IT इंडेक्स में उछाल के पीछे ये 3 फैक्टर्स, 70-70 फीसदी उछले शेयर; AI के दबदबे के बीच आखिर कैसे पलटा गेम?

चीन में एडवांस्ड चिप बनाने की दिशा में हो रही प्रगति के संकेतों के बीच सेमीकंडक्टर शेयरों में बिकवाली तेज हो गई. Nifty IT इंडेक्स 1 जुलाई, 2026 को 25,699 के 52 वीक के निचले स्तर पर आ गया था, लेकिन बाद में उस स्तर से 21 फीसदी से अधिक की रिकवरी की.

आईटी कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी. Image Credit: Getty image

पिछले 18 वर्षों में पहली छमाही में सबसे खराब प्रदर्शन के बाद, जुलाई में निफ्टी IT इंडेक्स ने जबरदस्त वापसी की. यह इंडेक्स लगभग 19 फीसदी बढ़ा और इसने पिछले छह साल में अपनी सबसे बड़ी मंथली बढ़त दर्ज की, क्योंकि निवेशकों ने भीड़-भाड़ वाले AI ट्रेड से हटकर अपेक्षाकृत सस्ते टेक्नोलॉजी शेयरों का रुख किया.

चीन में एडवांस्ड चिप बनाने की दिशा में हो रही प्रगति के संकेतों के बीच सेमीकंडक्टर शेयरों में बिकवाली तेज हो गई. इससे AI पर होने वाले खर्च में तेजी के बने रहने को लेकर चिंताएं बढ़ गईं और ग्लोबल इन्वेस्टर्स सॉफ्टवेयर और IT सर्विस कंपनियों की ओर मुड़ने लगे.

IT इंडेक्स में 21 फीसदी की रिकवरी

Nifty IT इंडेक्स 1 जुलाई, 2026 को 25,699 के 52 वीक के निचले स्तर पर आ गया था, लेकिन बाद में उस स्तर से 21 फीसदी से अधिक की रिकवरी की. 2026 की पहली छमाही में इंडेक्स में लगभग 31 फीसदी की गिरावट के बाद पूरे सेक्टर में रिकवरी देखी गई.

70-70 फीसदी चढ़े शेयर

मिडकैप IT शेयरों में, Oracle Financial Services अपने 52-वीक के निचले स्तर से 78 फीसदी चढ़ा, जबकि Subex और Ramco Systems में 75-75 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. Coforge में 71 फीसदी, CE Info Systems और Sonata Software में 50-50 फीसदी और Tata Technologies और Mastek में 45-45 फीसदी की तेजी आई.

Hexaware Technologies और Newgen Software Technologies अपने 52 वीक के निचले स्तर से 40-40 फीसदी चढ़े, जबकि Persistent Systems, Sagility और Vakrangee में लगभग 30-30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

लार्ज-कैप IT शेयरों में जोरदार उछाल

लार्ज-कैप IT शेयरों में भी तेजी देखी गई. HCLTech में 31 फीसदी, Tech Mahindra में 28 फीसदी, TCS में 23 फीसदी, Infosys में 16 फीसदी और Wipro में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

आकर्षक वैल्यूएशन

आकर्षक वैल्यूएशन ने भी रिकवरी में मदद की. जुलाई में निचले स्तर पर, यह सेक्टर अपनी कमाई के लगभग 18 गुना पर ट्रेड कर रहा था, जो इसके पांच साल के मीडियन वैल्यूएशन (कमाई का लगभग 27 गुना) से काफी कम था. इससे इन्वेस्टर्स का भरोसा बढ़ा और वे वापस लौटने लगे, क्योंकि तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे.

आईटी शेयरों में क्यों आई तेजी?

ग्लोबल इन्वेस्टर्स के सेमीकंडक्टर शेयरों से निकलने के कारण तेजी और बढ़ गई. दक्षिण कोरिया के Kospi और जापान के Nikkei में गिरावट के साथ, फंड्स ने चिप-हेवी पोजीशन कम की और सॉफ्टवेयर और IT सर्विस कंपनियों में अपना निवेश बढ़ाया.

जुलाई में Accenture और Cognizant में लगभग 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. इन्वेस्टर्स भारतीय IT कंपनियों को AI के कारण होने वाले नुकसान के शिकार के बजाय AI अपनाने से फायदा उठाने वाली कंपनियों के तौर पर देखने लगे. साथ ही, Jefferies द्वारा इस सेक्टर की रेटिंग को ‘अंडरवेट’ से बढ़ाकर ‘न्यूट्रल’ करने से भी तेजी को और बढ़ावा मिला.

कमाई के सीजन ने बेहतर किया सेंटीमेंट

कमाई के सीजन ने बेहतर होते सेंटीमेंट को और मजबूत किया. TCS ने कहा कि उसका AI बिजनेस सालाना लगभग $2.6 अरब के रन रेट पर पहुंच गया है, जबकि Infosys ने बताया कि AI से जुड़े काम से उसकी कुल कमाई का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा आता है. हालांकि, कुछ कंपनियों ने पूरे साल के लिए अपने अनुमानों में कटौती की, लेकिन नई डील्स मिलने का सिलसिला अच्छा बना रहा, जिससे डिमांड को लेकर चिंताएं कम हुईं.

तेजी के पीछे 3 फैक्टर्स

मार्केट एक्सपर्ट्स ने इस तेजी के पीछे तीन मुख्य वजहें बताईं. पहली वजह, US में उम्मीद से कमजोर जॉब्स डेटा और पहले के पेरोल नंबरों में कटौती के बाद मैक्रो माहौल में सुधार हुआ. इससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें टल गईं, जिससे उभरते बाजारों में निवेश और US में क्लाइंट्स के खर्च, दोनों को ही बढ़ावा मिला. दूसरी वजह, जेफरीज (Jefferies) द्वारा इंडियन IT सेक्टर की रेटिंग को ‘अंडरवेट’ से बढ़ाकर ‘न्यूट्रल’ करने और Infosys को अपने इंडिया मॉडल पोर्टफोलियो में शामिल करने के बाद सेंटीमेंट में सुधार हुआ.

एशियाई सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में भारी गिरावट के बाद इन्वेस्टर्स ने इंडियन IT सर्विसेज की ओर भी रुख किया, क्योंकि वे इस सेक्टर को टेक्नोलॉजी के लिहाज से अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश मानते हैं. तीसरी वजह, Q1 FY27 की कमाई उम्मीद से बेहतर रही. मजबूत मार्जिन, करेंसी से होने वाले फायदे और कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन ने ग्लोबल डिमांड में सुस्ती के बावजूद मुनाफे को बनाए रखने में मदद की.

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