जापान का पैसा और टेक्नोलॉजी, भारत का बाजार और मैन्युफैक्चरिंग ताकत, बढ़ती नजदीकियां क्या दे रही संकेत?
भारत और जापान के बीच हाल के दिनों में तेज हुई गतिविधियां दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने का संकेत दे रही हैं. दोनों देश व्यापार, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, AI, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स और रक्षा सहयोग पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
Highlights
- भारत और जापान के बीच हाल के दिनों में तेज हुई गतिविधियां दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने का संकेत दे रही हैं
- जापान ने अगले 10 साल में भारत में 10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य भी रखा है.
- दोनों देश व्यापार, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, AI, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स और रक्षा सहयोग पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
भारत और जापान के बीच पिछले कुछ हफ्तों में तेजी से बढ़ी मुलाकातें और बातचीत सिर्फ सामान्य कूटनीतिक गतिविधियां नहीं हैं. दोनों देश अब अपनी पुरानी रणनीतिक साझेदारी को निवेश, कारोबार और टेक्नोलॉजी के स्तर पर और मजबूत करना चाहते हैं. हाल के दिनों में भारत और जापान के बीच व्यापार, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, सेमीकंडक्टर और रक्षा जैसे क्षेत्रों पर लगातार बातचीत हुई है.
इस बढ़ती गतिविधि का संकेत साफ है कि दोनों देश जापान की कैपिटल और टेक्नोलॉजी को भारत के बड़े बाजार, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और रणनीतिक ताकत के साथ जोड़ना चाहते हैं.
जुलाई में प्रधानमंत्री की भारत यात्रा से बढ़ी रफ्तार
भारत-जापान के बीच नई तेजी की शुरुआत जुलाई में हुई, जब जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची अपनी पहली भारत यात्रा पर 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल हुईं. दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा, AI, क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. जापान ने अगले 10 साल में भारत में 10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य भी रखा है.
अब बातों से आगे बढ़कर जमीन पर काम शुरू
अगस्त में दोनों देशों के बीच बनी योजनाओं को जमीन पर उतारने की कोशिश तेज हुई. उत्तर प्रदेश में आयोजित UP-Japan Investment Meet में 200 से ज्यादा जापानी कारोबारी, CEO और नीति निर्माता शामिल हुए. उत्तर प्रदेश जापान से मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है. यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में जापान से जुड़े दो प्रोजेक्ट भी शुरू किए गए हैं.
जापान पहुंचे 200 से ज्यादा भारतीय कारोबारी
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 27 अगस्त तक जापान दौरे पर हैं. उनके साथ भारत का अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल जापान पहुंचा है. इसमें 200 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हैं, जो टोक्यो, नागोया और ओसाका में बैठकों और बातचीत में हिस्सा लेंगे.
इन बैठकों में व्यापार, निवेश, सेमीकंडक्टर, AI, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और नई पीढ़ी के दूसरे उद्योगों पर खास फोकस रहेगा.
व्यापार बढ़ा, लेकिन भारत के लिए चिंता भी
भारत और जापान के बीच FY2025-26 में कुल द्विपक्षीय व्यापार 27.47 अरब डॉलर तक पहुंच गया. हालांकि, इस व्यापार में जापान का पलड़ा भारी रहा. जापान ने भारत को 21.43 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि भारत का जापान को निर्यात सिर्फ 6.04 अरब डॉलर रहा यानी दोनों देशों के बीच व्यापार में बड़ा अंतर है.
भारत अब जापान के साथ ज्यादा संतुलित व्यापार संबंध चाहता है. भारत की कोशिश है कि उसके उत्पादों को जापानी बाजार में ज्यादा पहुंच मिले.
CEPA समझौते की समीक्षा क्यों है अहम?
भारत और जापान के बीच Comprehensive Economic Partnership Agreement यानी CEPA की समीक्षा काफी अहम मानी जा रही है. इसका मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश की रुकावटों को कम करना और भारतीय कंपनियों के लिए जापानी बाजार में ज्यादा अवसर पैदा करना है.
भारत की कोशिश है कि व्यापार सिर्फ जापानी सामान और कंपनियों के भारत आने तक सीमित न रहे, बल्कि भारतीय कंपनियों और उत्पादों को भी जापान में ज्यादा जगह मिले.
रक्षा और सप्लाई चेन भी बड़ा मुद्दा
भारत और जापान की साझेदारी सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं है. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी बढ़ रहा है. समुद्री सुरक्षा और नौसेना के लिए जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में संयुक्त विकास की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
इसके अलावा दोनों देश ऐसी मजबूत सप्लाई चेन बनाना चाहते हैं, जो किसी एक देश पर ज्यादा निर्भर न हो. क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर और दूसरी महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी में सहयोग इसी रणनीति का हिस्सा है.
क्या बन रहा है भारत-जापान का नया समीकरण?
भारत और जापान के बीच हाल की गतिविधियों को एक साथ देखें तो साफ है कि दोनों देश सिर्फ पुराने रणनीतिक रिश्ते को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं. जापान भारत में अपनी पूंजी और टेक्नोलॉजी के जरिए नए अवसर देख रहा है. वहीं, भारत अपने विशाल बाजार, बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति का फायदा उठाना चाहता है.
यानी दोनों देश एक ऐसी साझेदारी बनाने की कोशिश में हैं, जिसमें जापान की पूंजी और टेक्नोलॉजी, भारत का बाजार और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और दोनों की रणनीतिक जरूरतें एक साथ जुड़ें.ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि 10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य, CEPA की समीक्षा और सेमीकंडक्टर से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक बनी योजनाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरती हैं.
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