सामने आई FPI की असली सच्चाई, IPO में ऐसे किया खेल; OFS में छुपा है असली सच

भारत के तेजी से बढ़ते IPO मार्केट का यूज अब कई विदेशी कंपनियां नया निवेश जुटाने के बजाय अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफा निकालने के लिए कर रही हैं. 2024 के बाद से लिस्टेड अधिकांश विदेशी कंपनियों ने OFS मॉडल अपनाया, जिससे अरबों डॉलर विदेश भेजे गए. इससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ रहा है.

2024 के बाद से लिस्टेड अधिकांश विदेशी कंपनियों ने OFS मॉडल अपनाया. Image Credit: money9live

IPO Market: भारत का IPO मार्केट इस समय दुनिया के सबसे सक्रिय मार्केट में शामिल है. कई विदेशी कंपनियां अपनी भारतीय यूनिट को शेयर मार्केट में लिस्ट करा रही हैं. लेकिन इन लिस्टिंग का मकसद नए कारोबार के लिए पैसा जुटाना कम और पुराना निवेश निकालना ज्यादा दिखाई दे रहा है. हाल के आंकड़े बताते हैं कि विदेशी कंपनियां भारतीय मार्केट से अरबों डॉलर का मुनाफा लेकर अपने हेडक्वाटर में पैसा भेज रही हैं. इससे भारतीय रुपये पर भी दबाव बढ़ रहा है. जानकारों का कहना है कि यह ट्रेंड भारत के लिए चिंता का विषय बन सकता है.

एग्जिट का जरिया बना IPO

2024 के बाद से छह विदेशी कंपनियों ने अपनी भारतीय इकाइयों को शेयर मार्केट में लिस्ट कराया है. इनमें से केवल एक कंपनी ने नए शेयर जारी कर पैसा जुटाया. बाकी सभी ने ऑफर फॉर सेल यानी OFS का रास्ता अपनाया. इस प्रोसेस में पुराने निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं और कंपनी को कोई नया फंड नहीं मिलता. इससे IPO निवेश जुटाने के बजाय एग्जिट का माध्यम बनता जा रहा है.

5 अरब डॉलर निकाल चुकी हैं विदेशी कंपनिया

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी मूल कंपनियों ने OFS बेस्ड IPO के जरिये करीब 5 अरब डॉलर की रकम हासिल की है. इस रकम का 80 फीसदी से अधिक हिस्सा हुंडई मोटर और LG इलेक्ट्रोनिक्स को मिला है. आंकडे़ बताते हैं कि इन IPO में जितना नया पैसा जुटाया गया, उसके मुकाबले कई गुना ज्यादा रकम विदेशी कंपनियों ने बाहर निकाली है. इससे भारत से कैपिटल के बाहर जाने का दबाव बढ़ा है.

आगे भी जारी रहेगा यह ट्रेंड

रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिलसिला अभी रुकने वाला नहीं दिख रहा है. वालमार्ट की भारतीय पेमेंट यूनिट फोनपे का करीब 1 अरब डॉलर का प्रस्तावित IPO भी OFS मॉडल पर बेस्ड बताया जा रहा है. इसके अलावा गेमिंग कंपनी MTG की भारतीय यूनिट का IPO भी इसी रास्ते से आएगा. कोका कोला ने भी संकेत दिया है कि उसकी भारतीय बोटलिंग यूनिट की लिस्टिंग में OFS शामिल होगी. कार्ल्सबर्ग के प्रस्तावित IPO में भी नए फंड जुटाने की संभावना कम बताई जा रही है.

हाई वैल्यूएशन का उठा रही हैं फायदा

मार्केट के जानकारों का मानना है कि भारतीय शेयर मार्केट में हाई वैल्यूएशन के कारण विदेशी कंपनियों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है. इसी वजह से वे नए निवेश के बजाय अपनी हिस्सेदारी बेचकर नकदी हासिल करना पसंद कर रही हैं. भारत में लिस्टिंग से विदेशी कंपनियों को नकदी मिलती है और उनकी मूल कंपनी के मार्केट वैल्यू पर भी पॉजिटिव असर पड़ता है. यही कारण है कि कई ग्लोबल कंपनियां इस रास्ते को चुन रही हैं.

रुपये पर बढ़ रहा है दबाव

विदेशी कंपनियों की यह निकासी ऐसे समय हो रही है जब भारतीय रुपया पहले से दबाव में है. 2024 के बाद से रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 13 फीसदी कमजोर हो चुका है. केवल इस साल ही इसमें करीब 6 फीसदी की गिरावट आई है. जानकारों का मानना है कि IPO के जरिये विदेश भेजी जा रही रकम भी रुपये की कमजोरी को बढ़ाने वाले कारणों में शामिल है.

FPI निकासी ने बढ़ाई चिंता

इस साल अब तक FPI भारतीय मार्केट से 23 अरब डॉलर से अधिक की निकासी कर चुके हैं. यह 2025 के रिकॉर्ड आउटफ्लो से भी ज्यादा है. MUFG बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि भारत के मजबूत IPO मार्केट ने भी रुपये की कमजोरी में योगदान दिया है. लगातार बढ़ रही विदेशी निकासी से अर्थव्यवस्था और मार्केट पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

ऑफर फॉर सेल क्या है

OFS यानी ऑफर फॉर सेल आईपीओ का वह तरीका है, जिसमें कंपनी कोई नया शेयर जारी नहीं करती बल्कि प्रमोटर, फाउंडर, प्राइवेट इक्विटी फंड या शुरुआती निवेशक अपनी मौजूदा हिस्सेदारी आम निवेशकों को बेचते हैं. इस प्रक्रिया में शेयरों की बिक्री से मिलने वाला पूरा पैसा शेयर बेचने वाले निवेशकों के पास जाता है, जबकि कंपनी को कोई नई कैपिटल नहीं मिलती. चूंकि नए शेयर जारी नहीं होते, इसलिए कुल शेयरों की संख्या और प्रति शेयर आय पर कोई असर नहीं पड़ता. यही कारण है कि OFS को निवेशकों और प्रमोटरों के लिए मुनाफा वसूलने तथा कंपनी से बाहर निकलने का आसान एग्जिट रूट माना जाता है.