एक साल में 31% टूटा शेयर, फिर भी नहीं डिगा भरोसा! इस फंड ने IndiaMART में बढ़ाई हिस्सेदारी; जानें क्या है वजह
इंडियामार्ट के शेयर में पिछले एक साल में 31 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है. इसके बावजूद नालंदा इंडिया इक्विटी फंड ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 7.71 फीसदी कर ली है. कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, रिकरिंग रेवेन्यू मॉडल, बैलेंस शीट, नए बिजनेस विस्तार और पेइंग सप्लायर्स की सुस्त ग्रोथ के बीच बड़े निवेशकों का बढ़ता भरोसा बाजार का ध्यान आकर्षित कर रहा है.

IndiaMART Share: शेयर बाजार में अक्सर ऐसी कंपनियां होती हैं, जिनके शेयर कमजोर प्रदर्शन के चलते निवेशकों की नजरों से उतर जाती हैं. लेकिन कई बार यही दौर बड़े वैल्यू निवेशकों के लिए अवसर बन जाता है. ऐसा ही कुछ भारत के दिग्गज निवेशक पुलक प्रसाद ने किया है. उन्होंने हाल ही में इंडियामार्ट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. पुलक प्रसाद द्वारा मैनेज किए जाने वाले नालंदा इंडिया इक्विटी फंड ने 21 जुलाई को कंपनी के 4,23,115 अतिरिक्त शेयर खरीदे. इसके साथ ही फंड की हिस्सेदारी बढ़कर 7.71 फीसदी हो गई. खास बात यह है कि उन्होंने इस कंपनी में निवेश की शुरुआत 2026 की शुरुआत में की थी और अब लगातार हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं.
आखिर इंडियामार्ट को लेकर चिंता क्यों
इंडियामार्ट, भारत का सबसे बड़ा B2B ऑनलाइन मार्केटप्लेस है. यह प्लेटफॉर्म खरीदारों को मैन्युफैक्चरर्स, होलसेलर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स से जोड़ता है. खरीदारों के लिए प्लेटफॉर्म मुफ्त है, जबकि सप्लायर्स बेहतर विजिबिलिटी, ज्यादा बिजनेस लीड और प्रीमियम टूल्स के लिए सालाना सब्सक्रिप्शन फीस चुकाते हैं. यही सब्सक्रिप्शन मॉडल कंपनी की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है, क्योंकि इससे कंपनी को लगातार रिकरिंग रेवेन्यू मिलता है.
हालांकि, पिछले दो वर्षों में निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता कंपनी के पेइंग सप्लायर्स की संख्या रही है. Financial Express की रिपोर्ट के मुताबिक, जून तिमाही के अंत तक कंपनी के पास करीब 2.18 लाख पेइंग सप्लायर्स थे, जो पिछली तिमाही की तुलना में करीब 1,850 कम हैं. खासतौर पर सिल्वर प्लान वाले ग्राहकों में ज्यादा चर्न देखने को मिला है. इसी वजह से बाजार को लगने लगा है कि कंपनी की ग्रोथ अब धीमी पड़ रही है.
लेकिन क्या पूरी तस्वीर यही है
विश्लेषकों का मानना है कि केवल पेइंग सप्लायर की संख्या देखकर कंपनी का वैल्यू करना सही नहीं होगा. इंडियामार्ट के गोल्ड और प्लैटिनम सब्सक्राइबर्स कंपनी के कुल सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू का 75 फीसदी से अधिक हिस्सा देते हैं. ये ग्राहक लंबे समय तक कंपनी के साथ जुड़े रहते हैं और अधिक फीस भी चुकाते हैं. ऐसे में यदि कम मूल्य वाले सिल्वर ग्राहकों की संख्या घटती है, तो इसका असर कंपनी की कमाई पर उतना बड़ा नहीं पड़ता, जितना बाजार मान रहा है.
कंपनी का फोकस अब केवल नए ग्राहक जोड़ने पर नहीं, बल्कि मौजूदा ग्राहकों से अधिक रेवेन्यू हासिल करने पर है. यही वजह है कि वह अलग-अलग कैटेगरी के लिए नई प्राइसिंग स्ट्रैटेजी और प्रीमियम सर्विसेज पर काम कर रही है.
वित्तीय प्रदर्शन अब भी मजबूत
अगर कंपनी के वित्तीय नतीजों पर नजर डालें तो तस्वीर काफी सकारात्मक दिखाई देती है. FY27 की पहली तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 11 फीसदी बढ़कर 414 करोड़ रुपये पहुंच गया. EBITDA 10 फीसदी बढ़कर 146 करोड़ रुपये रहा, जबकि EBITDA मार्जिन 35 फीसदी पर स्थिर रहा. इसी अवधि में नेट प्रॉफिट 12 फीसदी बढ़कर 172 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी ने 163 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग कैश फ्लो भी दर्ज किया.
इतना ही नहीं, कंपनी की बैलेंस शीट भी मजबूत बनी हुई है. कंपनी पर लगभग कोई कर्ज नहीं है और ROE करीब 20.7 फीसदी तथा ROCE लगभग 28 फीसदी है.
नए कारोबार पर भी दांव
इंडियामार्ट केवल अपने मुख्य मार्केटप्लेस बिजनेस तक सीमित नहीं रहना चाहती. उसकी सहयोगी कंपनी Busy Infotech ने जून तिमाही में 47 फीसदी रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है. इसके अलावा कंपनी ने Indiamart Finance Limited की भी स्थापना की है, जिसके जरिए छोटे कारोबारियों को वर्किंग कैपिटल और इनवॉइस फाइनेंसिंग उपलब्ध कराने के लिए लेंडर्स से जोड़ा जाएगा.
कैसा है शेयर का हाल
इंडियामार्ट लिमिटेड के शेयर में पिछले कुछ समय से गिरावट देखने को मिल रही है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 1,759.90 रुपये पर बंद हुआ. पिछले एक सप्ताह में इसमें 7.49 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, बीते एक महीने में यह 10.30 फीसदी लुढ़क चुका है. पिछले एक साल में कंपनी का शेयर 31.27 फीसदी टूट चुका है.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.