डिफेंस से EV तक, क्या आपके पोर्टफोलियो में हैं ये 5 स्टॉक; अगले 5 साल में दे सकते हैं बड़ा रिटर्न

अगले 5 साल में मल्टीबैगर बनने की क्षमता रखने वाले 5 शेयर अलग-अलग सेक्टर से चुने गए हैं. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज, हिमाद्री स्पेशियलिटी केमिकल्स और सोना बीएलडब्ल्यू प्रिसिजन फोर्जिंग्स को मजबूत कारोबारी संभावनाओं के आधार पर लिस्ट में शामिल किया गया है.

अगले 5 साल में मल्टीबैगर बनने की क्षमता रखने वाले 5 शेयर अलग-अलग सेक्टर से चुने गए हैं. Image Credit: money9live

शेयर बाजार में मल्टीबैगर शेयर की तलाश हर निवेशक करता है. ऐसी कंपनियों की पहचान सिर्फ पुराने रिटर्न के आधार पर नहीं की जा सकती. इसके लिए कारोबार की लंबी अवधि की संभावनाओं, मुनाफे की बढ़ोतरी, कर्ज, ऑर्डर बुक और वैल्यूएशन को समझना जरूरी है. एक हालिया स्क्रीनिंग में पांच कंपनियों को अगले 3 से 5 साल की संभावित ग्रोथ थीम से जोड़ा गया है. इनमें डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्पेशलिटी केमिकल्स और ईवी जैसे सेक्टर शामिल हैं. हालांकि, कई शेयर पहले ही हाई वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहे हैं.

Bharat Electronics

पहला नाम Bharat Electronics का है. कंपनी डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स के सेक्टर में रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और कम्युनिकेशन सिस्टम जैसे प्रोडक्ट बनाती है. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की इनकम करीब 27610 करोड़ रुपये रही, जो सालाना आधार पर 16.2 फीसदी बढ़ी. इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट करीब 6024 करोड़ रुपये रहा. कंपनी का ऑर्डर बुक भी करीब 73800 करोड़ रुपये का था. इससे आने वाले वर्षों में कारोबार की अच्छी संभावनाएं दिखाई देती हैं.

कंपनी को डिफेंस इंडिजेनाइजेशन और घरेलू रक्षा प्रोडक्शन बढ़ने का फायदा मिल सकता है. वित्त वर्ष 2026 में Bharat Electronics ने करीब 30000 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर हासिल किए. कंपनी की मजबूत ऑर्डर बुक भविष्य की इनकम को सहारा दे सकती है. हालांकि शेयर का वैल्यूएशन पहले ही काफी हाई है. ऐसे में ऑर्डर की समय पर डिलीवरी, मार्जिन और कैपिटल के सही इस्तेमाल पर नजर रखना जरूरी होगा.

Dixon Technologies

दूसरा नाम Dixon Technologies का है. कंपनी अपने ब्रांड के बजाय दूसरे बड़े ब्रांड के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट की मैन्युफैक्चरिंग करती है. भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियां कंपनी के लिए लंबी अवधि में बड़ा अवसर पैदा कर सकती हैं. चीन प्लस वन रणनीति का फायदा भी भारतीय कंपनियों को मिल सकता है.

पिछले पांच साल में कंपनी के रेवेन्यू में करीब 35.5 फीसदी और नेट प्रॉफिट में करीब 53.9 फीसदी की सालाना कंपाउंड से बढ़ोतरी हुई है. कंपनी मोबाइल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश कर रही है. हालांकि इस सेक्टर में कंपटीशन काफी ज्यादा है. कम मार्जिन और बढ़ती कंपटीशन भविष्य में कंपनी की कमाई पर दबाव डाल सकती है.

Pidilite Industries

तीसरे नंबर पर Pidilite Industries है. कंपनी एडहेसिव, सीलेंट और कंस्ट्रक्शन केमिकल्स के कारोबार में है. Fevicol, Dr Fixit और M Seal जैसे मजबूत ब्रांड कंपनी को अपने सेक्टर में अलग पहचान देते हैं. भारत में असंगठित बाजार से ब्रांडेड उत्पादों की ओर बढ़ता रुझान कंपनी के लिए लंबी अवधि का अवसर बन सकता है.

पिछले पांच साल में कंपनी के रेवेन्यू में करीब 8 फीसदी की सालाना ग्रोथ हुई है. वहीं शुद्ध मुनाफा करीब 15.4 फीसदी की सालाना दर से बढ़ा है. कंपनी टाइल एडहेसिव, वॉटरप्रूफिंग और कंस्ट्रक्शन केमिकल्स जैसे सेक्टरों में अपनी क्षमता बढ़ा रही है. हालांकि इसका पीई करीब 62.5 है. यानी बाजार पहले ही कंपनी से मजबूत भविष्य की उम्मीद लगा रहा है. कच्चे माल की कीमतों में तेजी भी मार्जिन के लिए रिस्क बन सकती है.

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Himadri Speciality Chemicals

चौथा नाम Himadri Speciality Chemicals का है. कंपनी ट्रेडिशनल कार्बन उत्पादों के साथ अब बैटरी मटेरियल के सेक्टर में विस्तार कर रही है. इसका फोकस लिथियम आयन बैटरी के एनोड और लिथियम आयरन फॉस्फेट यानी एलएफपी कैथोड मटेरियल पर है. इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा भंडारण के बढ़ते इस्तेमाल से बैटरी मटेरियल की मांग में लंबी अवधि में तेजी आ सकती है.

कंपनी बैटरी मटेरियल के लिए करीब 2800 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बना रही है. मैनेजमेंट ने अगले छह साल में बैटरी केमिकल्स से 30000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है. हालांकि यह कंपनी के लिए नई ग्रोथ स्टोरी है और इसका बड़ा हिस्सा भविष्य के अमल पर निर्भर करेगा. चीनी कंपनियों से कंपटीशन और नए प्लांट को समय पर शुरू करना प्रमुख रिस्क हैं.

Sona BLW Precision Forgings

पांचवें नंबर पर Sona BLW Precision Forgings है. कंपनी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए डिफरेंशियल गियर, ट्रैक्शन मोटर और ई ड्राइव सिस्टम जैसे कंपोनेंट बनाती है. वित्त वर्ष 2026 के अंत में कंपनी का ऑर्डर बुक करीब 23700 करोड़ रुपये था. इसमें करीब 70 फीसदी हिस्सा इलेक्ट्रिक वाहन से जुड़ा था. इससे कंपनी को ईवी बाजार के बढ़ने का फायदा मिल सकता है.

कंपनी भारत के अलावा अमेरिका, यूरोप, चीन और मैक्सिको जैसे बाजारों में भी काम करती है. इसके अलावा रोबोटिक्स और फिजिकल एआई जैसे नए कारोबार में भी कंपनी कदम बढ़ा रही है. पिछले पांच साल में रेवेन्यू करीब 16 फीसदी की सालाना दर से बढ़ा है. हालांकि इसका पीई करीब 73.9 है. ऐसे में बाजार की भविष्य की उम्मीदें पहले से शेयर की कीमत में शामिल हो सकती हैं.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.