मार्च बना बाजार के लिए मुश्किल महीना, FPI ने 1.17 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे; अमेरिका से सबसे बड़ा झटका

मार्च 2026 में भारतीय शेयर बाजार पर Iran-US वॉर का गहरा असर देखने को मिला, जिससे विदेशी निवेशक (FPI) ने 1.17 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए. इस भारी बिकवाली के कारण FPI पोर्टफोलियो वैल्यू करीब 10 लाख करोड़ रुपये घटकर 62.46 लाख करोड़ रुपये रह गई, जो 24 महीनों का निचला स्तर है. अमेरिका, सिंगापुर और लक्जमबर्ग से निवेश में गिरावट ने बाजार की चिंता बढ़ाई है.

विदेशी निवेशक Image Credit: @Money9live

FPI Selloff March 2026: मार्च 2026 में भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक तनाव का गहरा असर देखने को मिला, खासकर Iran-US वॉर के कारण विदेशी निवेशकों (FPI) का भरोसा कमजोर पड़ा. ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत में विदेशी निवेशकों के पोर्टफोलियो की कुल वैल्यू करीब 10 लाख करोड़ रुपये घटकर 62.46 लाख करोड रुपये रह गई, जो फरवरी के 72 लाख करोड रुपये के मुकाबले लगभग 13 फीसद की गिरावट है. यह गिरावट पिछले 24 महीनों का सबसे निचला स्तर भी है, जो बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को दिखा रहा है.

1.17 लाख करोड़ रुपये की भारी बिकवाली

मार्च के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला. डिपॉजिटरी द्वारा जारी नए आंकड़ों के अनुसार, FPI ने कुल 1.17 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया. इसका सीधा असर प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स पर देखने को मिला, जिसमें 11 फीसद से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट और भी ज्यादा रही, जहां कई स्टॉक्स में 20 फीसद तक की गिरावट देखी गई.

गिरावट की दो बड़ी वजहें

FPI पोर्टफोलियो में इस बड़ी गिरावट के पीछे दो मुख्य कारण रहे हैं. पहला, विदेशी निवेशकों द्वारा भारी बिकवाली और दूसरा, शेयर कीमतों में तेज गिरावट. जब बाजार गिरता है, तो निवेश की कुल वैल्यू अपने आप कम हो जाती है, जिससे AUC (Assets Under Custody) पर सीधा असर पड़ता है. इस दौरान ग्लोबल मार्केट में भी बिकवाली का माहौल बना रहा, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी का आउटफ्लो तेज हुआ.

अमेरिका, सिंगापुर और लक्जमबर्ग में सबसे ज्यादा असर

डेटा के मुताबिक, अमेरिका से आने वाले निवेश में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई. US आधारित फंड्स की होल्डिंग 31.5 लाख करोड़ रुपये से घटकर 27.5 लाख करोड़ रुपये रह गई, यानी करीब 4 लाख करोड रुपये की कमी आई. वहीं, सिंगापुर और लक्जमबर्ग में प्रतिशत के हिसाब से 15 फीसद तक की गिरावट देखी गई, जो बताती है कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है.

सॉवरेन और सेंट्रल बैंक फंड भी प्रभावित

केवल प्राइवेट निवेशक ही नहीं, बल्कि सॉवरेन वेल्थ फंड और विदेशी सेंट्रल बैंक भी इस गिरावट से अछूते नहीं रहे. सॉवरेन फंड्स की वैल्यू 4.9 लाख करोड़ रुपये से घटकर 4.3 लाख करोड़ रुपये रह गई, जबकि विदेशी सेंट्रल बैंकों का निवेश 15 फीसद से ज्यादा गिरकर 1.34 लाख करोड़ रुपये तक आ गया.

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