जब कॉपर चमका तो दौड़ी ये माइक्रोकैप कंपनी, एक साल में 100% मुनाफा, स्टॉक ने दिया 138% रिटर्न, क्या ग्रोथ बाकी है?
कॉपर की कीमतों में आई तेजी ने एक माइक्रोकैप कंपनी को चर्चा में ला दिया है. मुनाफे और शेयर परफॉर्मेंस में आए बड़े बदलाव ने निवेशकों का ध्यान खींचा है. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह तेजी आगे भी बनी रह सकती है या जोखिम बढ़ रहे हैं?
Copper Stock: वैश्विक अनिश्चितता का असर सोने के दामों पर बीते एक साल से देखने को मिल रहा है. जब सोने के दाम अपने उच्च स्तर पर चले गए तो बाजार का रुख दूसरे मेटल की ओर भी बढ़ा जिसमें चांदी और तांबा भी रहे. बीते एक साल में कॉपर की कीमतों में करीब 36 फीसदी की तेजी आई है और यह उछाल सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीमित नहीं रहा.
भारत में इससे जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी हलचल देखने को मिली . खासतौर पर कॉपर रीसाइक्लिंग से जुड़ी एक माइक्रोकैप कंपनी Sunlite Recycling Industries Ltd के शेयरों ने निवेशकों का ध्यान खींचा है. इस रिपोर्ट में हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि कॉपर की यह तेजी Sunlite के बिजनेस और उसके शेयर के लिए क्या मायने रखती है.
वैश्विक बाजार में कॉपर की चाल
हाल के महीनों में वैश्विक स्तर पर कॉपर की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. LME पर कॉपर की कीमतें साल-दर-साल 30 से 40 फीसदी तक बढ़कर लगभग 13,000 डॉलर प्रति टन के करीब पहुंच गई हैं, जो 2009 के बाद का उच्चतम स्तर है. सप्लाई साइड पर खदानों में रुकावट, घटते ओर ग्रेड और नई क्षमता की कमी ने बाजार को टाइट कर दिया है.
Sunlite पर इस रैली का असर
Sunlite Recycling Price मूवमेंट पर नजर डालें तो सनलाइट का स्टॉक हाल के महीनों में काफी चर्चा में रहा है. Q1FY26 में शेयर करीब 63 फीसदी चढ़ा. Q2 में यह अपने Q1 क्लोजिंग से लगभग 15 फीसदी ऊपर के स्तर तक पहुंचा. इसके बाद Q3FY26 की शुरुआत यानी अक्टूबर से अब तक शेयर में 121 फीसदी से ज्यादा की तेजी आ चुकी है, वहीं एक साल में 138 फीसदी रिटर्न दिया है. बीते शुक्रवार कंपनी के शेयर लोअर सर्किट पर चले गए और 376 रपपये पर बंद हुए. इस तेजी के पीछे कॉपर की कीमतों में उछाल और कंपनी की मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस दोनों की भूमिका मानी जा रही है.

क्या है Sunlite Recycling Industries का बिजनेस
करीब 409 करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ Sunlite Recycling Industries एक माइक्रोकैप कंपनी है, जिसकी स्थापना 2012 में हुई थी और इसका मुख्यालय गुजरात में है. कंपनी की केडा में स्थित आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में रीसाइकल्ड कॉपर स्क्रैप को प्रोसेस कर हाई क्वालिटी कॉपर प्रोडक्ट्स बनाए जाते हैं. यह स्क्रैप सिर्फ घरेलू बाजार से ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब, यूएई और अमेरिका जैसे देशों से भी मंगाया जाता है.
कंपनी का प्रोडक्ट पोर्टफोलियो काफी विविध है. इसके कॉपर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल घरेलू उपकरणों से लेकर इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, पावर जेनरेशन, पावर ट्रांसमिशन और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर तक होता है. भारत के 10 से ज्यादा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसकी मौजूदगी इसे देश के संगठित कॉपर रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम में एक मजबूत खिलाड़ी बनाती है.
कैसा है कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो Sunlite की ग्रोथ काफी अच्छी दिखती है. H1FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 76 फीसदी बढ़कर 637 करोड़ रुपये से 1,122 करोड़ रुपये पहुंच गया. यह इशारा करता है कि कंपनी का बिजनेस डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तौर पर कॉपर की मांग से जुड़ा हुआ है. इसी अवधि में नेट प्रॉफिट 7 करोड़ रुपये से बढ़कर 14 करोड़ रुपये हो गया, यानी 100 फीसदी की छलांग.
