Vodafone Idea को बड़ी राहत! HC ने ₹53 करोड़ देने का दिया आदेश; शेयर में दिखेगी हलचल?
Vodafone Idea को दिल्ली हाई कोर्ट से 53.09 करोड़ रुपये के टैक्स रिफंड मामले में बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने इनकम टैक्स विभाग को तय समय के भीतर रिफंड की रकम ब्याज के साथ जारी करने का आदेश दिया है. निवेशकों की नजर अब इस राहत के बाद कंपनी के शेयर की आगे की चाल पर रहेगी.

दिल्ली हाई कोर्ट ने टैक्स रिफंड जारी करने में हो रही देरी पर Income Tax Department को कड़ी फटकार लगाई है. अदालत ने कहा कि विभाग में टैक्स रिफंड की स्थिति की तस्वीर काफी गंभीर नजर आती है. कोर्ट ने Vodafone Idea को 53.09 करोड़ रुपये का टैक्स रिफंड लागू ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है.
जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने 18 अगस्त के आदेश में कहा कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को 30 सितंबर 2026 तक वोडाफोन-आइडिया के अकाउंट में 53.09 करोड़ रुपये जमा करने होंगे. अगर तय तारीख तक रकम नहीं दी जाती है तो पूरे रिफंड पर कानूनी ब्याज के अलावा हर महीने 1 फीसदी अतिरिक्त ब्याज देना होगा.
क्यों फंसा था ₹53 करोड़ का टैक्स रिफंड?
यह मामला Assessment Year 2003-04 और 2008-09 से 2013-14 के टैक्स रिफंड से जुड़ा है. Vodafone Idea को अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 के बीच Income Tax Appellate Tribunal से कई मामलों में राहत मिली थी. इसके बाद Assessing Officer ने अपीलीय आदेशों के आधार पर कंपनी को कुल ₹53.09 करोड़ का रिफंड तय किया. लेकिन रिफंड तय होने के बावजूद कंपनी को रकम नहीं मिली.
हाई कोर्ट ने कहा कि कंपनी करीब एक दशक से कानूनी लड़ाई लड़ रही है. अक्टूबर 2024 और मई 2026 में रिफंड की रकम तय होने के बाद भी उसे कंपनी के खाते में नहीं भेजा गया.
Income Tax Department ने Form 26B मांगा
Income Tax Department ने रिफंड जारी करने से पहले Vodafone Idea से Form 26B जमा करने को कहा. यह फॉर्म आमतौर पर ज्यादा TDS कटने या जमा होने पर रिफंड मांगने के लिए इस्तेमाल होता है. कंपनी ने दो Assessment Years के लिए फॉर्म भी जमा कर दिए. हालांकि, विभाग ने कंपनी के PAN और उसकी सिस्टर कंपनियों के TAN पर बकाया मांग का हवाला देकर आवेदन खारिज कर दिया.
विभाग ने करीब 924.57 करोड़ रुपये की कुल बकाया टैक्स मांग का हवाला दिया. हालांकि, अदालत में विभाग ने माना कि इनमें से 913.66 करोड़ रुपये की मांग पर अलग-अलग अदालतों और अधिकारियों की ओर से पहले ही रोक लगी हुई है. वोडाफोन आइडिया ने बाकी बकाया मांग को भी चुनौती दी.
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने कहा कि जब Section 201 के तहत असेसमेंट पूरा हो जाता है या किसी अपीलीय आदेश के बाद टैक्स रिफंड तय हो जाता है तो वह टैक्सपेयर का अधिकार बन जाता है. इस पर लागू ब्याज भी टैक्सपेयर का हक है.
कोर्ट ने साफ कहा कि Assessment या अपीलीय आदेश के बाद बनने वाले टैक्स रिफंड को जारी करने से पहले Assessing Officer या CPC, Form 26B जमा करने की शर्त नहीं रख सकते.
कब रोका जा सकता है टैक्स रिफंड?
अदालत ने कहा कि विभाग Section 245 के तहत कानूनी तरीके से आदेश पास करके ही रिफंड को रोक सकता है या किसी बकाया मांग के साथ एडजस्ट कर सकता है. सिर्फ किसी टैक्सपेयर या उसकी सिस्टर कंपनी के TAN पर बकाया मांग होने की वजह से तय हो चुके रिफंड को नहीं रोका जा सकता. इसके लिए Section 245 के तहत वैध आदेश होना जरूरी है.
कोर्ट ने नहीं लगाया जुर्माना
बेंच ने यह भी कहा कि इस मामले में विभाग पर उदाहरण के तौर पर भारी लागत लगाई जा सकती थी. हालांकि, अदालत ने ऐसा नहीं किया. आखिरी में हाई कोर्ट ने वोडाफोन आइडिया की याचिकाएं मंजूर करते हुए कंपनी को 53.09 करोड़ रुपये का टैक्स रिफंड कानूनी ब्याज के साथ देने का आदेश दिया.
शेयर का हाल?
Vodafone Idea का शेयर 25 अगस्त को 7.97 फीसदी की तेजी के साथ 15.20 रुपये पर पहुंच गया. फिलहाल कंपनी का मार्केट कैप 104582 करोड़ रुपये है, जबकि दिन के कारोबार में शेयर ने 15.40 रुपये का हाई और 6.46 रुपये का लो बनाया.
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