सिर्फ Dividend Yield नहीं, इन 5 शेयरों की असली ताकत है दमदार बिजनेस; कम कर्ज के साथ मजबूत है कैश फ्लो

क्या सिर्फ डिविडेंड यील्ड देखकर शेयर खरीदना सही है? निवेश से पहले कंपनी का मजबूत बिजनेस, कैश फ्लो, बैलेंस शीट और कम कर्ज भी उतना ही जरूरी होता है. Coal India, ITC, Castrol India, REC और Infosys जैसी कंपनियां केवल बेहतर डिविडेंड यील्ड ही नहीं, बल्कि मजबूत फंडामेंटल और लगातार कैश जनरेट करने की क्षमता के दम पर निवेशकों का भरोसा जीतती हैं.

डिविडेंड स्टॉक Image Credit: money9live.com

Dividend Stocks: शेयर बाजार में निवेश करने वाले ज्यादातर निवेशक डिविडेंड यील्ड देखकर शेयर चुनने की कोशिश करते हैं. पहली नजर में ज्यादा डिविडेंड यील्ड वाला शेयर आकर्षक लगता है, लेकिन निवेश की दुनिया में यही सबसे बड़ा भ्रम भी साबित हो सकता है. किसी कंपनी का डिविडेंड यील्ड केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह कितना डिविडेंड दे रही है, बल्कि यह भी इस पर निर्भर करता है कि उसके शेयर की कीमत कितनी है. कई बार शेयर की कीमत में तेज गिरावट आने से भी डिविडेंड यील्ड बढ़ जाती है. ऐसे में केवल ऊंचा डिविडेंड यील्ड देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है. आइए जानते हैं उन कंपनियों के बारे में, जो सिर्फ ऊंचा डिविडेंड देने वाली नहीं हैं, बल्कि मजबूत कैश फ्लो, बेहतर बैलेंस शीट और स्थिर मुनाफे के दम पर लंबे समय तक निवेशकों को कमाई कराने की क्षमता भी रखती हैं.

Coal India: कैश का मजबूत किला

इस सूची में पहला नाम Coal India का है. कंपनी का डिविडेंड यील्ड 6.2 फीसदी है और पेआउट रेशियो करीब 47 फीसदी है. यानी कंपनी अपनी कमाई का आधे से भी कम हिस्सा डिविडेंड के रूप में बांटती है और बाकी रकम कारोबार में बनाए रखती है. सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है, बल्कि उसके पास बड़ी मात्रा में नकदी मौजूद है. हालांकि, आने वाले वर्षों में कोयले की मांग और ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव कंपनी के सामने चुनौती बन सकते हैं.

ITC: मजबूत कैश फ्लो का सहारा

दूसरे स्थान पर ITC है. कंपनी का कारोबार मजबूत कैश फ्लो पैदा करता है और वर्षों से लगातार डिविडेंड देती आ रही है. इसका डिविडेंड यील्ड 5.1 फीसदी है, जबकि कंपनी लगभग कर्ज मुक्त है. हालांकि, सिगरेट कारोबार पर बढ़ते नियामकीय दबाव और सीमित ग्रोथ भविष्य में चुनौती बन सकते हैं.

Castrol India: 100% से ज्यादा Payout के बावजूद मजबूत

तीसरे नंबर पर Castrol India है. हाल के एक वर्ष में कंपनी का पेआउट रेशियो 139 फीसदी था, अगले वर्ष 138 फीसदी रहा और वर्तमान में यह लगभग 121 फीसदी है. पहली नजर में 100 फीसदी से अधिक पेआउट रेशियो जोखिम भरा लग सकता है, लेकिन कंपनी का एसेट लाइट बिजनेस मॉडल और मजबूत फ्री कैश फ्लो इसे अलग बनाते हैं. कंपनी जितना मुनाफा कमाती है, उससे भी अधिक नकदी उत्पन्न करने में सक्षम है. हालांकि, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बढ़ती हिस्सेदारी भविष्य में इसके पारंपरिक कारोबार को प्रभावित कर सकती है.

REC: कम पेआउट, ज्यादा सुरक्षा

चौथे स्थान पर REC है. कंपनी का डिविडेंड यील्ड करीब 5 फीसदी है, लेकिन इसका पेआउट रेशियो केवल 29.9 फीसदी है. यानी कंपनी अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा भविष्य की जरूरतों के लिए बचाकर रखती है. हालांकि, कंपनी के मुनाफे पर सरकारी नीतियों और प्रस्तावित पीएफसी-REC मर्जर का असर पड़ सकता है.

Infosys: AI चुनौती के बीच भी मजबूत

सूची में पांचवां नाम Infosys का है. कंपनी का डिविडेंड यील्ड करीब 4.7 फीसदी है. कंपनी पूरी तरह कर्ज मुक्त है और मजबूत कैश फ्लो पैदा करती है. हालांकि, AI के बढ़ते इस्तेमाल से आईटी सर्विसेज सेक्टर के बिजनेस मॉडल पर दबाव बनने की आशंका बनी हुई है. इसके बावजूद कंपनी की वित्तीय स्थिति अभी भी मजबूत मानी जाती है.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.

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