पश्चिम एशिया में तनाव घटा, ब्रेंट क्रूड टूटा; इन सेक्टर में बन सकता है मौका, रडार पर रखें स्टॉक्स

तेल की कीमतों में यह गिरावट इसलिए आई क्योंकि अमेरिका ने लगातार 13 रात तक बमबारी करने के बाद पिछले दो दिनों से ईरान पर कोई नया हमला नहीं किया है. दूसरी ओर, ईरान ने भी कुवैत और बहरीन जैसे उन खाड़ी देशों पर कोई जवाबी या तनाव बढ़ाने वाला हमला नहीं किया है, जहां अमेरिका के सैन्य ठिकाने मौजूद हैं.

ब्रेंट क्रूड Image Credit: Getty image

सोमवार, 27 जुलाई को एशियाई कारोबार की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली. इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच कुछ समय के लिए हमलों का रुकना रहा, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव फिलहाल कम होता नजर आया. इसका असर सीधे ग्लोबल ऑयल मार्केट पर दिखा और निवेशकों ने राहत की सांस ली. ब्रेंट क्रूड की कीमत शुरुआती कारोबार में 7 फीसदी तक टूटकर 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच गई. हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी आई. वहीं, WTI भी 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया और इसमें करीब 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

तेल की कीमतों में यह गिरावट इसलिए आई क्योंकि अमेरिका ने लगातार 13 रात तक बमबारी करने के बाद पिछले दो दिनों से ईरान पर कोई नया हमला नहीं किया है. दूसरी ओर, ईरान ने भी कुवैत और बहरीन जैसे उन खाड़ी देशों पर कोई जवाबी या तनाव बढ़ाने वाला हमला नहीं किया है, जहां अमेरिका के सैन्य ठिकाने मौजूद हैं.

इन सेक्टर्स को मिलेगा राहत

कच्चा तेल के कम कीमतों का सबसे ज्यादा असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर देखने को मिलता है, क्योंकि इससे इन्वेंट्री लागत और वर्किंग कैपिटल पर दबाव कम होता है. टायर और पेंट कंपनियों को भी राहत मिलती है, क्योंकि उनके कई कच्चे माल क्रूड ऑयल से जुड़े होते हैं. वहीं एयरलाइन कंपनियों के लिए एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी ATF सबसे बड़ा खर्च होता है. ऐसे में तेल सस्ता होने से उनकी लागत घटने की उम्मीद बढ़ जाती है. इसका असर सीधा कंपनी के शेयरों पर भी देखने को मिलता है.

  • एयरलाइन सेक्टर: InterGlobe Aviation (IndiGo): ईंधन की लागत घटने से एयरलाइन कंपनियों का मार्जिन सुधरता है.
  • पेंट कंपनियां : Asian Paints, Berger Paints India, Kansai Nerolac Paints
  • ऑयल मार्केटिंग : HPCL & BPCL

हूती विद्रोहियों के दावों को बाजार ने किया नजरअंदाज

फिलहाल बाजार ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के उस दावे पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया है, जिसमें कहा गया कि शनिवार को उन्होंने लाल सागर के किनारे स्थित सऊदी अरामको से जुड़ी सुविधाओं पर जिजान और यांबू में हमला किया. अब तक न तो सऊदी अरब और न ही अरामको ने इन दावों की आधिकारिक पुष्टि की है. हालांकि स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 6 बजे जिजान और यांबू के लिए आपातकालीन चेतावनी जारी की गई थी, जिसे कुछ समय बाद वापस ले लिया गया.

यांबू और जिजान की रणनीतिक अहमियत

होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति को देखते हुए यांबू सऊदी अरब के तेल निर्यात का अहम केंद्र बन गया है. वहीं, जिजान में अरामको की बड़ी रिफाइनरी के साथ महत्वपूर्ण बंदरगाह भी मौजूद है.

इस महीने 20 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है ब्रेंट

हालिया गिरावट के बावजूद इस महीने ब्रेंट क्रूड की कीमतों में अब तक 20 फीसदी से ज्यादा की तेजी बनी हुई है. इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया का संघर्ष होर्मुज स्ट्रेट से आगे बढ़कर लाल सागर तक फैलना रही. इसके अलावा, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना पर हमले के बाद सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री प्रतिबंध लगाने की घोषणा भी की थी.

टेक्निकल इंडिकेटर की मानें तो ब्रेंट क्रूड पहले ही “ओवरबॉट” यानी जरूरत से ज्यादा तेजी वाले स्तर पर पहुंच चुका था. ऐसे में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर के स्तर पर कीमतों में मुनाफावसूली आना स्वाभाविक माना जा रहा है.

यूक्रेन के हमले पर फिलहाल बाजार की नजर नहीं

बाजार ने अभी यूक्रेन की ओर से कैस्पियन सागर में एक ईरानी कारोबारी जहाज पर किए गए हमले को भी ज्यादा महत्व नहीं दिया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया कि लंबी दूरी के हमलों में यूक्रेन को बड़ी सफलता मिली है. उनके मुताबिक, कैस्पियन सागर में ऐसे जहाजों को निशाना बनाया गया जो ईरान से जुड़े सैन्य सामान की ढुलाई में इस्तेमाल हो रहे थे. उन्होंने यह भी कहा कि एक युद्धपोत को भी निशाना बनाया गया. इस घटना के बाद ईरान ने यूक्रेन के खिलाफ आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है.

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