सेबी का बड़ा फैसला! अब शेयर बाजार में ऑक्शन के जरिए तय होगा क्लोजिंग प्राइस, 3 अगस्त से लागू होंगे नए नियम
शेयर बाजार में दिन के आखिरी दाम को लेकर अब एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. नियामक के नए कदम से ट्रेडिंग के अंतिम पलों की तस्वीर पहले से अलग हो सकती है. यह बदलाव किन निवेशकों के लिए अहम होगा और बाजार की चाल पर क्या असर डालेगा, इसे समझना जरूरी है.
SEBI closing auction session: शेयर बाजार में क्लोजिंग प्राइस को लेकर लंबे समय से उठते सवालों के बीच बाजार नियामक ने बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. निवेशकों और फंड्स के लिए दिन के आखिरी दाम को ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में सेबी अब नई व्यवस्था ला रहा है. इससे न सिर्फ कैश मार्केट में कीमत तय करने का तरीका बदलेगा, बल्कि डेरिवेटिव्स और इंडेक्स की सेटलमेंट प्रक्रिया पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा.
क्लोजिंग प्राइस तय करने का तरीका बदलेगा
Securities and Exchange Board of India ने एक सर्कुलर जारी कर बताया है कि इक्विटी कैश सेगमेंट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS शुरू करने का फैसला किया गया है. अभी तक शेयरों का क्लोजिंग प्राइस आखिरी 30 मिनट में हुए सौदों के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस यानी VWAP के आधार पर तय होता था. नई व्यवस्था में क्लोजिंग प्राइस एक ऑक्शन मैकेनिज्म के जरिए तय किया जाएगा, जिसमें बाजार की कुल मांग और आपूर्ति एक साथ सामने आएगी.
सेबी ने साफ किया है कि CAS को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. शुरुआती चरण में यह सिर्फ उन शेयरों पर लागू होगा, जिनमें डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स उपलब्ध हैं. बाकी शेयरों के लिए फिलहाल पुरानी VWAP आधारित व्यवस्था ही जारी रहेगी. सेबी का मानना है कि इससे बड़े ऑर्डर की बेहतर एग्जीक्यूशन, डेरिवेटिव्स की निष्पक्ष सेटलमेंट और पैसिव फंड्स के लिए क्लोजिंग प्राइस पर लेनदेन आसान होगा.
CAS का समय और ढांचा
नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन हर ट्रेडिंग डे पर 3:15 बजे से 3:35 बजे तक चलेगा. यह सेशन लगातार ट्रेडिंग खत्म होने के बाद एक अलग सेशन के रूप में होगा. इसमें पहले कंटीन्युअस ट्रेडिंग से ट्रांजिशन होगा, फिर मार्केट और लिमिट ऑर्डर डाले जा सकेंगे. इसके बाद सिर्फ लिमिट ऑर्डर का एक फेज होगा, जिसमें आखिरी दो मिनट में रैंडम क्लोजर रहेगा और अंत में ऑर्डर मैचिंग होगी.
CAS के लिए रेफरेंस प्राइस 3:00 बजे से 3:15 बजे के बीच हुए सौदों के VWAP के आधार पर तय होगा. अगर इस दौरान कोई ट्रेड नहीं होता है, तो दिन का आखिरी ट्रेडेड प्राइस लिया जाएगा. उस भी स्थिति में ट्रेड न होने पर पिछले दिन का क्लोजिंग प्राइस रेफरेंस बनेगा. CAS के दौरान रेफरेंस प्राइस के ऊपर और नीचे 3 प्रतिशत का प्राइस बैंड लागू रहेगा.
डेरिवेटिव्स और प्री-ओपन सेशन में भी बदलाव
CAS में सिर्फ मार्केट और लिमिट ऑर्डर की इजाजत होगी. स्टॉप-लॉस और आइसबर्ग ऑर्डर यहां स्वीकार नहीं किए जाएंगे. सभी योग्य ऑर्डर्स के आधार पर इक्विलिब्रियम प्राइस तय होगा, यानी वह दाम जिस पर सबसे ज्यादा वॉल्यूम का सौदा हो सके.
यह भी पढ़ें: जब कॉपर चमका तो दौड़ी ये माइक्रोकैप कंपनी, एक साल में 100% मुनाफा, स्टॉक ने दिया 138% रिटर्न, क्या ग्रोथ बाकी है?
क्लोजिंग प्राइस का तरीका बदलने के साथ सेबी ने डेरिवेटिव्स की सेटलमेंट व्यवस्था में भी संशोधन किया है. अब स्टॉक और इंडेक्स डेरिवेटिव्स की सेटलमेंट कीमत CAS के जरिए तय क्लोजिंग प्राइस पर आधारित होगी. इसके अलावा प्री-ओपन ऑक्शन सेशन को भी CAS के अनुरूप किया गया है, जो 15 मिनट का रहेगा और ज्यादा पारदर्शिता देगा.
कब से लागू होगा नया नियम
सेबी के मुताबिक CAS फ्रेमवर्क 3 अगस्त 2026 से लागू होगा, जबकि संशोधित प्री-ओपन ऑक्शन सिस्टम 7 सितंबर 2026 से प्रभावी होगा. बाजार के लिए यह बदलाव क्लोजिंग प्राइस की विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.