जेम्स बॉन्ड से भी खतरनाक है अमेरिका का ये ‘यील्ड बॉन्ड’, क्या शेयर बाजार की तबाही का है सबसे बड़ा विलेन!
US Treasury Yield में तेजी ने भारतीय शेयर बाजार की चिंता बढ़ा दी है. 30 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5.444 फीसदी और 10 साल की यील्ड 5.145 फीसदी तक पहुंच गई. बॉन्ड यील्ड बढ़ने से अमेरिकी निवेश ज्यादा आकर्षक हो सकता है, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से विदेशी कैपिटल निकलने का दबाव बढ़ सकता है.

सोमवार, 28 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर भारी गिरावट देखने को मिली. कारोबार के दौरान Sensex 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 में 300 से ज्यादा अंकों की गिरावट दर्ज हुई. इस बिकवाली के बीच BSE में लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट कैप करीब 6 लाख करोड़ रुपये घट गई. पिछले हफ्ते भी बाजार में लगातार दबाव देखने को मिला था. जब भी भारतीय शेयर बाजार में ऐसी तेज गिरावट आती है, तो इसके पीछे कई ग्लोबल कारणों की चर्चा होती है. इनमें US Treasury Yield भी एक अहम कारण है. लेकिन आखिर US Treasury Yield क्या है और इसके बढ़ने से भारत जैसे उभरते बाजारों पर दबाव क्यों बढ़ता है. आइए आसान भाषा में समझते हैं.
बॉन्ड यील्ड आखिर होती क्या है
US ट्रेजरी बॉन्ड को दुनिया के सबसे अहम और सुरक्षित निवेश साधनों में गिना जाता है. जब सरकार बॉन्ड जारी करके निवेशकों से पैसा जुटाती है तो उसके बदले ब्याज देती है. इसी ब्याज से मिलने वाले रिटर्न को आसान भाषा में बॉन्ड यील्ड कहा जाता है. बॉन्ड की कीमत और उसकी यील्ड एक दूसरे के उलट चलती हैं. यानी जब बॉन्ड की कीमत गिरती है तो उसकी यील्ड बढ़ती है. US बॉन्ड बाजार में बिकवाली बढ़ने के कारण यील्ड में तेज उछाल देखने को मिला.
30 साल की बॉन्ड यील्ड 5.444 फीसदी पर पहुंची
गुरुवार को 30 साल के US ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 3 बेसिस प्वाइंट से ज्यादा बढ़कर 5.444 फीसदी हो गई. यह 2004 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. इसके अलावा 10 साल की US ट्रेजरी यील्ड 5.145 फीसदी तक पहुंच गई. 10 साल की यील्ड को दुनिया के वित्तीय बाजारों में एक अहम बेंचमार्क माना जाता है. दो साल की बॉन्ड यील्ड भी 4.9 फीसदी के ऊपर चली गई. इन स्तरों ने अमेरिका में ब्याज दरों और महंगाई को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ाई है.
भारत पर क्यों पड़ता है असर
US बॉन्ड यील्ड में तेजी का असर भारत समेत दूसरे उभरते बाजारों पर पड़ सकता है. इसकी एक वजह यह है कि US बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ने पर निवेशकों के लिए डॉलर आधारित निवेश ज्यादा आकर्षक हो सकता है. ऐसे माहौल में उभरते बाजारों से विदेशी कैपिटल निकलने का दबाव बढ़ सकता है. भारत में विदेशी निवेशकों की बिकवाली शेयर बाजार पर असर डाल सकती है. हालांकि बाजार पर असर केवल बॉन्ड यील्ड से नहीं बल्कि कई अन्य वैश्विक और घरेलू कारणों से भी पड़ता है.
भारत पर कैसे पड़ता है असर
जब अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी निवेशकों को अमेरिका में बिना किसी रिस्क के अच्छा रिटर्न मिलने लगता है. इसके कारण वे भारतीय शेयर मार्केट जैसे रिस्क भरे बाजारों से अपना पैसा निकालकर वापस अमेरिका ले जाने लगते हैं, जिससे भारतीय बाजार में बड़ी बिकवाली और गिरावट आती है. इसके अलावा, भारत से डॉलर बाहर जाने के कारण रुपया कमजोर होता है, जिससे देश में आयात महंगा हो जाता है, महंगाई का खतरा बढ़ता है और कंपनियों के मुनाफे पर बुरा असर पड़ता है.
एक उदाहरण से समझते हैं, मान लीजिए आपकी कॉलोनी में एक बहुत भरोसेमंद और सुरक्षित बैंक (अमेरिका) है जो पहले सिर्फ 2% ब्याज देता था, इसलिए आपने ज्यादा कमाई के लिए अपना पैसा पास की एक मुनाफा देने वाली दुकान (भारतीय शेयर बाजार) में लगा दिया. लेकिन कुछ समय बाद, उस सुरक्षित बैंक ने अपना ब्याज बढ़ाकर 5% कर दिया; अब आप और आपके जैसे कई लोग दुकान से अपना पैसा निकालकर वापस उस सुरक्षित बैंक में जमा करने लगेंगे क्योंकि वहां बिना किसी रिस्क के अच्छा रिटर्न मिल रहा है. जब बहुत सारे लोग एक साथ दुकान (भारतीय बाजार) से अपना पैसा निकालते हैं, तो दुकान की वैल्यू कम हो जाती है और बाजार गिर जाता है.
मजबूत US अर्थव्यवस्था ने बढ़ाई चिंता
अमेरिका से आए आर्थिक आंकड़ों ने भी बॉन्ड यील्ड में तेजी को बढ़ावा दिया. सितंबर में S&P Global Services PMI 58.7 पर पहुंच गया, जबकि अगस्त में यह 56.5 था. यह करीब पांच साल में इसका सबसे ऊंचा स्तर है. मैन्युफैक्चरिंग PMI भी बढ़कर 56.7 हो गया, जो चार साल से ज्यादा समय का सबसे मजबूत स्तर है. इन आंकड़ों से संकेत मिला कि US अर्थव्यवस्था की ग्रोथ अभी मजबूत बनी हुई है. इससे फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव आया.
अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद बढ़ी
मजबूत आर्थिक आंकड़ों के बाद US फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की संभावना को लेकर बाजार की उम्मीद बढ़ गई है. फेड फंड्स फ्यूचर्स के अनुसार अक्टूबर में दर बढ़ने की संभावना 66 फीसदी तक पहुंच गई, जबकि इसी दिन पहले यह 53 फीसदी थी. एक महीने पहले यह संभावना 10 फीसदी से भी कम थी. ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद बढ़ने पर US बॉन्ड यील्ड में और तेजी का दबाव बन सकता है.
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तेल की कीमत और सरकारी कर्ज भी बड़ी वजह
US बॉन्ड यील्ड में तेजी के पीछे केवल आर्थिक आंकड़े ही नहीं हैं. अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भी महंगाई की चिंता बढ़ाई है. इसके अलावा अमेरिका के सरकारी कर्ज के ऊंचे स्तर को लेकर भी निवेशक चिंतित हैं. ज्यादा सरकारी कर्ज के बीच सरकार को बाजार से ज्यादा पैसा जुटाना पड़ सकता है. इससे बॉन्ड की सप्लाई और निवेशकों की मांग के बीच संतुलन प्रभावित हो सकता है और यील्ड पर दबाव बढ़ सकता है.