होर्मुज की मनमानी खत्म! खाड़ी देशों ने ढूंढ निकाला नया ‘लैंड ब्रिज’, क्या समुद्र के मुकाबले सुरक्षित-किफायती है ये रूट?

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब, UAE और ओमान ने नया ‘लैंड ब्रिज’ तैयार किया है. अब हर दिन 3500 ट्रक रेगिस्तान के रास्ते तेल और सामान पहुंचा रहे हैं. जानिए कैसे यह नया रूट वैश्विक सप्लाई चेन और तेल व्यापार का गणित बदल सकता है.

खाड़ी देशों का नया रास्ता Image Credit: AI generated

दुनिया की लाइफलाइन कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान की घेराबंदी ने खाड़ी देशों के लिए संकट तो पैदा किया, लेकिन उन्हें अब एक ऐतिहासिक विकल्प भी दे दिया है. सीजफायर के बाद भी ईरान द्वारा रास्ता पूरी तरह न खोलने और अमेरिका के साथ परमाणु समझौता न होने के वजह से उपजे सस्पेंस ने खाड़ी देशों को ‘प्लान-बी’ पर अमल करने के लिए मजबूर कर दिया है. अब सऊदी अरब, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने मिलकर एक ऐसा सड़क मार्ग तैयार किया है, जिसने समुद्र की निर्भरता को लगभग खत्म कर दिया है.

रेगिस्तान में हर रोज दौड़ रहे 3500 ट्रक

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज के विकल्प के तौर पर अब हर रोज 3500 मालवाहक ट्रक रेगिस्तान के रास्ते अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं. यह रूट यूएई के फुजेराह और खोर फाक्कन पोर्ट से शुरू होता है. यहां से सामान उठाने के बाद ट्रक ओमान इंटरलिंक के रास्ते सऊदी अरब के लाल सागर पोर्ट (Red Sea Port) तक पहुंचते हैं. इसके बाद माल को फिर से जहाजों में लादकर स्वेज नहर के जरिए यूरोप और बाकी दुनिया में भेज दिया जाता है.

लागत और क्षमता में अंतर कितना है?

समुद्र के मुकाबले सड़क मार्ग का उपयोग करना सुनने में भले ही आसान लगे, लेकिन इसके गणित में बड़ा अंतर है:

  • लागत में फर्क: लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट्स और क्रेडिबल शिपिंग साइट्स के आंकड़ों के अनुसार, समुद्री मार्ग की तुलना में इस सड़क मार्ग से माल ढुलाई की लागत 25% से 40% तक अधिक आ रही है. इसका मुख्य कारण ट्रकों का ईंधन, ड्राइवरों का वेतन और रास्ते में लगने वाले टोल/बॉर्डर टैक्स हैं. हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह ‘सुरक्षा प्रीमियम’ है. युद्ध की स्थिति में जहाजों के डूबने या जब्त होने के डर से बेहतर है कि थोड़ी अधिक लागत देकर सुरक्षित माल पहुंचाया जाए.
  • तेल की सप्लाई: एक सामान्य तेल टैंकर (VLCC) जहां 20 लाख बैरल तेल ले जा सकता है, वहीं एक ट्रक की क्षमता सीमित होती है. वर्तमान में पाइपलाइनों और ट्रकों के मिश्रण से सऊदी अपनी तेल आपूर्ति का लगभग 15-20% हिस्सा ही डाइवर्ट कर पा रहा है.

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होर्मुज का दबदबा खतरे में?

दुनिया की 25 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति इसी 34 किमी चौड़े रास्ते से होती है. पिछले दो महीनों से ईरान के नियंत्रण वाले इस रूट के ठप होने से सऊदी, इराक, कुवैत और कतर का व्यापार प्रभावित हुआ था. लेकिन अब खाड़ी देशों ने यह संकेत दिया है कि वे केवल एक समुद्री रास्ते के भरोसे नहीं बैठे रहेंगे.

भले ही यह रास्ता फिलहाल महंगा है, लेकिन इसने वैश्विक सप्लाई चेन को टूटने से बचा लिया है. खाड़ी देशों का यह ‘लैंड ब्रिज’ भविष्य के व्यापारिक समीकरणों को बदल सकता है. हालांकि ये रूट एक स्थायी समाधान नहीं हो सकता और सबकी नजरें अभी भी पश्चिम एशिया तनाव पर विराम के लिए तरस रही हैं.

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