फ्यूल पंप प्योर पेट्रोल, E10 और E20… तीनों का स्टॉक एक साथ क्यों नहीं रख सकते? जान लीजिए सरकार का तर्क
भारत चुपचाप फ्यूल के बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है और ज्यादातर गाड़ी मालिकों को यह नहीं पता कि इसका उनके इंजन, माइलेज या जेब पर क्या असर पड़ेगा. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, फ्यूल पॉलिसी सिर्फ कंज्यूमर की पसंद पर आधारित नहीं हो सकती.

अगली बार जब आप पेट्रोल पंप पर जाएंगे, तो शायद आपको पंप पर कुछ नया दिखेगा. E10 और E20, जो उस रेगुलर फ़्यूल के ठीक बगल में होंगे जिसे आप हमेशा से इस्तेमाल करते आए हैं, लेकिन असल में ये क्या हैं? और सबसे जरूरी बात, क्या आपको अपनी कार में इनका इस्तेमाल करना चाहिए?
भारत चुपचाप फ्यूल के बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है और ज्यादातर गाड़ी मालिकों को यह नहीं पता कि इसका उनके इंजन, माइलेज या जेब पर क्या असर पड़ेगा. चाहे आप बिल्कुल नई कार चलाते हों या अपनी भरोसेमंद पुरानी टू-व्हीलर, आज आप जो फ्यूल चुनते हैं, वह आपकी सोच से कहीं अधिक मायने रख सकता है.
कंज्यूमर (ग्राहक) को ‘किंग’ क्यों नहीं माना जा रहा है?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, फ्यूल पॉलिसी सिर्फ कंज्यूमर की पसंद पर आधारित नहीं हो सकती. हालांकि, कंज्यूमर एक अहम पक्ष हैं, लेकिन पब्लिक पॉलिसी में एनर्जी सिक्योरिटी, पर्यावरण की सुरक्षा, किसानों की भलाई और राष्ट्रीय संसाधनों के सही इस्तेमाल का भी ध्यान रखना जरूरी है.
कंज्यूमर को पसंद का विकल्प देने पर चर्चा क्यों हो रही है?
विपक्ष ने केंद्र सरकार पर E20 पेट्रोल लाने को लेकर निशाना साधा है, क्योंकि भारत की सड़कों पर चल रहे लगभग 30 करोड़ वाहन ज्यादा इथेनॉल वाले मिश्रण पर चलने के लिए नहीं बने हैं. सरकार के इथेनॉल-ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने के फैसले की आलोचना करने वालों ने केंद्र से मांग की है कि फ्यूल स्टेशनों पर E10 पेट्रोल भी उपलब्ध हो. उनका कहना है कि अप्रैल 2023 से पहले बिके वाहनों में वही फ्यूल इस्तेमाल हो सके जो उनके ओनर मैनुअल में बताया गया है.
भारत ने अब तक इथेनॉल इकोसिस्टम बनाने में कितना निवेश किया है?
बिजनेस टुडे के अनुसार, सरकारी बैंकों ने इथेनॉल के प्रोडक्शन और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हर साल लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का फाइनेंस दिया है. इसलिए, अगर इथेनॉल ब्लेंडिंग का स्तर कम किया जाता है, तो ये निवेश बेकार हो जाएंगे और क्रूड ऑयल के इंपोर्ट को कम करने, उत्सर्जन घटाने और किसानों की मदद करने वाली राष्ट्रीय नीति कमजोर पड़ जाएगी.
क्या आपकी कार की माइलेज पर असर पड़ेगा?
सरकार के मुताबिक, आपकी कार की माइलेज पर मामूली असर पड़ सकता है और वह भी कुछ मामलों में. E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ गाड़ियों की फ्यूल इकॉनमी में 3-5% की कमी आ सकती है. हालांकि, सरकार का कहना है कि माइलेज परफॉर्मेंस का सिर्फ एक पहलू है.
पेट्रोल पंप एक ही समय में प्योर पेट्रोल, E10 और E20 का स्टॉक क्यों नहीं रख सकते?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश भर में तीनों ग्रेड बनाए रखना लॉजिस्टिक्स के नजरिए से मुश्किल और महंगा है. मंत्रालय ने कहा कि भारत में 1 लाख से अधिक रिटेल आउटलेट हैं, जिन्हें रिफाइनरी, टर्मिनल, डिपो और पाइपलाइन से सपोर्ट मिलता है.
मंत्रालय ने आगे कहा, ‘इस बड़ी सप्लाई चेन में बेस पेट्रोल के कई ग्रेड बनाए रखने से लॉजिस्टिक्स की बड़ी चुनौती खड़ी होगी, हैंडलिंग की लागत बढ़ेगी, इन्वेंट्री मैनेजमेंट मुश्किल हो जाएगा और ऑपरेशनल क्षमता कम हो जाएगी.’
सरकार E20 पर जोर क्यों दे रही है?
सरकार का दावा है कि E20 में अधिक ऑक्टेन, बेहतर एंटी-नॉक प्रॉपर्टी, तेजी से जलने की क्षमता, स्मूथ एक्सेलरेशन, बेहतर इंजन ऑपरेशन और काफी कम उत्सर्जन जैसे फायदे हैं. मारुति सुज़ुकी और हीरो मोटोकॉर्प के फील्ड डेटा का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि असल इस्तेमाल में, पुरानी गाड़ियों समेत किसी भी गाड़ी में E20 की वजह से जंग लगने या इंजन के असामान्य रूप से घिसने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है.