इंजन खराब होने से लेकर वारंटी खत्म होने तक… E20 Petrol पर सरकार ने दिया जवाब; इन बड़े दावों की बताई सच्चाई

E20 Petrol को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रहे इंजन खराब होने, वारंटी खत्म होने, इंश्योरेंस अमान्य होने और पर्यावरण पर असर जैसे दावों पर सरकार ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है. पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस मिनिस्ट्री ने बताया कि E20 Petrol वैज्ञानिक शोध, ARAI के परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव पर आधारित है.

E20 पेट्रोल Image Credit: AI/canva

E20 Petrol: सोशल मीडिया पर इन दिनों E20 Petrol को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. कहीं कहा जा रहा है कि इससे कार और बाइक के इंजन को नुकसान पहुंच सकता है, तो कहीं यह दावा किया जा रहा है कि E20 Petrol इस्तेमाल करने से वाहन की वारंटी और इंश्योरेंस भी अमान्य हो सकते हैं. इन सभी दावों के बीच पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस मिनिस्ट्री ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए इन्हें भ्रामक बताया है. मंत्रालय ने 10 बिंदुओं में स्पष्ट किया है कि 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रित E20 Petrol वैज्ञानिक शोध, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और नियामकीय मानकों पर आधारित है. सरकार का कहना है कि यह कार्यक्रम न केवल सुरक्षित है, बल्कि इससे किसानों, पर्यावरण और देश की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिल रहा है.

क्या है E20 Petrol

E20 Petrol वह ईंधन है, जिसमें 20 फीसदी इथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल का मिश्रण होता है. सरकार ने पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य दिसंबर 2025 में ही हासिल कर लिया था. इससे पहले वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में इथेनॉल की हिस्सेदारी केवल करीब 1.5 फीसदी थी.

क्या E20 से इंजन खराब होता है

सरकार ने इस दावे को पूरी तरह खारिज किया है. मंत्रालय के मुताबिक ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने यात्री वाहनों पर करीब 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों पर 20,000 किलोमीटर तक परीक्षण किए. इन परीक्षणों में वाहन की ड्राइविंग क्षमता या फ्यूल एफिशिएंसी पर कोई बड़ा असर नहीं पाया गया.

सरकार का कहना है कि E20 के लिए डिजाइन किए गए वाहनों में इसके इस्तेमाल से किसी तरह की समस्या नहीं आती. बल्कि इथेनॉल की अधिक ऑक्टेन रेटिंग कुछ मामलों में इंजन के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकती है.

वारंटी और इंश्योरेंस पर नहीं पड़ेगा असर

सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा था कि E20 Petrol इस्तेमाल करने से वाहन की वारंटी और इंश्योरेंस समाप्त हो सकते हैं. मंत्रालय ने इस दावे को भी गलत बताया है. सरकार के मुताबिक, जिन वाहनों को E20 के लिए मंजूरी दी गई है या जिन्हें E20 कंपैटिबल बनाया गया है, उन पर कंपनी की वारंटी और इंश्योरेंस दोनों पहले की तरह लागू रहेंगे.

क्या E20 से इंजन के पुर्जे खराब हो सकते हैं?

मंत्रालय के अनुसार ARAI, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स द्वारा किए गए संयुक्त अध्ययन में इंजन या धातु एवं प्लास्टिक के पुर्जों पर किसी गंभीर नुकसान का कोई प्रमाण नहीं मिला. हालांकि, सरकार ने यह जरूर माना है कि कुछ पुराने वाहनों में इस्तेमाल होने वाले रबर के कुछ पुर्जों को सामान्य से थोड़ा पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है.

पानी की खपत को लेकर भी सरकार ने दिया जवाब

सोशल मीडिया पर यह दावा भी वायरल हुआ कि 1 लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होता है. मंत्रालय ने इस दावे को भी भ्रामक बताया. सरकार के मुताबिक इथेनॉल बनाने में केवल खाद्य सुरक्षा की जरूरत पूरी होने के बाद बचा हुआ अतिरिक्त चावल इस्तेमाल किया जाता है.

इसके अलावा अब 40 फीसदी से अधिक इथेनॉल की आपूर्ति मक्का से हो रही है, जिसकी सिंचाई के लिए धान की तुलना में काफी कम पानी की जरूरत होती है. मंत्रालय ने यह भी बताया कि आधुनिक इथेनॉल डिस्टिलरीज प्रति लीटर इथेनॉल उत्पादन में केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी का उपयोग करती हैं और अधिकांश इकाइयां जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक के जरिए पानी का दोबारा इस्तेमाल करती हैं.

क्या E20 से चींटियां और मधुमक्खियां आकर्षित होती हैं

कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया था कि E20 Petrol में चीनी होने के कारण चींटियां और मधुमक्खियां आकर्षित होती हैं. सरकार ने इस दावे को भी पूरी तरह गलत बताया है. मंत्रालय के अनुसार फ्यूल ग्रेड इथेनॉल डिस्टिलेशन प्रक्रिया से तैयार किया जाता है. इसके अलावा इसमें ऐसे डिनैचुरेंट्स मिलाए जाते हैं, जो कीड़ों को दूर रखते हैं.

पर्यावरण और किसानों को मिल रहा फायदा

सरकार का दावा है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से देश को कई बड़े आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ मिले हैं. वर्ष 2014-15 से अब तक इस कार्यक्रम के कारण 1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है. इसके अलावा किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है.

सरकार के मुताबिक, इस कार्यक्रम से करीब 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम हुआ है और 310 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल के आयात की जरूरत भी कम हुई है.

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