$56 अरब की बिकवाली के बाद शेयर बाजार में प्रमोटर्स की घर वापसी, Adani, Jindal समेत इन स्टॉक्स में लग रहा स्मार्ट मनी
दो साल तक 56 अरब डॉलर की भारी बिकवाली के बाद अब भारतीय शेयर बाजार में प्रमोटर्स की वापसी दिख रही है. 2026 में अब तक 4 अरब डॉलर से ज्यादा की खरीदारी हो चुकी है, जिससे साफ है कि गिरते वैल्युएशन पर बड़े बिजनेस घराने फिर से अपनी कंपनियों में दांव लगा रहे हैं.

भारतीय शेयर बाजार में पिछले दो सालों से जारी प्रमोटर्स की बिकवाली पर अब ब्रेक लग गया है. साल 2024 और 2025 में करीब 56 अरब डॉलर (4.7 लाख करोड़ रुपये) के शेयर बेचने के बाद, 2026 में देश के बड़े बिजनेस घरानों ने अपनी ही कंपनियों में दांव लगाना शुरू कर दिया है. बाजार में आई हालिया गिरावट और वैल्युएशन के वाजिब स्तर पर आने के बाद, प्रमोटर्स ने अब तक 4 अरब डॉलर से अधिक की शेयर खरीदारी कर ली है.
जेफरीज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव भारतीय बाजार के प्रति प्रमोटर्स के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है.
अडानी और GMR ने संभाली कमान
प्रमोटर्स की इस ‘बायिंग स्प्री’ में अडानी ग्रुप सबसे आगे है. अडानी एंटरप्राइजेज ने राइट्स इश्यू के जरिए करीब 2 अरब डॉलर जुटाए हैं, जिसमें प्रमोटर्स ने अपनी हिस्सेदारी के अनुपात में पूरा निवेश किया है. वहीं, GMR एयरपोर्ट्स के घरेलू प्रमोटर्स ने विदेशी साझेदारों से 7.3% हिस्सेदारी खरीदने के लिए 1 अरब डॉलर झोंक दिए हैं.
इसके अलावा, JSW एनर्जी के प्रमोटर्स ने प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए 317 मिलियन डॉलर का निवेश कर अपनी हिस्सेदारी 1% बढ़ाई है.
रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर में भारी खरीदारी
कीमतों में गिरावट का फायदा उठाते हुए रियल एस्टेट सेक्टर के प्रमोटर्स ने सबसे आक्रामक रुख अपनाया है:
- गोदरेज प्रॉपर्टीज: प्रमोटर्स ने ओपन मार्केट से 258 मिलियन डॉलर के शेयर खरीदे और अपनी हिस्सेदारी में 4.5% का बड़ा इजाफा किया.
- लोढ़ा (Macrotech): यहां भी प्रमोटर्स ने करीब 44 मिलियन डॉलर का निवेश किया है.
- मारुति सुजुकी: ऑटो दिग्गज के प्रमोटर्स ने भी 123 मिलियन डॉलर के शेयर खरीदे. हालांकि, कंपनी का मार्केट कैप (43.7 अरब डॉलर) बहुत बड़ा होने के कारण हिस्सेदारी में सिर्फ 0.2% की बढ़ोतरी दिखी.
बिड़ला और अन्य बड़े नाम भी पीछे नहीं
आदित्य बिड़ला ग्रुप ने ग्रासिम इंडस्ट्रीज में 108 मिलियन डॉलर का निवेश कर अपनी हिस्सेदारी 0.5% बढ़ाई है. अन्य कंपनियों में भी खरीदारी का यही ट्रेंड दिखा:
- अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस: प्रमोटर्स ने 197 मिलियन डॉलर के शेयर खरीदे (1.5% हिस्सेदारी बढ़ी).
- जिंदल स्टेनलेस: 58 मिलियन डॉलर का निवेश.
- इंडस टावर्स: 29 मिलियन डॉलर की खरीदारी.
क्यों बदला प्रमोटर्स का मन?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण ‘वैल्युएशन’ है. 2024-25 में जब बाजार अपने शिखर पर था, तब पीई (P/E) रेशियो 22x के करीब था, जो ऐतिहासिक औसत से काफी ज्यादा था. प्रमोटर्स ने उस समय ऊंची कीमतों पर मुनाफावसूली की.
अब 2026 में बाजार में सुधार (Correction) के बाद वैल्युएशन अपने 10 साल के औसत (20.2x) के करीब आ गया है. जेफरीज के अनुसार, प्रमोटर्स का यह निवेश मुख्य रूप से पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रॉपर्टी जैसे एसेट-हैवी सेक्टर्स में है, जो भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए बेहद अहम हैं.
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विदेशी प्रमोटर्स का एग्जिट और घरेलू वापसी
बीते दो सालों में हुई 56 अरब डॉलर की कुल बिकवाली में से करीब 18 अरब डॉलर का हिस्सा हुंडई, BAT, एलजी और व्हर्लपूल जैसे विदेशी प्रमोटर्स का था, जिन्होंने बाजार की तेजी का फायदा उठाकर अपनी हिस्सेदारी घटाई. इसके चलते BSE-500 कंपनियों में प्रमोटर होल्डिंग दिसंबर 2025 तक गिरकर 48.4% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई थी, जो अब प्रमोटर्स की खरीदारी से फिर सुधरने लगी है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.