भारत को मिला पहला स्पेस-टेक यूनिकॉर्न, जानें ऐसा क्या करती है Skyroot Aerospace, जिससे दिग्गज लगा रहे हैं करोड़ों

हैदराबाद की Skyroot Aerospace कंपनी ने करीब 570 करोड़ रुपये की नई फंडिंग जुटाई है. इस निवेश के बाद कंपनी भारत की पहली स्पेस-टेक यूनिकॉर्न बन गई है. यूनिकॉर्न उस प्राइवेट स्टार्टअप कंपनी को कहा जाता है जिसकी वैल्यू 1 बिलियन डॉलर या उससे ज्यादा हो. ऐसे में आइए जानते हैं ऐसा क्या करती है स्काईरूट एयरोस्पेस.

स्काईरूट Image Credit:

India First Space-Tech Unicorn: भारत का स्पेस सेक्टर अब सिर्फ सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं रह गया है. प्राइवेट कंपनियां भी तेजी से दुनिया के स्पेस मार्केट में अपनी पहचान बना रही हैं. इसी कड़ी में Skyroot Aerospace ने बड़ा मुकाम हासिल किया है. हैदराबाद की इस स्पेस लॉन्च कंपनी ने 60 मिलियन डॉलर यानी करीब 570 करोड़ रुपये की नई फंडिंग जुटाई है. इस निवेश के बाद कंपनी भारत की पहली स्पेस-टेक यूनिकॉर्न बन गई है. यूनिकॉर्न उस स्टार्टअप कंपनी को कहा जाता है जिसकी वैल्यू 1 बिलियन डॉलर या उससे ज्यादा हो. ऐसे में आइए जानते हैं ऐसा क्या करती है स्काईरूट एयरोस्पेस.

इस फंडिंग राउंड में Ram Shriram की Sherpalo Ventures, सिंगापुर का सॉवरेन वेल्थ फंड GIC, BlackRock, Greenko Group के फाउंडर्स, Arkam Ventures, Playbook Partners और Shanghvi Family Office समेत कई निवेशकों ने हिस्सा लिया. प्लेबुक पार्टनर्स और शांघवी फैमिली ऑफिस इस कंपनी में नए निवेशक बने हैं, जबकि शेरपालो, जीआईसी, ब्लैक रॉक, ग्रीनको ग्रुप और अर्कम वेंचर्स पहले से निवेशक रहे हैं. इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व शेरपालो और जीआईसी ने संयुक्त रूप से किया.

किसने शुरू की Skyroot Aerospace

Skyroot Aerospace की शुरुआत साल 2018 में पूर्व ISRO वैज्ञानिक पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने की थी. कंपनी का मुख्यालय हैदराबाद में है. कंपनी निजी ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल डिजाइन और डेवलप करने पर फोकस कर रही है.

कंपनी किस चीज पर कर रही फोकस

कंपनी का लक्ष्य छोटे सैटेलाइट्स को कम लागत और कम समय में अंतरिक्ष तक पहुंचाना है. Skyroot Aerospace ने साल 2022 में Vikram-S रॉकेट लॉन्च किया था. यह भारत की पहली निजी कंपनी बनी थी जिसने सफलतापूर्वक रॉकेट लॉन्च किया.

इसके अलावा कंपनी ने भारत का पहला निजी क्रायोजेनिक इंजन Dhawan-1 और सॉलिड-फ्यूल मोटर Kalam-100 और Kalam-250 भी विकसित किए हैं. कंपनी 3D प्रिंटेड इंजन टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रही है.

Vikram-1 लॉन्च पर टिकी सबकी नजर

moneycontrol की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के Co-founder और CEO पवन कुमार चंदना का कहना है कि Skyroot की टीम आने वाले Vikram-1 लॉन्च को लेकर काफी उत्साहित है. यह भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट होगा. इसे छोटे सैटेलाइट्स को ऑर्बिट में भेजने के लिए डिजाइन किया गया है. उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े निवेशकों का भरोसा इस बात का संकेत है कि कंपनी स्पेस सेक्टर में मजबूत भविष्य देख रही है.

Vikram-2 और बड़े मिशनों पर होगा फोकस

कंपनी के मुताबिक नई फंडिंग का इस्तेमाल Vikram-1 लॉन्च की रफ्तार बढ़ाने, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत करने और Vikram-2 लॉन्च व्हीकल विकसित करने में किया जाएगा. Vikram-2 एक 1-टन क्लास लॉन्च व्हीकल होगा, जिसमें एडवांस्ड क्रायोजेनिक स्टेज का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे कंपनी बड़े मिशनों और ज्यादा ग्राहकों को सेवा दे सकेगी.

2023 के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा हुई कंपनी की वैल्यू

Skyroot Aerospace की वैल्यू अब 1.1 बिलियन डॉलर पहुंच गई है. इससे पहले 2023 में कंपनी की वैल्यू करीब 519 मिलियन डॉलर थी यानी कुछ ही सालों में कंपनी की वैल्यू दोगुनी से ज्यादा बढ़ गई. इसके साथ ही Skyroot अब भारत की सबसे ज्यादा फंडिंग पाने वाली स्पेस-टेक स्टार्टअप्स में शामिल हो गई है.

कुल फंडिंग 160 मिलियन डॉलर के पार

इस नए निवेश के बाद Skyroot Aerospace अब तक कुल 160 मिलियन डॉलर यानी करीब 1,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की फंडिंग जुटा चुकी है. भारत में तेजी से बढ़ते निजी स्पेस सेक्टर के बीच Skyroot की यह उपलब्धि इस बात का बड़ा संकेत मानी जा रही है कि आने वाले समय में भारतीय निजी कंपनियां वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं.

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