क्रूड की बढ़ती कीमतों से बिगड़ा सेंटीमेंट, BPCL, HPCL, IndiGo और Asian Paints में 4% तक आई गिरावट

अमेरिका द्वारा ईरान में 80 से ज्यादा ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ गया है. यह कार्रवाई Hormuz Strait में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई. इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है. क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी.

Oil Stock crash Image Credit: Money9 Live

बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बाद क्रूड की कीमतों से प्रभावित होने वाले शेयरों में बिकवाली देखने को मिली. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड 76 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जिसका असर एयरलाइन, ऑयल मार्केटिंग और पेंट कंपनियों के शेयरों पर साफ दिखाई दिया. इसका असर भारतीय शेयर पर भी देखने को मिला. सेंसेक्स भी 600 अंकों से ज्यादा टूट गया.

इन शेयरों में आई तेज गिरावट

  • कच्चे तेल की तेजी के बीच सबसे ज्यादा दबाव ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs), एयरलाइन और पेंट सेक्टर के शेयरों पर रहा. InterGlobe Aviation (IndiGo) का शेयर करीब 2.14 फीसदी गिरकर 5,281.20 रुपये पर आ गया. कारोबार के दौरान यह 5,228.85 रुपये के निचले स्तर तक पहुंचा.
  • वहीं, SpiceJet का शेयर भी करीब 1.04 फीसदी फिसलकर 11.41 रुपये पर कारोबार करता दिखा.
  • ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में BPCL का शेयर 3.87 फीसदी टूटकर 301.80 रुपये और HPCL का शेयर 4.13 फीसदी गिरकर 389.20 रुपये पर पहुंच गया. वहीं, Asian Paints का शेयर भी करीब 1.52 फीसदी की कमजोरी के साथ 2,689.90 रुपये पर कारोबार करता दिखा.

क्यों बढ़ा कच्चे तेल का भाव?

अमेरिका द्वारा ईरान में 80 से ज्यादा ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ गया है. यह कार्रवाई Hormuz Strait में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई. इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है. क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 3 फीसदी की तेजी आ गई. इसके अलावा अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने की अनुमति देने वाली प्रतिबंध छूट भी वापस ले ली है, जिससे वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है.

जानकार क्या कह रहे हैं?

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर ग्लोबल अफेयर्स की एसोसिएट डीन Carolyn Kissane का मानना है कि अगर तनाव और नहीं बढ़ता है तो कच्चे तेल की मौजूदा तेजी लंबे समय तक नहीं टिकेगी. वहीं Geojit Investments के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी. के. विजयकुमार के मुताबिक, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और ब्रेंट क्रूड के 76 डॉलर के ऊपर पहुंचने से बाजार एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में आ गया है.

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