वैल्यूएशन के लिहाज से भी कंपनी बहुत महंगी नहीं दिखती. इसका PE रेशियो करीब 18 है, जबकि इंडस्ट्री का औसत PE लगभग 21 के आसपास है. यह संकेत देता है कि ग्रोथ के बावजूद शेयर में अभी भी कुछ वैल्यू मौजूद हो सकती है.
| वित्तीय पैरामीटर | H1FY25 | H1FY26 | बदलाव (YoY) |
|---|---|---|---|
| रेवेन्यू (₹ करोड़) | 637 | 1,122 | +76% |
| नेट प्रॉफिट (₹ करोड़) | 7 | 14 | +100% |
| वॉल्यूम (MT) | 7,753 | 12,502 | +61% |
| EBITDA मार्जिन | – | 1.95% | – |
| PAT मार्जिन | – | 1.28% | – |
| ROCE (FY25) | – | 36% | – |
| ROE (FY25) | – | 36% | – |
| नेट वर्थ (₹ करोड़) | 18 (FY24) | 74 (H1FY26) | मजबूत बढ़त |
| PE रेशियो | – | 18 | इंडस्ट्री PE (21) से कम |
कॉपर क्यों है जरूरी
कॉपर आने वाले दशकों की टेक्नोलॉजी का आधार है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहतरीन इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी, मजबूती और 100 फीसदी रीसाइक्लेबल होना है. इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की तरफ बढ़ती दुनिया में कॉपर की मांग संरचनात्मक रूप से बढ़ रही है.
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में कॉपर का इस्तेमाल मोटर, बैटरी, इन्वर्टर, वायरिंग और चार्जिंग सिस्टम में होता है. एक EV में पारंपरिक गाड़ी की तुलना में 3 से 4 गुना ज्यादा कॉपर लगता है. इसके अलावा चार्जिंग स्टेशन और पावर ग्रिड भी बड़े पैमाने पर कॉपर पर निर्भर हैं.
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में सोलर पैनल, विंड टर्बाइन, इन्वर्टर और ट्रांसमिशन लाइनों में कॉपर की बड़ी भूमिका है. AI डेटा सेंटर्स और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में भी भारी मात्रा में कॉपर की जरूरत होती है, क्योंकि वहां पावर केबलिंग, सर्वर रैक्स और कूलिंग सिस्टम बेहद अहम होते हैं. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर्स, रेलवे, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में भी कॉपर की मांग लगातार बढ़ रही है.
वॉल्यूम ग्रोथ और मार्जिन
H1FY26 में कंपनी का वॉल्यूम 7,753 मीट्रिक टन से बढ़कर 12,502 मीट्रिक टन हो गया, यानी 61 फीसदी की बढ़त. यह इंडस्ट्री औसत से कहीं ज्यादा है और यह दिखाता है कि कंपनी मार्केट शेयर बढ़ा रही है. हालांकि EBITDA और PAT मार्जिन क्रमशः 1.95 फीसदी और 1.28 फीसदी हैं, लेकिन यह इस सेक्टर की प्रकृति के हिसाब से सामान्य है.
असल ताकत कंपनी के रिटर्न रेशियो में दिखती है. FY25 में ROCE और ROE दोनों करीब 36 फीसदी रहे. मजबूत वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट, कम डेब्टर डेज और बेहतर कैश कन्वर्जन साइकिल कंपनी को कम मार्जिन के बावजूद मजबूत बनाते हैं.
क्या कॉपर के रैली से कंपनी को होगा फायदा?
कॉपर की कीमतों में यह तेजी Sunlite के लिए कई मायनों में फायदेमंद है. इनपुट साइड पर जब प्राइमरी कॉपर महंगा होता है, तब रीसाइकल्ड स्क्रैप तुलनात्मक रूप से सस्ता और ज्यादा आकर्षक बन जाता है. इससे कंपनी को लागत के स्तर पर फायदा मिलता है.
आउटपुट साइड पर ऊंची कॉपर कीमतें ऑटोमोबाइल, पावर ट्रांसमिशन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी इंडस्ट्रीज को रीसाइकल्ड कॉपर की तरफ मोड़ती हैं. Sunlite का हाई-प्योरिटी रीसाइकल्ड कॉपर वर्जिन कॉपर का मजबूत विकल्प बन जाता है, खासकर तब जब कीमतों का अंतर कम हो जाता है.
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इसके अलावा, कंपनी Annealed Tinned Coated वायर जैसे हाई-परफॉर्मेंस प्रोडक्ट्स में भी विस्तार कर रही है, जिनकी मांग PCB और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में तेजी से बढ़ रही है. हालांकि जोखिम भी हैं. अगर कॉपर की कीमतों में 20 से 30 फीसदी की तेज गिरावट आती है, तो मार्जिन पर दबाव आ सकता है. स्क्रैप सप्लाई की अस्थिरता भी एक फैक्टर है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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