के पास इसके विशाल भंडार होने से यह देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बना सकता है. इसके अलावा, थोरियम आधारित रिएक्टर कम रेडियोएक्टिव वेस्ट उत्पन्न करते हैं, जिससे यह पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प है.
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